8 लाख का पैकेज छोड़ शुरू कर दी खेती, आज लौकी-कद्दू से कमा रहे 24 लाख सालाना, 25 लोगों को दिया रोजगार!

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Engineer Became Farmer: अगर आप किसी चीज को ठान लो तो कामयाब हासिल होना तय है, इस बात को साबित कर दिखाया है बालाघाट के किसान ने, आइए जानते हैं इनकी कहानी.

आज के किसान चाहते हैं कि उनके बच्चे पढ़े लिखे और खूब आगे बढ़ें. इसमें भी पढ़ने लिखने के बाद कोई माता-पिता चाहते हैं कि बच्चे डॉक्टर बने या फिर इंजिनियर बनें. लेकिन कोई किसान नहीं चाहता है कि उनका बेटा भी किसान बने. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसके पीछे का तर्क है खेती में फायदे की गुंजाइश नहीं है. लेकिन बालाघाट जिले में एक इंजीनियर ऐसा है, जिसने इंदौर के एक निजी कॉलेज से बीटेक किया और 8 लाख का पैकेज भी हासिल किया. लेकिन नौकरी से मोहभंग हुआ और शुरू कर दी पुश्तैनी खेती. जानिए शख्स की कहानी…

नौकरी छोड़ शुरु कर दी खेती
बालाघाट जिले की परसवाड़ा तहसील के अरंडिया के रहने वाले विनीत पटेल पेशे से इंजीनियर हुआ करते थे. कोरोना काल के दौरान वह 8 लाख रुपए का पैकेज छोड़ अपने पुश्तैनी खेती शुरु कर दी. उनके पिता संपत पटेल ने बताया कि पहले वह पारंपरिक खेती करते थे. इसमें वह धान, गेहूं और चना की खेती करते थे. लेकिन अब उन्होंने अपने पिता की खेती का रूप ही बदल दिया और चार सीजन कद्दूवर्गीय सब्जियों की खेती करते हैं, जिसमें वे कद्दू, करेला, लौकी, ककड़ी और अन्य सब्जियां उगाते हैं.

इंजीनियरिंग छोड़ी तो कमाई हुई तीन गुना
वे 6 एकड़ भूमि में खेती कर रहे हैं और प्रति एकड़ लगभग 4 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं.उनकी सब्जियां स्थानीय बाजारों और मंडियों में अच्छी कीमत पर बिकती हैं. यानी कि वह करीब 18 से 24 लाख रुपए तक की कमाई एक साल में कर लेते हैं.

हाइब्रिड और स्वदेशी बीजों का संतुलित उपयोग
विनीत बताते हैं कि वे हाइब्रिड और स्वदेशी दोनों तरह के बीजों का इस्तेमाल करते हैं. स्वदेशी सब्जियों की स्थानीय बाजार में अधिक मांग रहती है. हाइब्रिड बीजों से अधिक उत्पादन मिलता है, जिसे वे बड़ी मंडियों में भेजते हैं.

फर्टिगेशन तकनीक से सिंचाई और खाद एक साथ
विनीत पटेल का फार्म आधुनिक तकनीकों और उपकरणों से लैस है. वे कल्टीवेटर से जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाते हैं, जिससे पोषक तत्वों का संचार अच्छे से होता है. नमी संरक्षण के लिए मल्चिंग तकनीक का उपयोग करते हैं, जिससे खरपतवार नियंत्रण भी बेहतर होता है. विनीत ने ड्रिप इरिगेशन के साथ-साथ फर्टिगेशन तकनीक भी अपनाई है. इस तकनीक में सिंचाई के साथ उर्वरक भी मिलता है, जिससे पौधों को आवश्यक पोषक तत्व आसानी से मिल जाते हैं.

स्मार्ट किसान की दूसरों को सलाह
विनीत पटेल का कहना है कि अगर किसान पारंपरिक खेती की जगह बाजार की मांग के अनुसार आधुनिक खेती करें, तो उनकी आमदनी कई गुना बढ़ सकती है.सही तकनीकों का उपयोग और वैज्ञानिक खेती ही सफलता की कुंजी है. सरकार की ओर से भी सब्सिडी और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ उठाकर किसान अपनी खेती को लाभकारी बना सकते हैं.

shweta singh

Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें

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