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रतनलाल बैरवा का कहना है कि बायोगैस प्लांट उनके परिवार के लिए ऊर्जा का एक स्थायी और भरोसेमंद स्रोत बन गया है। इससे उन्हें आर्थिक रूप से भी राहत मिली है और खेती के लिए जैविक खाद का अच्छा विकल्प भी मिला है। उन्होंने बताया कि आसपास के कई किसान भी इस प्लांट को देखकर इसके बारे में जानकारी ले रहे हैं और इसे अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। किसान ने इस पहल के
भीलवाड़ा: भीलवाड़ा जिले के फूलिया कलां क्षेत्र में एक किसान ने स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में पहल करते हुए अपने घर पर बायोगैस प्लांट स्थापित किया है. इससे न केवल घरेलू गैस की जरूरत पूरी हो रही है, बल्कि खेतों के लिए जैविक खाद भी मिल रही है. फूलिया कलां क्षेत्र के किसान रतनलाल बैरवा ने राजस्थान सरकार और कृषि विभाग के सहयोग से अपने घर पर सिस्टमा BIO-8 बायोगैस प्लांट लगवाया है. यह प्लांट 26 जनवरी को सिस्टमा बायो कंपनी द्वारा लगाया गया, जिसमें फूलिया कलां किसान उत्पादक संगठन का भी सहयोग रहा. इस प्लांट को लगाने में कुल 49,500 रुपये की लागत आई है. किसान का कहना है कि यह पहल न केवल उनके परिवार के लिए फायदेमंद साबित हो रही है, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी एक प्रेरणा बन रही है.
किसान रतनलाल बैरवा के पास फिलहाल तीन गायें और दो भेड़ें हैं, जिनसे रोजाना पर्याप्त मात्रा में गोबर प्राप्त होता है. पहले इस गोबर का पूरा उपयोग नहीं हो पाता था लेकिन अब इसे बायोगैस प्लांट में डालकर उपयोगी ऊर्जा तैयार की जा रही है. गोबर से बनने वाली गैस का उपयोग घर में खाना बनाने के लिए किया जा रहा है. इससे गैस सिलेंडर पर होने वाला खर्च भी काफी कम हो गया है. इसके अलावा बायोगैस प्लांट से निकलने वाली स्लरी खेतों में जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल की जा रही है, जिससे फसलों को प्राकृतिक पोषण मिल रहा है.
किसान का कहना है कि इससे रासायनिक खाद की जरूरत भी धीरे-धीरे कम हो रही है और खेती की लागत घटने के साथ मिट्टी की सेहत भी बेहतर बन रही है. सिस्टमा BIO-8 बायोगैस प्लांट आधुनिक तकनीक से तैयार किया गया है. यह प्लांट LLDPE मटेरियल से बना हुआ है, जिसकी अनुमानित आयु 10 साल से भी अधिक बताई जा रही है. इस प्लांट की क्षमता 2.5 घन मीटर है और इससे हर महीने लगभग 26.72 किलोग्राम मीथेन गैस का उत्पादन होता है. यह उत्पादन लगभग दो एलपीजी गैस सिलेंडर के बराबर माना जाता है. इस गैस का उपयोग किसान का परिवार रोजमर्रा के भोजन बनाने में कर रहा है. इससे रसोई का खर्च कम होने के साथ-साथ धुएं से होने वाली परेशानी भी समाप्त हो गई है. किसान का कहना है कि पहले लकड़ी या गैस सिलेंडर पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब घर में ही स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध हो रही है.
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यह बायोगैस संयंत्र मजबूत एचडीपीई प्लास्टिक से तैयार किया गया है, जो लंबे समय तक टिकाऊ रहता है. इसमें गोबर और पानी को मिलाकर एक मिश्रण तैयार किया जाता है, जिसे प्लांट में डाला जाता है. मौसम के अनुसार इसमें डाले जाने वाले गोबर और पानी की मात्रा भी बदलती रहती है. किसान रतनलाल ने बताया कि गर्मियों के मौसम में करीब 60 किलोग्राम गोबर और 120 लीटर पानी मिलाकर प्लांट में डाला जाता है. वहीं सर्दियों में लगभग 30 किलोग्राम गोबर और 60 लीटर पानी का मिश्रण तैयार किया जाता है. वर्षा ऋतु में करीब 40 किलोग्राम गोबर और 80 लीटर पानी का उपयोग किया जाता है. इस प्रक्रिया के बाद पाइप के माध्यम से बाहर निकलने वाली जैविक स्लरी खेतों के लिए बहुत उपयोगी खाद साबित होती है.
किसान रतनलाल का कहना है कि बायोगैस प्लांट लगाने के बाद उनके घर में कई फायदे देखने को मिले हैं. सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि रसोई गैस सिलेंडर पर होने वाला खर्च काफी कम हो गया है. इसके अलावा अब घर में स्वच्छ और धुआं रहित ईंधन उपलब्ध हो रहा है, जिससे परिवार के सदस्यों को भी राहत मिली है. गोबर का बेहतर उपयोग होने से आसपास गंदगी भी कम होती है और खेतों को जैविक खाद मिल जाती है. इससे फसलों की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है. किसान का कहना है कि यह छोटा सा कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण योगदान साबित हो रहा है.
रतनलाल बैरवा का कहना है कि बायोगैस प्लांट उनके परिवार के लिए ऊर्जा का एक स्थायी और भरोसेमंद स्रोत बन गया है. इससे उन्हें आर्थिक रूप से भी राहत मिली है और खेती के लिए जैविक खाद का अच्छा विकल्प भी मिला है, उन्होंने बताया कि आसपास के कई किसान भी इस प्लांट को देखकर इसके बारे में जानकारी ले रहे हैं और इसे अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं. किसान ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, जिला प्रशासन और ग्राम पंचायत का आभार व्यक्त किया है. उनका कहना है कि यदि अधिक से अधिक किसान इस तरह के बायोगैस प्लांट अपनाते हैं तो गांवों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण को भी बड़ा लाभ मिलेगा.
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