जरूरत की खबर- व्रत में खाएं ग्लूटेन फ्री आटा: 11 हेल्थ बेनिफिट्स, पाचन दुरुस्त, इम्यूनिटी मजबूत, जानें किन्हें नहीं खाना चाहिए

21 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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नवरात्रि के दिनों में माता रानी के बहुत से भक्त नौ दिनों का व्रत रखते हैं। इस दौरान खाने-पीने के विकल्प सीमित होते हैं, जिसकी वजह से कई बार उन्हें कमजोरी, लो एनर्जी और थकान महसूस होती है। हालांकि प्रकृति ने हमें ऐसे कई फूड्स दिए हैं, जो शरीर को दिनभर एनर्जेटिक और एक्टिव बनाए रखते हैं।

व्रत में कुट्टू, सिंघाड़ा, राजगिरा और समा जैसे ग्लूटेन फ्री आटे खाए जाते हैं, जोकि सुपर हेल्दी होते हैं। ये प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कैल्शियम और कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। ये आटे पाचन तंत्र व इम्यूनिटी को मजबूत बनाने और एनर्जी लेवल बनाए रखने में मदद करते हैं। इससे उपवास के दिनों में भी शरीर एक्टिव और हेल्दी बना रहता है। नेचुरली ग्लूटेन फ्री होने से सीलिएक डिजीज या ग्लूटेन इंटॉलरेंस वाले लोग भी इन्हें आसानी से खा सकते हैं।

रिसर्च गेट में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, दुनिया में लगभग 8.4% लोग ग्लूटेन इंटॉलरेंस का सामना कर रहे हैं। यानी इन्हें गेहूं या ऐसी सभी चीजें, जिनमें ग्लूटेन होता है, उनसे एलर्जी है। वहीं भारत में 5-6% लोगों को गेहूं या ग्लूटेन से समस्या होती है, जिसमें 90% लोगों को यह पता ही नहीं है।

तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम व्रत में खाए जाने वाले 4 ग्लूटेन फ्री आटों के हेल्थ बेनिफिट्स के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • व्रत में खाए जाने वाले सारे आटे ग्लूटेन फ्री ही क्यों होते हैं?
  • ग्लूटेन फ्री आटों की न्यूट्रिशनल वैल्यू और हेल्थ बेनिफिट्स क्या हैं?
  • किन लोगों को इन्हें नहीं खाना चाहिए?

एक्सपर्ट: डॉ. पूनम तिवारी, सीनियर डाइटीशियन, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ

सवाल- ग्लूटेन क्या है?

जवाब- ग्लूटेन एक प्रकार का प्रोटीन है, जो गेहूं, जौ और राई जैसे अनाजों में पाया जाता है। इसकी खासियत है कि यह आटे को लचीलापन और चिपचिपाहट देता है, जिससे रोटी, ब्रेड या पिज्जा बेस नरम और फूले हुए बनते हैं। आमतौर पर ग्लूटेन लोगों के लिए सुरक्षित होता है। लेकिन कुछ लोगों में यह पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है।

सवाल- व्रत में खाए जाने वाले सारे आटे ग्लूटेन फ्री ही क्यों होते हैं?

जवाब- नवरात्रि या अन्य व्रतों में गेहूं, चावल, चना, मूंग और जौ जैसे आम अनाज नहीं खाए जाते हैं। इनकी जगह लोग कुट्टू, राजगिरा, सिंघाड़ा और समा जैसे विकल्पों का सेवन करते हैं। ये वास्तव में पारंपरिक अनाज नहीं, बल्कि बीज, कंद या फल की श्रेणी में आते हैं। धार्मिक परंपरा में इन्हें फलाहार माना गया है, इसलिए ये व्रत में खाने योग्य होते हैं।

कुट्टू, राजगिरा, सिंघाड़ा और समा के आटों की खासियत यह है कि इनमें ग्लूटेन प्रोटीन नहीं पाया जाता है, जिससे ये हल्के, जल्दी पचने वाले और शरीर को एनर्जी देने वाले होते हैं। इसीलिए व्रत के दिनों में ये आटे स्वास्थ्य के लिहाज से भी सुरक्षित विकल्प होते हैं।

सवाल- व्रत में खाए जाने वाले आटों की न्यूट्रिशनल वैल्यू और हेल्थ बेनिफिट्स क्या हैं?

जवाब- व्रत में आमतौर पर कुट्टू, सिंघाड़ा, राजगिरा और समा के आटे खाए जाते हैं। इन आटों की न्यूट्रिशनल वैल्यू अलग-अलग होती है। लेकिन सभी ग्लूटेन फ्री और कई जरूरी पौष्टिक तत्वों से भरपूर होते हैं। आइए एक-एक करके इनके बारे में जानते हैं।

कुट्टू का आटा

कुट्टू का आटा प्रोटीन और फाइबर का रिच सोर्स है। ये आयरन, मैग्नीशियम और पोटेशियम से भरपूर होता है, जो व्रत के दौरान एनर्जी और इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग बनाए रखने में मददगार है। नीचे दिए ग्राफिक से 100 ग्राम कुट्टू के आटे की न्यूट्रिशनल वैल्यू समझिए-

कुट्टू के आटे के हेल्थ बेनिफिट्स

  • यह फाइबर से भरपूर होता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और कब्ज से राहत देता है।
  • इसमें रूटिन नामक एंटीऑक्सिडेंट होता है, जो इम्यून सिस्टम को बूस्ट करता है और इंफ्लेमेशन कम करता है।
  • लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) होने से ब्लड शुगर कंट्रोल रहता है, जो व्रत में भूख और थकान को कम करता है।
  • यह हार्ट हेल्थ के लिए अच्छा है क्योंकि यह कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर लेवल को कंट्रोल रखता है।
  • शाकाहारियों के लिए प्रोटीन का अच्छा सोर्स है, जो मसल्स रिपेयर में मदद करता है।

सिंघाड़े का आटा

सिंघाड़े का आटा कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और मिनरल्स से भरपूर होता है। इसमें आयरन, कैल्शियम और जिंक होते हैं, जो व्रत के दौरान बॉडी को हाइड्रेटेड और एनर्जेटिक रखते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से 100 ग्राम सिंघाड़े के आटे की न्यूट्रिशनल वैल्यू समझिए-

सिंघाड़े के आटे के हेल्थ बेनिफिट्स

  • यह पचने में बहुत आसान हाेता है और डाइजेस्टिव सिस्टम को सपोर्ट करता है।
  • यह शरीर को इंस्टेंट एनर्जी देता है, जो इसे व्रत के लिए एक अच्छा विकल्प बनाता है।
  • एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होने के कारण ये इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है और इन्फेक्शन से लड़ने में मदद करता है।
  • कम कैलोरी और हाई फाइबर होने से वेट लॉस में मदद करता है।
  • यह आयोडीन का सोर्स है, जो थायरॉइड फंक्शन को सपोर्ट करता है।

राजगिरा का आटा

राजगिरा का आटा प्रोटीन और कैल्शियम का पावरहाउस है। इसमें आयरन और मैग्नीशियम भी अच्छी मात्रा में होते हैं, जो व्रत में हड्डियों और मसल्स को मजबूत रखते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से 100 ग्राम राजगिरा के आटे की न्यूट्रिशनल वैल्यू समझिए-

राजगिरा के आटे के हेल्थ बेनिफिट्स

  • यह एनर्जी का अच्छा सोर्स है, जो व्रत में थकान दूर करता है।
  • यह हाई प्रोटीन कंटेंट से इम्यूनिटी बूस्ट करता है और मसल्स रिपेयर में मदद करता है।
  • इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को हेल्दी रखता है और कोलेस्ट्रॉल कम करता है।
  • कैल्शियम और मैग्नीशियम से हड्डियां मजबूत होती हैं।
  • एंटीऑक्सिडेंट्स से एजिंग स्लो होती है और स्किन हेल्थ बेहतर रहती है।

समा का आटा

समा का आटा फाइबर और आयरन से भरपूर होता है। इसे बार्नयार्ड मिलेट भी कहते हैं। इसमें प्रोटीन और मिनरल्स अच्छे होते हैं, जो व्रत में डिटॉक्स और इम्यूनिटी बूस्ट के लिए फायदेमंद हैं। नीचे दिए ग्राफिक से 100 ग्राम समा के आटे की न्यूट्रिशनल वैल्यू समझिए-

समा के आटे के हेल्थ बेनिफिट्स

  • यह हाई फाइबर से पाचन तंत्र ठीक रखता है और गट हेल्थ को बूस्ट करता है।
  • लो GI से ब्लड शुगर स्थिर रहता है, जो डायबिटीज मैनेजमेंट में मदद करता है।
  • एंटीऑक्सिडेंट्स इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं।
  • यह वेट लॉस में मददगार है क्योंकि इसे खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है।

सवाल- व्रत के समय इन ग्लूटेन फ्री आटों को डाइट में कैसे शामिल कर सकते हैं?

जवाब- व्रत में कुट्टू, सिंघाड़ा, राजगिरा और समा के आटे को कई तरह से डाइट में शामिल किया जा सकता है। आप इससे पूरी, पराठा, इडली, डोसा या चिला बना सकते हैं। समा से खिचड़ी, खीर, इडली या ढोकला बना सकते हैं। राजगिरा का आटा हलवा, पराठा या पैनकेक के लिए अच्छा है। वहीं सिंघाड़ा आटा पकोड़े, पूड़ी या पैनकेक के रूप में लिया जा सकता है। इन आटों को दही, दूध या हरी सब्जियों के साथ मिलाकर खाने से स्वाद भी बढ़ता है और शरीर को पर्याप्त पोषण भी मिलता है।

सवाल- ग्लूटेन फ्री अनाज खाने के क्या फायदे हैं?

जवाब- ग्लूटेन-फ्री अनाज न केवल व्रत के दौरान बल्कि रोजमर्रा की डाइट में भी सेहत के लिए फायदेमंद हैं। इनमें फाइबर की मात्रा अच्छी होती है, जो कब्ज से बचाती है और इंटेस्टाइन को क्लीन रखती है। साथ ही ये प्रोटीन, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होते हैं, जो इम्यून सिस्टम को बूस्ट करते हैं।

व्रत में अक्सर लोग कमजोरी महसूस करते हैं। लेकिन ये आटे आयरन और मैग्नीशियम से भरपूर होते हैं, जो एनर्जी लेवल बनाए रखते हैं। इनका लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) ब्लड शुगर को स्थिर रखता है, इसलिए ये डायबिटिक लोगों के लिए भी सुरक्षित है। नीचे दिए ग्राफिक से इसके फायदे समझिए-

सवाल- व्रत में इन आटों को शामिल करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

जवाब- ये आटे पौष्टिक होते हैं, लेकिन इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है। जैसेकि-

आटे को बनाने से पहले अच्छी तरह जांच लें कि इसमें कोई मिलावट न हो। इन्हें पानी में भिगोकर या अच्छी तरह पकाकर खाएं, ताकि एंटी-न्यूट्रिएंट्स कम हों और पाचन आसान हो। व्रत में ज्यादा तला-भुना न बनाएं। स्टीम्ड या ग्रिल्ड रेसिपी चुनें। पर्याप्त पानी पिएं क्योंकि फाइबर ज्यादा होने से डिहाइड्रेशन हो सकता है। शुरुआत में थोड़ी मात्रा से शुरू करें ताकि बॉडी एडजस्ट हो सके।

सवाल- किन लोगों को ग्लूटेन फ्री आटों को अवॉइड करना चाहिए?

जवाब- आमतौर पर ये आटे सुरक्षित हैं। लेकिन कुछ लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। जैसेकि-

  • एलर्जी वाले लोग: अगर किसी को कुट्टू, राजगिरा, सिंघाड़ा या समा से एलर्जी है तो अवॉइड करें।
  • किडनी डिजीज से पीड़ित लोग: हाई ऑक्सलेट कंटेंट (जैसे सिंघाड़ा में) से किडनी स्टोन का रिस्क बढ़ सकता है।
  • डाइजेस्टिव इश्यू वाले लोग: अगर IBS (इरिटेबल बाउल सिंड्रोम) या गैस की समस्या है तो ज्यादा फाइबर से दिक्कत हो सकती है।
  • डायबिटिक लोग: लो GI होने के बावजूद इसे सीमित और संतुलित मात्रा में ही खाएं।
  • प्रेग्नेंट महिलाएं या बच्चे: डॉक्टर की सलाह से ही शामिल करें क्योंकि कुछ में हाई मिनरल्स बैलेंस बिगाड़ सकते हैं।

अगर कोई मेडिकेशन ले रहे हैं तो इंटरैक्शन चेक करें। कुल मिलाकर बैलेंस्ड डाइट में इन्हें शामिल करें, लेकिन एक्सेस से बचें।

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