ईरान और अमेरिका-इज़रायल के बीच चल रही लड़ाई अब काफी आगे बढ़ चुकी है. सिक्योरिटी चीफ अली लारिजानी के मारे जाने के बाद ईरान ने हमले और तेज कर दिए हैं. ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने कहा है कि इसका हिसाब किया जाएगा. फिलहाल ईरान ने इज़रायल और कुछ पड़ोसी मुल्कों को अपना निशाना बनाया है. लेकिन सवाल ये है कि क्या ईरान सीधा अमेरिका पर मिसाइल नहीं डाल सकता क्या? क्या ईरान के पास इतनी शक्ति है कि वह सीधे अमेरिका पर मिसाइल से हमला कर सके? इस बात को गहराई से समझने के लिए हमें किताबी दावों से हटकर ज़मीनी हकीकत को देखना होगा.
ईरान ने पिछले कुछ सालों में अपनी मिसाइल तकनीक में काफी सुधार किया है, फिर भी उसकी मिसाइलों की मार फिलहाल सिर्फ अपने आसपास के इलाकों तक ही सीमित है. ईरान के पास ‘शाहाब’ और ‘ग़द्र’ जैसी मिसाइलें हैं, जो लगभग 2,000 से 2,500 किलोमीटर दूर तक जा सकती हैं. इसका मतलब यह है कि ईरान अपने घर में बैठे-बैठे पूरे मिडिल ईस्ट (मध्य-पूर्व), इज़रायल और वहां मौजूद अमेरिकी सेना के अड्डों को निशाना बना सकता है. कतर, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों में जो अमेरिकी सैनिक हैं, उनके लिए ये मिसाइलें बड़ा खतरा हैं. लेकिन अमेरिकी ज़मीन वहां से करीब 10,000 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर है, इसलिए ईरान की मौजूदा मिसाइलें वहां तक नहीं पहुंच सकतीं.
इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल कर सकती है ये काम
ईरान को अमेरिका जैसे दूर देश पर हमला करने के लिए एक खास तरह की मिसाइल चाहिए होगी, जिसेइंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल, (ICBM) कहते हैं. यह कोई आम रॉकेट नहीं होता, बल्कि इसे अंतरिक्ष तक जाना पड़ता है. इसे चलाने के लिए तीन बड़े चरणों से गुजरना होता क्या अमेरिका तक पहुंच सकती है ईरान की मिसाइल है. पहले एक भारी-भरकम रॉकेट इसे आसमान में काफी ऊंचाई तक ले जाता है, फिर यह अंतरिक्ष में एक तय रास्ते पर तैरती है, और आखिर में यह दोबारा पृथ्वी के वायुमंडल में घुसकर अपने लक्ष्य पर गिरती है.
इस दौरान इसकी रफ्तार 20,000 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्यादा होती है और रगड़ के कारण तापमान 7,000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. इतनी गर्मी में मिसाइल को जलने से बचाना और उसे सही निशाने पर टिकाए रखना दुनिया की सबसे कठिन तकनीकों में से एक है, जिसे ईरान ने अभी तक हासिल नहीं किया है.
किन देशों के पास है इतनी दूर जाने वाली मिसाइलें
अगर हम दुनिया के बाकी देशों से तुलना करें, तो केवल कुछ ही देशों के पास इतनी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें हैं. रूस की ‘सरमत’ मिसाइल 18,000 किलोमीटर तक जा सकती है, जबकि खुद अमेरिका और चीन के पास भी 13,000 से 15,000 किलोमीटर तक मार करने वाली मिसाइलें मौजूद हैं. उत्तर कोरिया भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ा है, लेकिन उसकी मिसाइलें कितनी सटीक हैं, इस पर अब भी विशेषज्ञों को शक है. ईरान अभी इस दौड़ में काफी पीछे है. उसे अमेरिका तक पहुंचने के लिए अपनी मिसाइल की रेंज को कम से कम चार गुना बढ़ाना होगा और अंतरिक्ष से वापस ज़मीन पर आने वाली तकनीक हासिल करनी होगी.
2035 तक अमेरिका को कोई डर नहीं!
ईरान की भविष्य की योजनाओं पर नज़र डालें तो कुछ खबरें अमेरिका के लिए डराने वाली हैं. नवंबर 2025 में ईरान की सरकारी मीडिया ने यह दावा किया था कि वे एक ऐसी मिसाइल बना रहे हैं जो 10,000 किलोमीटर तक जा सके. अगर यह सच होता है, तो हालात बदल सकते हैं.
जानकारों और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का कहना कुछ और है. डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) के मुताबिक, “ईरान को इस तरह की खतरनाक मिसाइल तैयार करने में कम से कम साल 2035 तक का समय लग सकता है.” यानी आने वाले कई सालों तक ईरान के पास ऐसी कोई मिसाइल होने की संभावना बहुत कम है, जो सीधे अमेरिका पर गिर सके.
अमेरिका के मित्र देशों पर है खतरा
तो क्या इसका मतलब यह है कि अमेरिका को ईरान से कोई डर नहीं है? ऐसा बिल्कुल नहीं है. भले ही ईरान सीधे मिसाइल न भेज सके, लेकिन वह अप्रत्यक्ष तरीके से अमेरिका को नुकसान पहुंचा सकता है. ईरान की सेना और उसके मददगार संगठन (जैसे हिज़्बुल्लाह) दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अमेरिकी हितों पर हमला कर सकते हैं. जैसा कि रक्षा विशेषज्ञों का कहना है, “असली खतरा लंबी दूरी की मिसाइलों से नहीं, बल्कि प्रॉक्सी वॉर और छोटे लेकिन घातक हमलों से है.” कुल मिलाकर बात यह है कि अमेरिका की ज़मीन आज भी सुरक्षित है, लेकिन मिडिल ईस्ट में उसकी सेना और उसके मित्र देश हमेशा ईरान की मिसाइलों की ज़द में हैं.
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