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अमेरिका ने प्यूर्टो रिको के सैन्य अड्डे से वेनेजुएला पर अचानक स्ट्राइक कर निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया. एफ-35 लड़ाकू विमानों की गुप्त तैनाती से मादुरो शासन पूरी तरह चकमा खा गया. बड़ा सवाल यह है कि 1,20,000 की आर्मी और लगभग 2,20,000 लाख नेशनल गार्ड वाला देश को कैसे भनक तक नहीं लगी और अमेरिका स्ट्राइक कर घर से राष्ट्रपति को उठा ले गया.
प्यूर्टो रिको बना ट्रंप का ‘लॉन्च पैड’: स्वतंत्र कैरेबियाई देश प्यूर्टो रिको के सेइबा में स्थित रूजवेल्ट रोड्स बेस पर 31 दिसंबर से ही अमेरिकी युद्धक विमानों की कतारें लग गई थीं. F-35 जैसे आधुनिक स्टील्थ विमानों और C-130 जैसे भारी मालवाहक जहाजों की मौजूदगी ने हमले की नींव रख दी थी. वेनेजुएला के करीब होने के बावजूद, मादुरो शासन ने इसे केवल एक सामान्य सैन्य अभ्यास या दबाव की राजनीति समझने की भारी गलती की, जो अंततः उनके पतन का कारण बनी. (Reuters)

वेनेजुएला की सैन्य ताकत का भ्रम: ग्लोबल फायरपावर 2025 के अनुसार, वेनेजुएला सैन्य क्षमता में 160 देशों में से 50वें स्थान पर आता है. उसके पास 1,20,000 सक्रिय सैनिक और लगभग 2,20,000 नेशनल गार्ड सदस्य मौजूद हैं. लैटिन अमेरिका में ब्राजील और मैक्सिको के बाद ताकतवर होने के बावजूद, वेनेजुएला की वायु सेना (20,000 कर्मी) अमेरिका के F-35 स्टील्थ तकनीक और प्यूर्टो रिको से हुई अचानक कार्रवाई के सामने पूरी तरह विफल साबित हुई.

गिरफ्तारी वारंट और सुरक्षा घेरा: सीनेटर माइक ली के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने पुष्टि की है कि मादुरो को गिरफ्तार करने के लिए सैन्य स्ट्राइक का उपयोग किया गया था. ये हमले विशेष रूप से उन टीमों की सुरक्षा और बचाव के लिए किए गए थे जो मादुरो के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट को तामील कर रही थीं. अमेरिकी प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि गिरफ्तारी के दौरान वेनेजुएला की ओर से कोई भी संगठित जवाबी हमला न हो सके. (Reuters)
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इंटेलिजेंस फेलियर और रणनीतिक चूक: वेनेजुएला दो दिन पहले की हलचल को भांपने में विफल रहा क्योंकि अमेरिका ने प्यूर्टो रिको में तैनात विमानों का उपयोग बहुत सटीक तरीके से किया. आधुनिक राडार और 115,000 थल सैनिकों की मौजूदगी के बावजूद, वेनेजुएला की सेना अमेरिकी विशेष बलों के ‘सर्जिकल’ हस्तक्षेप को रोक नहीं पाई. मदुरो का खुफिया तंत्र यह अनुमान नहीं लगा सका कि अमेरिका युद्ध की घोषणा के बिना इतनी बड़ी कार्रवाई करेगा. (Reuters)

ऑपरेशन के बाद की शांति और रूबियो का रुख: मार्को रूबियो ने संकेत दिया है कि मादुरो के अमेरिकी हिरासत में आने के बाद अब वेनेजुएला में किसी और सैन्य कार्रवाई की योजना नहीं है. सीनेटर माइक ली ने रूबियो के हवाले से कहा कि मुख्य लक्ष्य ‘न्यायिक प्रक्रिया’ को शुरू करना था, जो मादुरो की गिरफ्तारी से पूरा हो गया है. यह दर्शाता है कि अमेरिका का उद्देश्य देश पर कब्जा करना नहीं, बल्कि सत्ता परिवर्तन और अपराधी को पकड़ना था. (Reuters)

घरेलू राजनीति और संवैधानिक प्रश्न: अमेरिका के भीतर इस कार्रवाई की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं. सीनेटर माइक ली ने एक्स (X) पर पूछा है कि बिना युद्ध की घोषणा या सैन्य बल के उपयोग के अधिकार (AUMF) के, इस कार्रवाई को संवैधानिक रूप से कैसे उचित ठहराया जा सकता है. यह विश्लेषण का विषय है कि क्या ट्रंप प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों और अमेरिकी संविधान के दायरे से बाहर जाकर एक विदेशी राष्ट्र प्रमुख को ‘अगवा’ किया है.

वेनेजुएला का अनिश्चित भविष्य: मादुरो की गिरफ्तारी के साथ ही वेनेजुएला में दशकों पुराने शासन का अंत हो गया है. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या मादुरो के बिना देश में गृहयुद्ध छिड़ेगा या मारिया कोरिना मचाडो जैसे विपक्षी नेता शांतिपूर्ण लोकतंत्र बहाल कर पाएंगे. रूबियो के ‘नो फर्दर एक्शन’ वाले बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका अब गेंद वेनेजुएला की स्थानीय जनता और राजनीतिक दलों के पाले में डालना चाहता है.
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