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Purnia Abhigyan Anand Story: पूर्णिया के रहने वाले एक होनहार बच्चे ने अपनी गणितीय प्रतिभा के दम पर पूरे देश में पूर्णिया का नाम रौशन किया है. महज 9 साल की उम्र में अभिज्ञान ने मैथमेटिक्स में नया रिकॉर्ड बनाते हुए इंडिया बुक्स ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया है. जिससे अब उसकी चर्चा हो रही हैं. अभिज्ञान आनंद ने 125 के पहले 100 गुणकों को सबसे कम समय में सुनाने का रिकॉर्ड बनाया है.
पूर्णियाः पूर्णिया के रहने वाले एक होनहार बच्चे ने अपनी गणितीय प्रतिभा के दम पर पूरे देश में पूर्णिया का नाम रौशन किया है. महज 9 साल की उम्र में अभिज्ञान ने मैथमेटिक्स में नया रिकॉर्ड बनाते हुए इंडिया बुक्स ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया है. जिससे अब उसकी चर्चा हो रही हैं. अभिज्ञान आनंद ने 125 के पहले 100 गुणकों को सबसे कम समय में सुनाने का रिकॉर्ड बनाया है. वहीं उन्होंने 125, 250, 375 से लेकर 12,500 तक के 100 गुणकों को मात्र 1 मिनट 14 सेकंड 59 मिली सेकंड में बिना रुके और बिना किसी गलती के सुनाकर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की.
ना कैलकुलेटर नहीं पेन पेपर मिनटों में बता देता 125 के गुणक
अभिज्ञान वर्तमान में पूर्णिया के उर्स लाइन कॉन्वेंट स्कूल में पांचवीं क्लास का छात्र है. पढ़ाई के साथ-साथ गणित में उसकी गहरी रुचि और तेज याददाश्त उसे अन्य बच्चों से अलग बनाती है. अभिज्ञान के पिता आशीष कुमार एक सरकारी स्कूल के शिक्षक हैं. वही उनका माता मनीषा आनंद गृहिनी है. जिनका मार्गदर्शन और प्रोत्साहन अभिज्ञान की इस सफलता में अहम भूमिका निभा रहा है. वहीं अभिज्ञान आनंद को इलेक्ट्रॉनिक चीजों की पढ़ाई करना और इलेक्ट्रॉनिक चीजों में अधिक रुचि है. जबकि उन्होंने कहा कि वह पढ़ लिख कर नेवी ऑफिसर बनना चाहते हैं. उनका यह सपना है कि वह पढ़ लिखकर नेवी ऑफिसर बने.
डिजिटल दौर में अभिज्ञान आनंद बने मिसाल
वहीं न्यूज 18 लोकल से बात करते हुए अभिज्ञान आनंद के परिवार के चाचा अमित गांधी, दादी शारदा देवी, मामा विशाल आनंद एवं उनके शिक्षक रोशन झा सहित अन्य ने बताया कि अभिज्ञान की इस उपलब्धि से न सिर्फ उनके परिवार और स्कूल में खुशी की लहर है, बल्कि पूरे पूर्णिया जिले में गर्व का माहौल है. वही छोटी सी उम्र और अच्छे संस्कार और अपनी मेहनत से राष्ट्रीय स्तर पर रिकॉर्ड बनाकर अभिज्ञान ने ये साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी उम्र की मोहताज नहीं होती बशर्ते हौसले मजबूत और ईरादे नेक चाहिए. वही इस डिजिटल दौर में अभिज्ञान आनंद जैसे बच्चे आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं. उनकी ये उपलब्धि निश्चित रूप से अन्य बच्चों को भी पढ़ाई और गणित के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए उत्साहित करेगी.
पढ़ाई का ना समझे बोझ, मजे से करे पढाई..
वही अभिज्ञान आनंद ने उन सभी पढ़ने वाले बच्चों को भी संदेश देते हुए कहा कि पढ़ाई को कभी भी बोझ समझ कर ना करें पढ़ाई. इसे मजे के साथ पढ़े और जो भी पढ़े मन से पढ़ें पढ़ाई को हल्के समझ कर पढ़ने में खूब मजा भी आता है और लोगों को जल्दी सफलता मिलती है. पढ़ाई करना ही बहुत जरूरी है पढ़ाई के बिना हर काम अधूरा है पढ़ाई सबसे हल्की चीज हैं.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
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