Explainer:समुद्र में जहाज पर फ्लैग लगाने का नियम क्या, कब दूसरे देशों का झंडा लगाते हैं

ये खबरें आ रही हैं कि ईरान युद्ध के दौरान होमुर्ज स्ट्रैट से निकलने के लिए कई जहाज अपने झंडे बदलकर दूसरे देशों के नेशनल फ्लैग लगा रहे हैं. क्या ये वास्तव में इतना आसान होता है. आखिर में समुद्र में चल रहे जहाजों के नेशनल फ्लैग लगाने का नियम क्या होता है. किसी भी जहाज या टैंकर पर लगे झंडे को लेकर देखकर उसके बारे में क्या पता लगता है. जानते हैं ये सबकुछ और ये भी दुनियाभर के ज्यादातर जहाज तीन देशों में ही रजिस्टर्ड क्यों हैं.

समुद्र में किसी जहाज या टैंकर पर राष्ट्रीय ध्वज लगाने का नियम अंतरराष्ट्रीय कानून की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है. ये जहाज की पहचान और उस पर लागू होने वाले कानूनों को तय करता है. किसी जहाज पर कौन सा झंडा लगेगा, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि वह जहाज किस देश में रजिस्टर्ड है. वैसे आपको बता दें कि दुनिया में एक समय में समुद्र में करीब डेढ़ लाख व्यापारिक जहाज और टैंकर समुद्र में होते हैं.

जहाज पर राष्ट्रीय ध्वज लगाने का नियम

अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत हर व्यापारिक जहाज का किसी न किसी देश में पंजीकरण होना अनिवार्य है. जिस देश में जहाज पंजीकृत होता है, वह देश उस जहाज का फ्लैग स्टेट कहलाता है. जहाज को अपने रजिस्ट्रेशन के प्रमाण के तौर पर उस देश का राष्ट्रीय ध्वज फहराने का अधिकार मिलता है.

ये उस फ्लैग कंट्री की जिम्मेदारी होती है कि वह अपने झंडे के नीचे चलने वाले जहाजों पर नियंत्रण रखे. संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के अनुच्छेद 94 के अनुसार, फ्लैग स्टेट ये सुनिश्चित करता है कि जहाज समुद्र में सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करे. हालांकि दुनियाभर के व्यापारिक जहाज खुद को तीन देशों में ही रजिस्टर्ड कराना पसंद करते हैं. इसे सुविधाजनक झंडा भी कहते हैं.

समुद्र में ऐसे बहुत सारे जहाज मिल जाएंगे जिनके नाम भारतीय होंगे जैसे विष्णु, गंगा स्टार, कृष्णा स्पिरिट, भारत ग्लोरी आदि लेकिन उनका फ्लैग स्टेट यानि रजिस्ट्रेशन देश विदेशी होता है जैसे पनामा, लाइबेरिया या मार्शल द्वीप. (AI News18 Image)

क्यों तीन देशों में ही ज्यादातर जहाजों का रजिस्ट्रेशन

दुनियाभर में ज्यादातर देशों के व्यापारिक जहाज पनामा, लाइबेरिया और मार्शल द्वीप में जाकर रजिस्टर्ड होते हैं
– क्योंकि पनामा, लाइबेरिया, मार्शल द्वीप बहुत कम पंजीकरण शुल्क और वार्षिक कर लेते हैं, जिससे जहाज मालिकों का खर्च कम हो जाता है.
– ये देश पर्यावरण, सुरक्षा और श्रम से जुड़े सख्त नियम लागू नहीं करते, जो उनके अपने देशों में होते हैं.
– सुविधाजनक झंडा देने वाले देश किसी भी देश के नाविकों को जहाज पर रखने की अनुमति देते हैं, जिससे जहाज मालिक विकासशील देशों के सस्ते श्रमिकों को काम पर रख सकते हैं.
– ये तीनों देश जहाज से होने वाली आय पर कोई कर नहीं लेते या बहुत कम लेते हैं.
– पंजीकरण की प्रक्रिया बहुत सरल और तेज होती है, जिसे अक्सर उस देश के दूतावास में भी पूरा किया जा सकता है.

यदि किसी यूनानी कंपनी ने अपना जहाज पनामा में पंजीकृत कराया है तो वो जहाज पनामा का झंडा लगाएगा, भले ही उसका मालिक यूनानी हो.। ऐसा करने से उसे पनामा की उदार कर नीतियों और सस्ते श्रम का लाभ मिलता है. यह प्रथा दुनिया के लगभग 70% से अधिक व्यापारिक बेड़े में आम है.

वैसे पनामा का झंडा समुद्री जहाजों में सबसे पुराना और लोकप्रिय सुविधाजनक झंडा है. लाइबेरिया के झंडे की प्रतिष्ठा समुद्री दुनिया में ज्यादा है, हालांकि ये सख्त सुरक्षा मानक लागू करने की कोशिश करता है. वहीं मार्शल द्वीप अमेरिकी मानकों के करीब.

अगर जहाज भारत का तेल लेकर आ रहा हो तो किसका झंडा

भले ही वह जहाज भारत का तेल लेकर आ रहा हो लेकिन अगर उसका मालिक किसी और देश का हो और चालक दल किसी तीसरे देश का तो भी समुद्री कानून के अनुसार उसे रजिस्टर्ड देश का ही झंडा लगाना होगा. संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के अनुसार, किसी जहाज की पहचान उसके मालिक या माल से नहीं, बल्कि उसके पंजीकरण से होती है.

दुनिया के 70 फीसदी व्यापारिक जहाज आमतौर पर पनामा, लाइबेरिया और मार्शल द्वीप में ही रजिस्टर्ड होता है. (AI News18 Image)

जहाज पर अगर अपराध हुआ तो जांच कौन करेगा

अगर पनामा का झंडा लगे जहाज पर कोई अपराध हुआ तो जहाज का ज्यूरिस्डिक्शन पनामा का होगा. जांच और कानूनी कार्रवाई का अधिकार मुख्य रूप से पनामा को ही होगा.

क्या कोई देश समुद्र में अपना फ्लैग बदल सकता है

नहीं, समुद्र के बीचोंबीच एक रजिस्टर्ड जहाज अपना आधिकारिक राष्ट्रीय झंडा यानि फ्लैग स्टेट तुरंत नहीं बदल सकता. यह प्रक्रिया कानूनी और प्रशासनिक होती है, जिसमें फ्लैग स्टेट से डी-रजिस्ट्रेशन, नए रजिस्ट्रेशन और दस्तावेजीकरण शामिल होता है. झंडा बदलने के लिए जहाज को नए देश के रजिस्ट्री ऑफिस या अधिकृत एजेंट से संपर्क करना पड़ता है, जो बंदरगाह पर ही संभव है. इंटरनेशनल मैरीन आर्गनाइजेशन और संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुसार हर जहाज के लिए झंडा फहराना जरूरी है, इसे छिपाना या बदलना अवैध माना जाता है.

जहाज के नाम भारतीय लेकिन झंडा कहीं और का

हां, समुद्र में ऐसे बहुत सारे जहाज मिल जाएंगे जिनके नाम भारतीय होंगे. मसलन विष्णु, गंगा स्टार, कृष्णा स्पिरिट, भारत ग्लोरी आदि, लेकिन उनका फ्लैग स्टेट विदेशी होता है – आमतौर पर पनामा, लाइबेरिया या मार्शल द्वीप. भारत में रजिस्ट्रेशन जटिल और महंगा है, इसलिए भारतीय नाम वाले जहाज भी विदेशी झंडे फहराते हैं और उनका रजिस्ट्रेशन पनामा, लाइबेरिया और मार्शल द्वीप से होता है.

इससे देश का नुकसान क्यों होता है

भारतीय जहाजों की विदेशी रजिस्ट्री के कई नुकसान हैं. ये मुख्य तौर पर कानूनी, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी होते हैं. विदेशी फ्लैग पर रजिस्ट्रेशन से भारत टैक्स, रजिस्ट्रेशन फीस और अन्य शुल्क गंवा देता है. भारतीय फ्लैग पर 7.5% तक अतिरिक्त टैक्स लग सकता है, इसलिए भारतीय कंपनियां बचने के लिए लाइबेरिया, पनामा या मार्शल द्वीप को चुनती हैं.

युद्ध या संकट में विदेशी फ्लैग जहाजों पर भारत का कानूनी नियंत्रण नहीं होता. ईरान ने भारतीय नाम वाले जहाज रोके, लेकिन असल में फ्लैग स्टेट ही उसके लिए जिम्मेदार था. भारतीय क्रू वाले विदेशी जहाजों पर मजदूरी विवाद, परित्याग या दुर्घटना में भारत सीधे हस्तक्षेप नहीं कर पाता. भारत का फ्लीट साइज नहीं बढ़ता, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यापार संतुलन के लिए जरूरी है. होर्मुज संकट में ऐसे ही जहाज फंसे, जो भारतीय लगते थे लेकिन ईरान ने उनके विदेशी फ्लैग के आधार पर रोके.

क्या बिना स्टेट फ्लैग के भी होते हैं जहाज

क्या हो अगर कोई जहाज कहीं भी पंजीकृत ही न हो. ऐसे जहाज को अंतरराष्ट्रीय कानून में स्टेटलेस वेसल कहा जाता है. उसकी कोई राष्ट्रीयता नहीं होती. यह स्थिति बहुत खतरनाक होती है, क्योंकि ऐसे जहाज पर किसी देश का कानून लागू नहीं होता. वो कानून से बाहर हो जाता है. समुद्री डकैती, अवैध शिकार या मादक पदार्थों की तस्करी जैसे अपराधों में अक्सर ऐसे जहाजों का इस्तेमाल किया जाता है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी देश की नौसेना ऐसे जहाज को ऊंचे समुद्रों पर रोक सकती है, उसकी तलाशी ले सकती है और उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है.

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