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- Papmochani Ekadashi Significance In Hindi, Chaitra Krishna Paksha Ekadashi Fasting, Meen Sankranti On 15th March
5 घंटे पहले
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15 मार्च को चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी है, इसे पापमोचनी एकादशी है। ये व्रत जाने-अनजाने में किए गए पापों के फल को खत्म करता है, ऐसी मान्यता है। भक्त घर-परिवार में सुख-शांति, प्रेम और सफलता बनाए रखने की कामना से ये व्रत करते हैं। इसी दिन मीन संक्रांति भी है। हालांकि पंचांग भेद की वजह से मीन संक्रांति 14 तारीख को भी बताई गई है। सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं, इस दिन सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेगा।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, एकादशी और संक्रांति के योग में भगवान विष्णु के साथ ही सूर्य देव की पूजा करने का शुभ योग बना है। इस दिनों में पूजा-पाठ के साथ ही दान-पुण्य और मंत्र जप जल्दी सफल हो सकते हैं।
पापमोचनी एकादशी का अर्थ है पाप का मोचन यानी नष्ट करने वाली एकादशी। इस एकादशी पर किए गए व्रत से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है और भक्त की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी दिन सूर्य के मीन राशि में आने से खरमास भी शुरू होगा। खरमास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार जैसे शुभ कामों के लिए मुहूर्त नहीं रहते हैं। इस महीने में सूर्य पूजा, विष्णु पूजा, मंत्र जप, नदी स्नान और दान-पुण्य करने की परंपरा है। जानिए इस दिन कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं…
- तीर्थ स्नान: इस दिन गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा जैसी किसी भी पवित्र नदी में स्नान कर सकते हैं। माना जाता है कि सूर्य के राशि परिवर्तन के समय किया गया स्नान कुंडली के दोषों को भी दूर करता है। अगर नदी स्नान करना संभव न हो तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। स्नान करते समय पवित्र नदियों और तीर्थों का ध्यान करना चाहिए, ऐसा स्नान करने से भी तीर्थ स्नान के समान पुण्य मिल सकता है।
- भगवान विष्णु और सूर्य की पूजा: इस दिन भगवान नारायण और नारायण के स्वरूप सूर्यदेव की पूजा करनी चाहिए। सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद उगते सूर्य को जल चढ़ाएं। जल चढ़ाते समय ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करना चाहिए। सूर्य पूजा के बाद घर के मंदिर में गणेश पूजन करें, इसके बाद भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का अभिषेक करें। अभिषेक के लिए दक्षिणावर्ती शंख का इस्तेमाल करना चाहिए। शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और फिर भगवान को अर्पित करें। इसके बाद विष्णु-लक्ष्मी को नए वस्त्र अर्पित करें। हार-फूल से श्रृंगार करें। चंदन लगाएं। पूजन सामर्गी चढ़ाएं। तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। पूजा में ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें।
- दीप दान करें: संध्याकाल में घर के मंदिर में दीपक जलाएं। घर के आंगन में तुलसी के पास दीपक जलाएं।
- दान-पुण्य करें: संक्रांति और एकादशी के योग में भोजन, वस्त्र, अनाज, जूते-चप्पल, धन का दान करना चाहिए।
- व्रत-उपवास करें: यदि संभव हो, तो इस दिन व्रत कर सकते हैं। व्रत करने वाले भक्त को दिनभर निराहार रहना चाहिए। अगर भूखे रहना संभव न हो, तो एक समय फलाहार कर सकते हैं, दूध और फलों के रस का सेवन भी कर सकते हैं।
- श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करें: इस दिन गीता के 11वें अध्याय का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है। पूरे अध्याय का पाठ नहीं कर पा रहे हैं, तो अपने समय के अनुसार गीता के कुछ पेजों का पाठ कर सकते हैं।
- तामसिक भोजन का त्याग करें: इस दिन लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और नशीले पदार्थों का पूरी तरह त्याग करना चाहिए। एकादशी पर चावल भी नहीं खाना चाहिए। किसी की निंदा न करें। एकादशी पर तुलसी के पत्ते तोड़ने से बचना चाहिए। इस दिन पूजा में एक दिन पहले तोड़े हुए तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल करना चाहिए।
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