बंद हो जाएंगी फैक्ट्रियां, खतरे में रोजगार; ट्रंप के टैरिफ से टेक्सटाइल इंडस्ट्री को भयावह नुकस

India-US Trade Deal: अमेरिका के भारत पर लगाए गए 50 परसेंट टैरिफ से भारतीय एक्सपोटर्स को नुकसान पहुंच रहा है. खासकर, टेक्सटाइल एक्सपोर्ट पर इसके बुरे असर को देखते हुए अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) ने सरकार से यह कहते हुए कि तुरंत दखल देने की मांग की है कि देरी से प्रोडक्शन में कटौती और फैक्ट्रियां बंद हो जाएंगी.

वाइस-प्रेसिडेंट सीपी राधाकृष्णन को लिखे एक पत्र में अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) के चेयरमैन ए शक्तिवेल ने कहा कि अपैरल गारमेंट इंडस्ट्री को सपोर्ट और सही कार्रवाई की सख्त जरूरत है. 

अमेरिका भारतीय कपड़ों का बड़ा बाजार

अमेरिका भारतीय टेक्सटाइल और अपैरल का बहुत बड़ा बाजार है. कारोबारी साल 2024-25 में अमेरिका के लिए भारत का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट 36.61 अरब डॉलर का रहा. ऐसे में ट्रंप के लगाए गए टैरिफ से टेक्सटाइल एक्सपोटर्स को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है. AEPC के चेयरमैन ने कहा है कि देश के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट को बचाने के लिए भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ के मुद्दों को तुरंत सुलझाने की जरूरत है. कई बड़े भारतीय टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स के लिए US मार्केट उनके टोटल एक्सपोर्ट का लगभग 70 परसेंट है.

ट्रेड डील पर जल्द हल निकालने की जरूरत 

लेटर में यह भी कहा गया, “हाल ही में अमेरिका की तरफ से आयात पर लगाए गए 25 परसेंट टैरिफ और रूसी तेल से जुड़ी 25 परसेंट की एक्स्ट्रा पेनल्टी लगाने से भारत के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में, खासकर US में, जो भारत का सबसे बड़ा सिंगल एक्सपोर्ट मार्केट है, गंभीर रुकावट आ रही है.”

इसमें कहा गया कि अगर तुरंत इसका हल नहीं निकला, तो  इस सेक्टर को ऑर्डर रुकने, नौकरियां जाने और मार्केट शेयर का परमानेंट नुकसान हो सकता है. टेक्सटाइल एक्सपोर्ट बहुत कम मार्जिन पर काम करता है, जिससे लंबे समय तक टैरिफ के झटकों को झेलने की कोई क्षमता नहीं बचती. इसमें आगे कहा गया है कि टैरिफ से मुनाफे में भारी कमी आई है और यूनिट्स का रिजर्व भी कम हुआ है. 

नुकसान उठाने की और क्षमता नहीं

काउंसिल ने कहा कि 25 परसेंट डिस्काउंट के बाद भी टैरिफ का बोझ उठाना कमर्शियली नामुमकिन है और लागत को खरीदारों पर डालना भी सही नहीं है. काउंसिल ने भारत-अमेरिका व्यापार संधि को तुरंत खत्म करने की सिफारिश की है. इसमें कहा गया है, “टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने एक्सपोर्ट और रोजगार की रक्षा के लिए राष्ट्रीय हित में पहले ही काफी नुकसान उठाया है. अब और नुकसान सहने की क्षमता नहीं है. 3-6 महीने की देरी से भी एक रणनीतिक एक्सपोर्ट सेक्टर को स्थायी नुकसान हो सकता है.

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