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साउथ कोरिया के सोंग्जू गांव में साल 2017 की एक सुबह अचानक हलचल बढ़ गई थी. अमेरिकी सेना के बड़े-बड़े ट्रक वहां ‘थाड’ (THAAD) मिसाइल डिफेंस सिस्टम लेकर पहुंचे थे. उस वक्त साउथ कोरिया की सरकार ने अपने ही लोगों के विरोध को दरकिनार कर दिया था. सरकार का तर्क था कि नॉर्थ कोरिया के मिसाइल हमलों से बचने के लिए यह सिस्टम बेहद जरूरी है. लेकिन आज नौ साल बाद हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. अमेरिका अब इस सिस्टम को वहां से उखाड़कर मिडिल ईस्ट भेज रहा है. इस फैसले ने न केवल साउथ कोरिया की सुरक्षा को खतरे में डाला है, बल्कि अमेरिका की दोस्ती पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
साउथ कोरिया में तैनात अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम ‘थाड’ (THAAD) को हटाकर मिडिल ईस्ट भेजने के फैसले ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. 2017 में इस सिस्टम की तैनाती के कारण साउथ कोरिया ने चीन के साथ अपने रिश्तों की भारी कीमत चुकाई थी. अरबों डॉलर का नुकसान झेलने के बाद अब अमेरिका अपनी मर्जी से इसे वापस ले जा रहा है. (Photo : Reuters)
जब 2017 में थाड की तैनाती हुई थी, तब चीन बुरी तरह भड़क गया था. चीन को डर था कि इस सिस्टम का पावरफुल रडार उसकी जासूसी कर सकता है. इसके जवाब में चीन ने साउथ कोरिया पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे. साउथ कोरिया के बड़े बिजनेस ग्रुप ‘लोटे’ (Lotte) को चीन से अपना बोरिया-बिस्तर समेटना पड़ा था. (Photo : Reuters)
हुंडई और किया जैसी कंपनियों के प्लांट बंद हो गए और के-पॉप (K-pop) पर भी चीन में बैन लग गया. साउथ कोरिया ने अपनी इकोनॉमी को अरबों डॉलर का चपत सिर्फ इसलिए लगवाया ताकि अमेरिका का साथ बना रहे. अब जब अमेरिका इसे अपनी जरूरत के हिसाब से वापस ले जा रहा है, तो सियोल में इसे धोखे की तरह देखा जा रहा है. (Photo : Reuters)
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पेंटागन की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के साथ बढ़ते तनाव को देखते हुए अमेरिका को वहां तुरंत मिसाइल डिफेंस की जरूरत है. इसके लिए उसने साउथ कोरिया और जापान जैसे सहयोगियों के पास मौजूद हथियारों को निकालना शुरू कर दिया है. खबर यह भी है कि सिर्फ थाड ही नहीं, बल्कि ‘पैट्रियट’ मिसाइल सिस्टम भी सऊदी अरब और यूएई भेजे जा रहे हैं. (Photo : Reuters)
सवाल यह उठता है कि क्या अमेरिका अब ईस्ट एशिया की सुरक्षा को हल्के में ले रहा है? नॉर्थ कोरिया के पास परमाणु हथियार हैं और वह लगातार मिसाइल टेस्टिंग कर रहा है. ऐसे में सुरक्षा कवच को हटाना किसी बड़े खतरे को दावत देने जैसा है. (Photo : Reuters)
डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद से ही अमेरिकी सुरक्षा गारंटियों पर संशय बना हुआ है. साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्यूंग हालांकि जनता को भरोसा दिला रहे हैं कि उनके पास अपनी सुरक्षा के लिए पर्याप्त बजट है. लेकिन हकीकत यह है कि अमेरिका का इस तरह जल्दबाजी में पीछे हटना नॉर्थ कोरिया को उकसा सकता है. (Photo : Reuters)
मिलिट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि किम जोंग उन इस कमजोरी का फायदा उठाकर कोई बड़ी हिमाकत कर सकते हैं. जापान भी इस बात से परेशान है कि अमेरिका ने बिना किसी ठोस प्लान के मिडिल ईस्ट में अपनी ताकत झोंक दी है, जिससे प्रशांत क्षेत्र खाली पड़ गया है. (Photo : Reuters/KCNA)
सियोल के कई अखबारों ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है. उनका कहना है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ये हथियार जल्द वापस आएं. लेकिन जिस तरह अमेरिका ने ‘जब जरूरत पड़ी तो लगाया और जब जरूरत पड़ी तो हटा लिया’ वाला रवैया अपनाया है, उससे एक बड़ा सबक मिलता है. अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कोई भी दोस्त परमानेंट नहीं होता. साउथ कोरिया ने जिस सिस्टम के लिए अपने सबसे बड़े ट्रेडिंग पार्टनर चीन से रिश्ते बिगाड़े, आज वही सिस्टम उसके पास नहीं है. यह घटनाक्रम भविष्य में अमेरिका और उसके एशियाई सहयोगियों के बीच भरोसे की खाई को और चौड़ा कर सकता है. (Photo : Reuters)
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