ब्रुसेल्स: दुनियाभर में जंग के हालातों के बीच पूरे यूरोप में ‘रहस्यमयी ड्रोन्स’ की दहशत फैली हुई है. बड़े-बड़े शहरों के आसमान में ये उड़ती-फिरती तबाही अचानक से प्रकट हो रही है. ये ड्रोन कहां से आ रहे हैं, इन्हें किस मकसद से भेजा जा रहा है और अचानक कहां गायब हो जा रहे हैं. ये सवाल खुफिया एंजेंसियों का सिरदर्द बना हुआ है. हैरानी की बात ये भी है कि EU अपने कॉमन दुश्मन यानी रूस पर इल्जाम भी नहीं डाल रही है. आगे जानें आखिर ऐसी क्या वजह है कि जो सामने से हमला करने के बजाए यूरोप के देश सिर्फ खुसुर-फुसुर कर रहे हैं और अपने नागरिकों को खतरे में डालने पर मजबूर हैं.
Drones की वजह से पूरा यूरोप अस्त-व्यस्त
ये रहस्यमयी ड्रोन्स यूरोपीय देशों के सेंसेटिव इलाकों के चक्कर काट रहे हैं. 5 नवंबर को बेल्जियम के कई हवाई अड्डे अचानक बंद कर दिए गए, कई उड़ाने रोक दी गईं. देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे ब्रुसेल्स में भी कुछ ऐसा ही भयानक नजारा देखने को मिला. ऐसी ही ड्रोन साइटिंग लूथियाना और डेनमार्क जैसी जगहों पर भी हुई और इन इलाकों में भी हवाई सेवाएं कई घंटों के लिए बंद कर दी गईं. 10 सितंबर को, ड्रोन का एक झुंड पोलैंड के एयर स्पेस में घुस आया था.
Nuclear Facility तक पहुंचा
ये ड्रोन्स बेल्जियम के एक महत्वपूर्ण बेस पर भी देखने को मिले थे. दावा किया जाता है कि इस बेस पर अमेरिका की न्यूक्लियर फैसिलिटी मौजूद है. यहां पर ड्रोन के टक्कर लगाने का सिर्फ यही मतलब है कि कोई है जो यूरोप की ताकत मापना चाहता है.
अब हैरानी की बात ये है कि इतने सारी ड्रोन साइटिंग के बावजूद यूरोप के किसी देश ने भी सीधे तौर पर एक्शन नहीं लिया है. आसमान में उड़ते इस खतरे को ना तो मारकर गिराया गया और ना ही खुलेआम रूस पर इल्जाम लगाया जा रहा है.
Russia पर सीधा अटैक क्यों नहीं?
बेल्जियम की सरकार ने इस मुद्दे पर एक बैठक की थी और इस दौरान रक्षा मंत्री थियो फ्रैंकेन ने इन ड्रोन्स साइटिंग को सोची समझी साजिश बताया था लेकिन उन्होंने भी दुश्मन यानी रूस का नाम नहीं लिया. इसके अलावा फर्स्टपोस्ट ने इन ड्रोन्स के बारे में फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब से भी सवाल किया तो उन्होंने इन ड्रोन्स को खतरा तो माना लेकिन साफ कह दिया इन्हें मार गिराने को लेकर यूरोपीय देशों के बीच कोई बात नहीं हुई है. उन्होंने रूस पर पूरी तरह इल्जाम लगाने से भी इनकार कर दिया.
2 वजहों से खुसुर-फुसुर कर रहे नेता
इसके पीछे दो वजहें हो सकती हैं, पहली तो ये कि यूरोप से पास वाकई रूस के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं और दूसरी 2022 में हुई एक घटना भी हो सकती है, जिसमें यूरोप की नॉर्ड स्ट्रीम में पाइपलाइन पर अटैक हुआ था और सभी मे एक सुर में रूस पर उंगली कर दी थी. हालांकि, बाद में सामने आया कि असल में ये काम यूक्रेन की हिट टीम का था.
द गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस पाइपलाइन पर अटैक की मंजूरी यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने ही दी थी और बाद में पीछे हट गए थे लेकिन तब तक अटैक हो चुका था. इसके पीछे यूक्रेन का मकसद रूस को विलेन बनाना था, ताकि यूरोपीय देशों को ऐसा लगे कि रूस उन पर भी अटैक कर रहा है. क्या इन ड्रोन्स के साथ भी कुछ ऐसी ही कहानी है? अभी इस सवाल का जवाब मिलना बाकी है.
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