घाटे में गेहूं बेचने को मजबूर किसान, किसी के घर शादी तो किसी को चुकानी उधारी

सागर. मध्य प्रदेश के सागर संभाग में 7 अप्रैल से उपार्जन केंद्र पर गेहूं की खरीदी शुरू की जानी थी लेकिन समय आने से एक हफ्ते पहले ही इसकी तारीख बढ़ा दी गई और अब 15 अप्रैल से खरीदी की जाएगी. यह तीसरा मौका है जब गेहूं खरीदी की तारीख बढ़ाई गई है. सागर जिले में लगभग एक लाख किसानों ने रबी सीजन में अपना अनाज बेचने के लिए पंजीयन करवाया है लेकिन तीन बार खरीदी की तारीख बढ़ने से किसानों को झटका लगा है और उन्हें मजबूरी में बाजार में या फिर व्यापारियों को मंडी में अपना गेहूं बेचना पड़ रहा है. इसका नतीजा यह है कि किसी किसान को 500 का तो किसी को 300 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान तक झेलना पड़ रहा है. अगर कोई किसान 100 क्विंटल गेहूं लेकर मंडी पहुंचता है, तो उसे लगभग 30 से 50 हजार रुपये तक का नुकसान झेलना पड़ रहा है.

एक तरफ सरकार ने गेहूं खरीदी करने की तारीख बढ़ाई, दूसरी तरफ किसानों को कर्ज चुकाने की चिंता सताने लगी क्योंकि किसानों द्वारा बीज से लेकर बुआई, निराई, कटाई तक सबकुछ उधारी में करवाया जाता है और जैसे ही फसल आती है, तो सभी कर्ज देने वाले किसानों के घरों के चक्कर लगाने लगते हैं. उन्हें डर रहता है कि किसान कहीं यह माल बेचकर पैसा खर्च न कर दे और किसानों पर भी कर्ज चुकाने का प्रेशर रहता है, जिसकी वजह से वे उपार्जन समितियों की जगह मंडी में अनाज बेच रहे हैं. शनिवार को सागर कृषि उपज मंडी में गेहूं का न्यूनतम भाव 2100 रुपये प्रति क्विंटल और मॉडल भाव 2265 रुपये प्रति क्विंटल रहा जबकि सरकार द्वारा मय बोनस के 2625 रुपये प्रति क्विंटल में खरीदी की जाएगी. इस तरह से किसानों को बाहर बेचने पर काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है लेकिन किसानों की ऐसी क्या मजबूरियां हैं, जिसकी वजह से वे यह नुकसान सहने को भी तैयार हैं.

पैसा चुकाने की मजबूरी
पड़रई गांव से आए किसान मेघराज सिंह ने लोकल 18 से कहा कि वह दो तरह का गेहूं लेकर आए थे, जिसमें एक गेहूं का भाव 2270 रुपये मिला है और दूसरे गेहूं का भाव 2480 रुपये मिला है. इसमें एक में ₹400 का नुकसान प्रति क्विंटल हो रहा है, दूसरे में 150 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान हो रहा है. जिन लोगों से पैसा लिया था और उधारी में काम करवाया था, उनका पैसा चुकाना है, इसलिए मजबूरी में बाहर बेच रहे हैं. सरकार कह तो रही है कि 15 अप्रैल से खरीदी कर लेंगे लेकिन अगर फिर से तारीख बढ़ा दी, तो फिर क्या करेंगे. जब खरीदी शुरू होगी, इसके बाद स्टॉल बुकिंग होगी, तारीख मिलेगी, हम लोगों का अनाज बिकेगा, फिर पता नहीं कब पैसे आएंगे, इसलिए मंडी में बेच रहे हैं.

पैसा मिलने की गारंटी नहीं
मोहली बिजुरी से आए किसान कीरत सिंह लोधी ने बताया कि वह 30 क्विंटल गेहूं लेकर आए हैं. सरकार कब खरीदी करेगी, पता नहीं लेकिन हमारे घर में 25 अप्रैल को शादी है, जिसका इंतजाम करना है. अगर हम 15 अप्रैल तक के लिए रुकते भी हैं, तो इसकी कोई गारंटी नहीं है कि पैसा कब मिलेगा, इसलिए मजबूरी में व्यापारियों को अपना अनाज बेच रहे हैं. 30 क्विंटल में हमें 9000 रुपये का नुकसान हो रहा है क्योंकि 2300 रुपये प्रति क्विंटल में गेहूं खरीदा गया है. शादी के लिए तो पैसों की जरूरत है ही. अगर यही उपार्जन समय से शुरू हो जाता, तो यह जो 9000 रुपये हैं, इसमें हम शादी के लिए कोई चीज खरीद सकते थे.

मौसम की मार से फसल पर असर
अमोदा के किसान राम सेवक लोधी ने कहा कि उन्होंने इस बार 6 एकड़ में गेहूं बोया था. पहले तो मौसम में उतार-चढ़ाव की वजह से उपज कम हुई है. 10 का एवरेज निकला है और फिर ऊपर से उपार्जन की तारीख बढ़ने से मंडी में गेहूं बेचने को मजबूर हैं. 2150 रुपये प्रति कुंतल की दर से गेहूं बिका है. 450 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान हो रहा है. बामोरा के किसान मदन सिंह ने कहा कि वह 50 क्विंटल गेहूं लेकर आए हैं. 2325 रुपये कुंतल के हिसाब से खरीदा गया है. इसमें उन्हें ₹300 का नुकसान हो रहा है. अचानक बारिश होने लगी, इसलिए हार्वेस्टर से कटवाया है. पिछले साल मकान गिर गया था. मकान का काम लगा हुआ है. घर पर गेहूं रखने की जगह नहीं है, इसलिए मंडी लेकर आ गए. अब यहां जितने का खरीद रहे, उतने दाम पर बेचना पड़ रहा है.

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