सूखी हवा और ठंड बच्चों को बना रही है बीमार, सर्दियों में बच्चों के लिए जानलेवा है निमोनिया

देहरादून: उत्तराखंड के कई हिस्सों में सूखी हवा और कड़ाके की ठंड ने स्वास्थ्य संकट पैदा कर दिया है, खासकर छोटे बच्चों के लिए. चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि मौसमी बदलाव के कारण बच्चों में निमोनिया के मामलों में अलर्मिंग वृद्धि दर्ज की गई है, जो अक्सर जानलेवा साबित हो रहा है. देहरादून के दून मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में रोजाना कई निमोनिया के मरीज पहुंच रहे हैं. आप अपने बच्चों को इससे बचने के लिए कई तरह के उपाय कर सकते हैं.

कमरे में हीटर का उपयोग करते समय Humidifier का उपयोग करें या पानी से भरा बर्तन रखें, ताकि हवा में नमी बनी रहे. अपने बच्चे को न्यूमोकोकल और फ्लू के टीके समय पर लगवाए. अगर बच्चे के सीने में दर्द, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, मितली, उल्टी और दस्त जैसे लक्षण नजर आते हैं या बच्चों में सांस लेने में परेशानी और छाती का धंसना भी निमोनिया के लक्षण हो सकते हैं.

देहरादून के सरकारी अस्पताल दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाल रोग विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ अशोक कुमार ने बताया कि आमतौर पर सर्दियों के दिनों में सर्दी, खांसी, जुखाम तो होती ही रहती है, बच्चों में यह सामान्य बात है. अगर आप बच्चे का समय पर सही तरीके से इलाज नहीं करवा पाते हैं, तो यही समस्या गंभीर रूप ले सकती है. अभिभावकों की लापरवाही के चलते जब बच्चों को ठंड लग जाती है, तो ऐसे में सर्दी, खांसी, जुकाम के साथ ही उनके सीने में जकड़न और दर्द होने लगता है, सीने से गड़गड़ की आवाज आने लगती है, यह निमोनिया के लक्षण हो सकते हैं. जिन बच्चों का प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होता है और उनमें सर्दियों के दिनों में निमोनिया होने की संभावना बढ़ जाती है.

इन चीजों का रखें ध्यान

डॉ अशोक बताते हैं कि सर्दियों के दिनों में बच्चों का खास ख्याल रखना जरूरी है, क्योंकि उन्हें सर्दी, खांसी और जुकाम के साथ ही निमोनिया जैसी परेशानी हो सकती है. बच्चों को कई लेयर में कपड़े पहनने के साथ ही उन्हें सर्दी से बचाएं, आप अपने घरों में भी हीटर का उपयोग कर सकते हैं. कई लोग सोचते हैं कि बच्चे घर में ही हैं, इसीलिए वह उन्हें हल्के कपड़े पहनते हैं जो की गलत है. सर्दियों के दिनों में बच्चों को धूप जरूर दिखाएं.

बोतल से दूध पिलाने से बढ़ जाता है संक्रमण 

बच्चों को कपड़े के साथ-साथ उसकी फीडिंग पर ध्यान रखना भी जरूरी होता है. जो लोग दूध की बोतल से बच्चे को फीड करवाते हैं उन्हें यह जानना जरूरी है कि सबसे ज्यादा इससे संक्रमण का खतरा होता है. बोतल जहां-तहां पड़ी हो और साफ न हो तब और संक्रमण होता है. इसी के साथ ही आप इसमें दूध स्टोर करके रखते हैं तो वह ठंडा हो जाता है और ठंडा दूध बलगम बनने का काम करता है. इसलिए, ध्यान रहे कि बोतल साफ रहनी चाहिए और उसमें जब भी आप बच्चे को दूध दें, तो गुनगुना या गर्म करके दें. हो सके तो इसमें चुटकी भर हल्दी डाल दें. मां का दूध बच्चे के लिए सबसे ज्यादा शक्तिशाली माना जाता है, इसलिए कोशिश करें कि मां बच्चे को स्तनपान करवाएं, ताकि उसकी इम्यूनिटी मजबूत हो सकें.

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