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बिहार के जहानाबाद की प्रियंका देवी की कहानी आत्मनिर्भरता और मेहनत की एक प्रेरक मिसाल है. कभी दूसरों के घरों में खाना बनाकर परिवार चलाने वाली प्रियंका की जिंदगी 2015 में जीविका से जुड़ने के बाद बदल गई. छोटे से लोन और प्रशिक्षण के सहारे उन्होंने मुर्गी पालन, मशरूम उत्पादन और खाद-बीज की दुकान जैसे कई काम शुरू किए. आज वे हर महीने करीब 40 हजार रुपये कमा रही हैं और न सिर्फ अपने परिवार का खर्च उठा रही हैं, बल्कि अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा भी दे पा रही हैं. रिपोर्ट- शशांक शेखर
बिहार में महिलाएं अब हर सेक्टर में आगे बढ़ रही है. पढ़ाई, व्यापार से लेकर सैन्य क्षेत्रों में अपनी पहचान गढ़ रही हैं. जीविका भी महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. इसके जरिए सफलता के दरवाजे खुल रहे हैं. बिहार के जहानाबाद की प्रियंका देवी का सफर भी कुछ आसान नहीं था. दूसरों के घरों में खाना पकाने का कार्य करती थी.
2015 में आई जीविका ने उनकी किस्मत का ताला खोल दिया. अब जीविका से जुड़कर महीने की करीब 40 हजार रुपए तक कमा रही हैं. दरअसल, प्रियंका देवी जहानाबाद के रतनी ब्लॉक स्थित उचिता की रहने वाली है. वो 2015 में जीविका समूह से जुड़ने से पहले दूसरों के घरों में खाना पकाने का काम करती थी. उसी से उनका परिवार चलता था. कमाई बमुश्किल ही हो पाती थी.
हालांकि, जीविका ने प्रियंका देवी की राह आसान कर दी. 2016 में जीविका से जुड़ी और जुड़ने के बाद 20,000 रुपए लोन प्राप्त किया. इसके बाद धीरे-धीरे व्यापार करना शुरू किया. मुर्गी पालन से सफर हुआ और फिर CLF की परीक्षा देकर सफल हुआ तो खाद बीज दुकान मिला.
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प्रियंका ने Local 18 से कहा कि 21 दिन ट्रेनिंग करने के बाद खाद बीज की दुकान शुरू किया. खाद बीज की बिक्री के साथ गौ पालन, मशरूम उगाना और मुर्गी पालन कर रही हूं. मशरूम हम दो प्रकार के उगा रहे हैं, जिसमें ओएस्टर और बटन दोनों शामिल हैं.
हालांकि, बटन मशरूम सीजन में उगा रहे हैं. इस प्रकार से हम अपना व्यापार कर रहे हैं और उससे हमारा लाइफ चल रहा है. यहां हम महीने की 40 हजार रुपए तक कमाई कर रहे हैं. इससे हमारा और हमारे परिवार का खर्च चलता है. बच्चों की पढ़ाई भी इसी से होती है.
वो बताती हैं कि 2015 से पहले हमारी परिस्थिति बिल्कुल खराब थी. किसी प्रकार से हमारा घर का खर्च चलता था. दूसरों के घरों में खाना पकाकर अपने घर का खर्च निकालती थी, लेकिन इन सबके बाद हमारा भी किस्मत का दरवाजा खुला और अब थोड़ी सी मेहनत के बल पर आज घर परिवार चलाने के लिए किसी के सामने विवश नहीं होना पड़ रहा है.
अब एक महीने में 40 हजार रुपए तक कमाई हो रही है, जिससे अपना खर्च निकल पाता है. साथ ही हमारे बच्चे भी पढ़ाई लिखाई कर रहे हैं. हमारा परिवार वैसे खेती बाड़ी से जुड़े हुए हैं तो ज्यादा खर्च नहीं निकल पाता है.
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