शहर में फर्जी सिम कार्ड के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। यहां एक पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) शॉप संचालक ने एक ही व्यक्ति के आधार और फोटो का इस्तेमाल कर सैकड़ों लोगों के नाम पर फर्जी सिम कार्ड जारी कर दिए। मामले का खुलासा तब हुआ, जब जिस व्यक्ति की फोटो सिम फॉर्म में लगाई जा रही थी, वह खुद पुलिस के पास पहुंच गया। पुलिस को आशंका है कि इन फर्जी सिम कार्ड्स का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी में किया गया होगा। अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क के खुलासे के बाद कई साइबर फ्रॉड मामलों की कड़ियां जुड़ सकती हैं। एक फोटो, अलग-अलग नाम… ऐसे चला पूरा खेल पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी उमेश कुशवाह (निवासी गिरवाई, मूल रूप से भिंड) ने अपने साथी आशीष नागर को लालच देकर इस काम में शामिल किया था। आशीष का काम ग्राहकों की जगह खुद की फोटो लगाकर सिम एक्टिवेट करना था। इसके बदले उसे हर सिम पर करीब 500 रुपए मिलते थे, जबकि आरोपी एक सिम के लिए एक से डेढ़ हजार रुपए तक वसूलता था। जांच के दौरान पता चला कि मुख्य आरोपी को पुलिस कार्रवाई की भनक लग गई थी। उसने इंस्टाग्राम मैसेंजर के जरिए अपने साथी आशीष को मैसेज भेजकर अंडरग्राउंड होने की सलाह दी। इसी तरीके से सैकड़ों सिम एक ही फोटो और आधार के जरिए फर्जी दस्तावेज बनाकर एक्टिव कर दिए गए। ऑपरेशन ‘FACE’ में पहली FIR पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन ‘FACE’ (फेशियल ऑथेंटिकेशन कम्प्लायंस इंफाेर्समेंट) के तहत यह ग्वालियर में पहली बड़ी कार्रवाई है। झांसी रोड थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। एक ही इलाके के नाम पर सिम जारी अब तक पुलिस ने 7 फर्जी सिम बरामद किए हैं। ये सभी सिम गुढ़ा-गुढ़ी का नाका क्षेत्र की प्रीतमपुर कॉलोनी और कुम्हारों के मोहल्ले के लोगों के नाम पर जारी किए गए थे, जबकि उनमें आशीष की फोटो लगी थी। आगे और बड़े खुलासे की संभावना पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। जांच आगे बढ़ने पर फर्जी सिम नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। पुलिस अफसरों की मानें तो यह फर्जी सिम नेटवर्क का खुलासा होने के बाद कई ऑनलाइन फ्रॉड में इन सिम कार्ड्स का उपयोग होना सामने आएगा। .