Khandwa News: खंडवा में एक ऐसा परिवार है, जहां सेवा की परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है. पिता ने साल 1975 में महज 5 रुपये फीस लेकर गरीबों का इलाज शुरू किया था. आज बेटा उसी सेवा को आगे बढ़ाते हुए लोगों को शराब की लत से छुटकारा दिला रहा है. खास बात ये कि यह काम आयुर्वेदिक दवा के जरिए किया जा रहा है, जिससे अब तक सैकड़ों लोगों को फायदा मिल चुका है. दरअसल, खंडवा के डॉ. मनीष खेडेकर इन दिनों अपनी एक अलग मुहिम को लेकर चर्चा में हैं. उन्होंने शराब की लत से परेशान लोगों के लिए आयुर्वेदिक औषधि तैयार की है, जिसके जरिए वे लोगों की शराब छुड़वाने का दावा कर रहे हैं.
Local 18 से बातचीत में उन्होंने बताया, ये काम अपने पिता की प्रेरणा से किया है, जो सालों तक लोगों का इलाज करते रहे हैं. कई बार तो मरीजों के पास पैसे नहीं होते थे, तब उनके पिता मुफ्त में इलाज किया करते थे. डॉ. मनीष ने बताया कि उन्होंने जो आयुर्वेदिक औषधि तैयार की है, वह 1 से 2 महीने में असर दिखाती है. उनका दावा है कि इस दवा से शराब पीने वाले व्यक्ति की लत धीरे-धीरे खत्म हो जाती है और वह खुद ही शराब से दूरी बनाने लगता है. इस दवा की कीमत करीब 4500 रुपये रखी गई है, क्योंकि औषधि तैयार करने में लागत आती है. उनका कहना है कि जितनी लागत होती है, उतने ही पैसे लिए जाते हैं.
700 से ज्यादा परिवारों को फायदा
डॉक्टर ने दावा कि अब तक 700 से ज्यादा लोगों की शराब छूट चुकी है. कई ऐसे परिवार हैं जो पहले इस समस्या से परेशान थे, लेकिन अब सामान्य जिंदगी जी रहे हैं. डॉक्टर का कहना है कि शराब की वजह से परिवार टूटते हैं, झगड़े होते हैं और आर्थिक हालत भी खराब हो जाती है, ऐसे में अगर कोई इससे बाहर निकलता है तो पूरे परिवार की जिंदगी बदल जाती है.
मरीज नहीं आता डॉक्टर के पास
खास बात ये कि इस दवा को देने के लिए शराब पीने वाले व्यक्ति को क्लीनिक लाने की जरूरत नहीं होती. डॉक्टर बताते हैं कि उनके पास अक्सर परिजन ही आते हैं और दवा लेकर जाते हैं. उनकी एक शर्त रहती है कि शराब पीने वाले को सीधे न लाया जाए, क्योंकि अगर उसे पहले से पता चल गया तो वो दवा लेने से बच सकता है. यह दवा पाउडर के रूप में होती है, जिसे खाने-पीने की चीजों में मिलाकर आसानी से दिया जा सकता है.
नशा मुक्ति केंद्र भी
वहीं, डॉक्टर मनीष खेडेकर 4 साल से नशा मुक्ति केंद्र भी चला रहे हैं. उनका कहना है कि उनका सपना एक ही है, नशा मुक्त भारत. उनकी क्लिनिक पर दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं और लगातार इस मुहिम से जुड़ रहे हैं. खंडवा के हातमपुरा बाजार, शिवाजी चौक के पास स्थित उनके क्लीनिक पर लोगों की भीड़ देखने को मिलती है.
जहां पिता बैठते थे, वहीं से कर रहे इलाज
डॉक्टर बताते हैं कि उनके पिता स्व. डॉ. सीएल खेडेकर, जिन्हें लोग छज्जू भैया के नाम से जानते थे, उन्होंने 1975 में डॉक्टरी शुरू की थी और साल 2012 तक लगातार सेवा देते रहे. वे कहते हैं कि आज भी वे उसी जगह बैठकर मरीज देखते हैं, जहां उनके पिता बैठा करते थे. पिता की एक बात उन्हें हमेशा याद रहती है कि ”ऐसा काम करो कि लोग तुम्हें याद रखें”.
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