मुश्किल में किसान, बोले- धान बेचने से पहले ही लड़नी पड़ रही है जंग

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Agriculture News: किसानों पर ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग से लेकर ट्रांसपोर्टेशन तक पहले ही कई तरह का बोझ है. वहीं खरीदी केंद्र का दूर होना उनकी मुश्किलें और बढ़ा रहा है.

सतना. धान खरीदी का सीजन शुरू होते ही मध्य प्रदेश के किसानों की परेशानियां एक बार फिर सतह पर आ गई हैं. सतना जिले के कई गांवों में इस बार खरीदी केंद्र न सिर्फ देरी से शुरू हुए बल्कि जिन केंद्रों को गांव के पास खोले जाने की योजना थी, उन्हें अचानक दूर शिफ्ट कर दिया गया. ऐसे में किसानों को न सिर्फ लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है बल्कि अपनी फसल लेकर जाने में ट्रांसपोर्टेशन का अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ रहा है. स्थानीय किसान इसे सरकार द्वारा तय की गई सुविधाओं से वंचित करना बता रहे हैं. लोकल 18 से बातचीत में मंडल अध्यक्ष बिरसिंहपुर रामभिलेख तिवारी ने बताया कि सेवा सहकारी समिति के अंतर्गत जो धान उपार्जन केंद्र भाग क्रमांक-2 शुकवाह के नाम से पंजीकृत है, उसे हरिहरपुर में संचालित किया जा रहा है. हरिहरपुर शुकवाह से लगभग 15 किलोमीटर दूर है. इससे शुकवाह सहित लगभग 50 गांव के किसानों को उल्टा रास्ता तय कर अपनी ट्रैक्टर ट्रॉली या ट्रक लेकर धान बेचने जाना पड़ रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्र शुकवाह के नाम से पंजीकृत है, तो उसे वहीं शुरू किया जाना चाहिए था जैसा कि हर साल होता आया है.

स्थानीय निवासी और रिटायर्ड हवलदार आरआर तिवारी ने कहा कि यह समस्या सिर्फ शुकवाह तक सीमित नहीं है बल्कि आसपास गांवों के किसान भी यही परेशानी झेल रहे हैं. शुकवाह में करीब 3000 की आबादी है, जिसमें अधिकतर लोग कृषि पर निर्भर हैं. धान उनकी मुख्य फसल है, जिसे बेचकर वे अगली फसल की तैयारी, खाद–बीज खरीद और खेती के अन्य खर्चों की योजना बनाते हैं. ऐसे में खरीदी केंद्र को अचानक दूर शिफ्ट कर देना किसानों के लिए बड़ा झटका है.

किसानों पर बढ़ गया बोझ
ग्राम उमरहन निवासी उपाध्याय ने बताया कि ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग से लेकर ट्रांसपोर्टेशन तक किसानों पर पहले ही कई तरह का बोझ है. ऊपर से केंद्र का दूर होना उनकी मुश्किलें दोगुनी कर रहा है. किसान खुद का माल संभालें, तौल कराएं और ट्रांसपोर्ट का खर्च भी दे. अब ऐसे में समय पर धान बेच पाना ही चुनौती बन गया है.

एक–तिहाई केंद्र अभी तक चालू नहीं
जानकारी के अनुसार, पंजीकृत किसानों से एमएसपी पर खरीदी के लिए कुल 103 केंद्र बनाए गए हैं. उपार्जन कार्य एक दिसंबर से शुरू होने के बावजूद करीब एक तिहाई केंद्र चालू नहीं हो पाए हैं. बड़ी समस्या यह है कि जिन किसानों को उपार्जन शुरू होने के एक दिन पहले तक ऑनलाइन मैसेज भेज दिए गए थे, वे अब केंद्र बंद मिलने पर ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.

30 हजार किसानों ने बुक किए स्लॉट
आपूर्ति विभाग के अनुसार, अब तक लगभग 30 हजार किसानों ने एमएसपी पर धान बेचने के लिए ऑनलाइन स्लॉट बुक कर लिए हैं. इन स्लॉट की वैधता 7 दिनों की है लेकिन यदि किसान केंद्र बंद होने या दूरी की वजह से तय अवधि में धान नहीं बेच पाते हैं, तो उनके स्लॉट स्वतः निरस्त हो जाएंगे.

किसानों का कहना है कि ऐसी व्यवस्था से उनका सीजन प्लान बिगड़ रहा है और समय पर खरीदी न होने की स्थिति में वे आर्थिक संकट में भी फंस सकते हैं. अब देखना यह होगा कि प्रशासन किसानों की इन समस्याओं को कितनी जल्दी संज्ञान में लेता है और समाधान करता है.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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