धार जिले के राजोद क्षेत्र के किसानों ने नवाचार और जल संरक्षण के माध्यम से खेती की तस्वीर बदल दी है। माही परियोजना के कालीकराय उपबांध से सिंचाई सुविधा मिलने के बाद पिछले 15 वर्षों में यहां हरित क्रांति आई है। किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर उद्यानिकी और सब्जी उत्पादन को लाभ का व्यवसाय बना चुके हैं। क्षेत्र के कई किसानों ने अपने खेतों में ‘वाटर बैंक’ यानी तालाब विकसित किए हैं। इन तालाबों के कारण गर्मी के मौसम में भी फसलों की सिंचाई सुचारु रूप से हो रही है। गिरते भूजल स्तर को देखते हुए किसानों ने अपने खर्च पर ये तालाब खुदवाए हैं। सिंचाई की समस्या से छुटकारा मिला
किसान गोपाल धाकड़, नारायण धाकड़ और शंकर धाकड़ ने बताया कि तालाब बनने से सिंचाई की समस्या काफी हद तक समाप्त हो गई है। इससे फसलों की पैदावार में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राजोद क्षेत्र में गोभी, टमाटर, बैंगन, मिर्च, गराडु, अरवी और अदरक जैसी सब्जियों की बड़े पैमाने पर खेती की जा रही है। यहां से प्रतिदिन 90 से 100 टन सब्जियां इंदौर सहित अन्य शहरों की मंडियों में भेजी जाती हैं। डाउन सीजन में भी 40 से 50 टन सब्जियों का परिवहन होता है। सब्जियों के साथ-साथ अमरूद उत्पादन भी इस क्षेत्र की पहचान बन गया है। वीएनआर, रेड डायमंड और पिंक अमरूद की दिल्ली, गुवाहाटी, सिलीगुड़ी, पटना और पूर्णिया जैसे शहरों तक मांग है। किसान अब अमरूद के बाद आम की बागवानी की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। .