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अरबी की खेती अब किसानों के लिए आमदनी का आसान और फायदेमंद तरीका बन गई है. कम समय में तैयार होने वाली यह फसल कंद और पत्तों दोनों से मुनाफा देती है और सही देखभाल व सिंचाई से पैदावार और भी बढ़ाई जा सकती है. आइए जानते है पूरा तरीका…
अरबी की खेती इस समय किसानों के लिए कमाई का बढ़िया जरिया बन रही है. खास बात यह है कि इसमें सिर्फ कंद ही नहीं, बल्कि पत्तों से भी आमदनी होती है और बाजार में इसकी डिमांड हमेशा बनी रहती है, इसलिए बेचने में कोई दिक्कत नहीं होती. अगर किसान सही तरीके से खेती करें तो कम समय में अच्छा पैसा कमा सकते हैं, यही वजह है कि अब ज्यादा लोग इसकी खेती की ओर बढ़ रहे हैं.
अरबी की खेती अब किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है क्योंकि इसमें ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता. बुवाई के कुछ ही दिनों बाद पौधे तेजी से बढ़ते हैं और 5-6 महीने में फसल तैयार हो जाती है. रामपुर के किसान महेंद्र सिंह ने इस बार 3 बीघा में देसी अरबी की खेती की है. उनका कहना है कि उन्होंने कम लागत में यह फसल तैयार की है, जिससे उन्हें अच्छी कमाई होगी और खर्च भी आसानी से निकल जाएगा.
किसान महेंद्र सिंह के मुताबिक, अरबी की खेती में एक बीघा से करीब 6 क्विंटल तक उत्पादन मिल जाता है. अगर सही तरीके से देखभाल की जाए तो पैदावार और भी बढ़ सकती है. अरबी की खेती की खासियत इसकी कम लागत है. महेंद्र सिंह बताते हैं कि एक बीघा में करीब 2 हजार रुपये का खर्च आता है, जबकि फसल तैयार होने पर बाजार में इसका भाव 40 रुपये प्रति किलो तक मिलता है. ऐसे में लागत निकालने के बाद भी किसानों के पास अच्छा मुनाफा बच जाता है.
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अरबी की खेती से जल्दी आमदनी शुरू हो जाती है. बुवाई के करीब 20 दिन बाद पौधों में पत्ते निकलने लगते हैं और किसान इन पत्तों को भी बाजार में बेच देते हैं. एक पौधे से कई पत्ते निकलते हैं, जिनमें से कुछ बेचकर अच्छी आमदनी हो जाती है. इससे फसल आने से पहले ही खर्च निकलना शुरू हो जाता है.
किसान ने बताया कि अरबी की अच्छी पैदावार के लिए उपजाऊ बलुई दोमट मिट्टी सबसे सही मानी जाती है. इसके अलावा, खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए, वरना कंद खराब हो सकते हैं. मिट्टी का pH 5.5 से 7 के बीच होना बेहतर रहता है. इसलिए खेती शुरू करने से पहले खेत की गहरी जुताई कर उसे भुरभुरा बना लें और उसमें सड़ी हुई गोबर की खाद मिला दें, जिससे पौधों की ग्रोथ तेजी से होती है.
उत्तर भारत में अरबी की बुवाई फरवरी से मार्च के बीच करना सबसे अच्छा माना जाता है. महेंद्र ने अपने खेत में मार्च की शुरुआत में ही अरबी की बुवाई कर दी थी. पौधों की अच्छी बढ़वार के लिए इसे लाइन में लगाना चाहिए ताकि हर पौधे को बढ़ने की पर्याप्त जगह मिल सके. पंक्तियों के बीच 45 से 60 सेंटीमीटर और पौधों के बीच 15 से 20 सेंटीमीटर की दूरी रखें. सही दूरी रखने से फसल स्वस्थ रहती है और उत्पादन भी अच्छा मिलता है.
अरबी की खेती में समय-समय पर सिंचाई करना बहुत जरूरी है. गर्मियों में हर 3-4 दिन पर और सामान्य दिनों में 5-7 दिन के अंतराल पर पानी देना चाहिए. ध्यान रखें कि खेत में पानी जमा न हो. साथ ही, समय-समय पर खरपतवार निकालते रहें. सही देखभाल से पौधे स्वस्थ रहते हैं और कंद का विकास बेहतर होता है.
किसान के मुताबिक, अगर अरबी की खेती में सही तरीके से खेत की तैयारी, बुवाई और सिंचाई की जाए, तो पैदावार काफी अच्छी हो सकती है. छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर किसान अपनी फसल को बेहतर बना सकते हैं.
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