पिता बिस्तर पर, बेटा टूटने की कगार पर…किराना दुकानदार का लाल रेलवे में बना अफसर, यूं लिखी सफलता की कहानी

मुजफ्फरपुर: एक वक्त था जब लगा कि सब कुछ खत्म हो जाएगा…पापा कोविड से जूझ रहे थे. घर में कमाने वाला कोई नहीं था और लग रहा था कि अब मेरी पढ़ाई छूट जाएगी. यह शब्द मुजफ्फरपुर के एमआईटी (MIT) कॉलेज के छात्र अभिषेक कुमार के हैं, जिन्होंने तमाम मुश्किलों को हराकर अपने पहले ही प्रयास में रेलवे भर्ती बोर्ड की जूनियर इंजीनियर (RRB JE) परीक्षा पास कर ली है. बक्सर के एक छोटे से किराना दुकानदार के बेटे की यह कहानी दृढ़ संकल्प और अटूट मेहनत की मिसाल है.

इंजीनियर भैया को देख जागा सपना
बक्सर के रहने वाले अभिषेक के पिता जय प्रकाश जायसवाल एक किराना दुकान चलाते हैं और उनकी माँ मंजू देवी एक गृहणी हैं. अभिषेक की प्रेरणा की कहानी बचपन में ही शुरू हो गई थी. जब वह 10वीं कक्षा में थे, तो उन्होंने अपने पड़ोस के एक इंजीनियर को देखा और उनसे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने तभी ठान लिया कि उन्हें भी इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाना है. 12वीं में फिजिक्स के ‘इलेक्ट्रोस्टैटिक्स’ चैप्टर ने उनके इस सपने को इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनने के जुनून में बदल दिया.
कोरोना काल की चुनौती और टूटता हुआ हौसला
JEE Mains पास करने के बाद अभिषेक ने 2020 में एमआईटी, मुजफ्फरपुर में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया. लेकिन यह वही दौर था जब कोरोना महामारी ने देश को अपनी चपेट में ले लिया था. पढ़ाई ऑनलाइन शुरू हुई, लेकिन असली चुनौती तब आई जब घर में कमाने वाले एकमात्र सदस्य, उनके पिता, कोरोना से संक्रमित हो गए.
अभिषेक उस मुश्किल दौर को याद करते हुए कहते हैं, वह एक महीना हमारे परिवार के लिए बहुत भयानक था. पापा एक महीने तक बीमार रहे. लोगों ने हमसे दूरी बना ली थी, कोई पास नहीं आता था. एक तरफ पिता की देखभाल, दूसरी तरफ घर की चिंता और अपनी पढ़ाई, सब कुछ एक पहाड़ जैसी चुनौती बन गया था. मुझे लगा मेरा सपना अब टूट जाएगा. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हुई और अभिषेक ने अपनी पढ़ाई पर फिर से पूरा ध्यान केंद्रित किया.
GATE नहीं तो RRB JE, बैकअप प्लान से मिली सफलता
कॉलेज के दौरान अभिषेक ने GATE की तैयारी शुरू की, लेकिन उसमें सफलता नहीं मिली. उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और तुरंत अपना एक बैकअप प्लान तैयार किया. उन्होंने RRB JE परीक्षा पर ध्यान केंद्रित किया और अपनी पूरी लगन से तैयारी में जुट गए. उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने पहले ही प्रयास में यह प्रतिष्ठित परीक्षा पास कर ली.
अब अभिषेक 3 नवंबर को मुंबई के सीएसएमटी में जूनियर इंजीनियर का पद संभालने जा रहे हैं. इस खबर से न केवल उनके परिवार में बल्कि पूरे एमआईटी कॉलेज में खुशी का माहौल है.

सफलता का श्रेय और युवाओं को संदेश
अभिषेक अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजनों को देते हैं, जिन्होंने हर परिस्थिति में उनका साथ दिया. वह आज के युवाओं को संदेश देते हुए कहते हैं, आज के इंटरनेट के युग में पढ़ाई के लिए पैसा बाधा नहीं है. अपने लक्ष्य को पहचानें, उसका सिलेबस समझें और ईमानदारी से लगातार मेहनत करें. अधिक से अधिक प्रश्नों को हल करने का अभ्यास करें, क्योंकि प्रैक्टिस ही कॉन्सेप्ट को मजबूत बनाती है. एमआईटी के प्राचार्य डॉ.एम.के. झा और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष डॉ.वाई.एन शर्मा ने अभिषेक को बधाई देते हुए कहा कि वह शुरू से ही एक मेधावी छात्र रहे हैं और उनकी यह सफलता अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी.

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