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Satna News: सतना के डीएफओ मयंक चांदीवाल ने लोकल 18 से कहा कि इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (IFS Preparation Tips) देश के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण सेवा है. पर्यावरण से जुड़ी हर चीज के बचाव के लिए आज भी ग्राउंड लेवल से लेकर टॉप लेवल तक फॉरेस्ट सर्विस अफसर का अहम योगदान रहता है.
सतना. देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में शामिल इंडियन फॉरेस्ट सर्विस युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. पर्यावरण संरक्षण और वन्य जीवन की सुरक्षा से जुड़ी यह सेवा न केवल चुनौतीपूर्ण है बल्कि इसमें काम करने का दायरा भी बेहद व्यापक होता है. यूपीएससी के कैलेंडर के अनुसार IFS 2026 की प्रारंभिक परीक्षा 24 मई 2026 को आयोजित होगी जबकि मुख्य परीक्षा 22 नवंबर 2026 से शुरू होगी. ऐसे में अभी से सुनियोजित रणनीति के साथ तैयारी शुरू करना बेहद जरूरी है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पढ़ाई का पैटर्न सही रखा जाए और समय का संतुलित उपयोग किया जाए, तो इस कठिन परीक्षा में सफलता पाना संभव है. आईएफएस की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के लिए पढ़ाई को तीन चरणों में बांटना सबसे बेहतर तरीका माना जाता है. पहले चरण में अगले 6 से 8 महीनों तक मेन्स एग्जाम के सिलेबस और अपने दो ऑप्शनल सब्जेक्ट्स पर गहराई से काम करना चाहिए. मेन्स में दो बड़े ऑप्शनल सब्जेक्ट्स होते हैं, जिन्हें अंतिम समय में संभालना मुश्किल हो सकता है, इसलिए इन्हें पहले ही मजबूत करना जरूरी है.
दूसरे चरण में प्रीलिम्स पर फोकस करना चाहिए. इस दौरान खास तौर पर एनवायरमेंट, इकोलॉजी और साइंस एंड टेक्नोलॉजी जैसे सब्जेक्ट्स पर अधिक ध्यान देना जरूरी होता है क्योंकि आईएफएस एग्जाम में इन विषयों का वेटेज काफी अधिक रहता है. इसके साथ ही करंट अफेयर्स और जीके के टॉपिक्स को भी लगातार अपडेट करते रहना चाहिए. प्रीलिम्स से करीब तीन महीने पहले उम्मीदवारों को अपनी पूरी ऊर्जा मॉक टेस्ट सीएसएटी अभ्यास और रिवीजन पर केंद्रित कर देनी चाहिए. विशेषज्ञ बताते हैं कि पिछले वर्षों के क्वेश्चन पेपर का विश्लेषण करने से परीक्षा के पैटर्न और महत्वपूर्ण विषयों की बेहतर समझ मिलती है. इसके अलावा एनसीईआरटी की किताबों से बेसिक नॉलेज मजबूत करना और रोजाना अखबार पढ़कर करंट अफेयर्स पर पकड़ बनाना भी जरूरी है.
डीएफओ मयंक चांदीवाल की सलाह
लोकल 18 से बातचीत में मध्य प्रदेश के सतना के डीएफओ मयंक चांदीवाल ने बताया कि इंडियन फॉरेस्ट सर्विस देश के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण सेवा है. एनवायरमेंट से रिलेटेड हर चीज के बचाव के लिए आज भी ग्राउंड लेवल से लेकर टॉप लेवल तक फॉरेस्ट सर्विस ऑफिसर का अहम योगदान रहता है. यह सर्विस जितनी चैलेंजिंग है, उतनी ही डिमांडिंग भी है. इससे आपको काफी एक्सपोजर भी मिलता है और एक बेहतर लाइफस्टाइल मिलती है. उन्होंने तैयारी के तरीके पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में पढ़ने से ज्यादा लिखकर अभ्यास करना जरूरी होता है. अगर कोई उम्मीदवार गंभीरता से तैयारी कर रहा है, तो उसके पढ़ाई के समय का आधे से ज्यादा हिस्सा लगातार उत्तर लेखन में जाना चाहिए. लिखकर पढ़ने से विषय की समझ भी गहरी होती है और परीक्षा में उत्तर लिखने की गति भी बेहतर होती है.
आईएफएस अफसर को मिलती हैं कई सुविधाएं
आईएफएस परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवार को पहले आईएफएस ट्रेनी ऑफिसर के रूप में ट्रेनिंग दी जाती है. यह ट्रेनिंग मसूरी स्थित प्रशासनिक अकादमी और देहरादून के फॉरेस्ट अकादमी में होती है. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद पहली फील्ड पोस्टिंग एसीएफ के रूप में मिलती है. करीब चार साल की सेवा पूरी होने के बाद अधिकारी को सीनियर टाइम स्केल मिलता है और वह डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर के पद पर तैनात किया जाता है. डीएफओ को राज्य सरकार द्वारा राजपत्रित अधिकारी के रूप में कई सुविधाएं दी जाती हैं, जिनमें सरकारी बंगला, ड्राइवर सहित आधिकारिक वाहन, घरेलू सहायक और सुरक्षा गार्ड शामिल होते हैं. इसके अलावा बिजली, पानी और टेलीफोन का खर्च भी सरकार वहन करती है. परिवार के लिए चिकित्सा सुविधा, यात्रा रियायत और उच्च शिक्षा के लिए स्टडी लीव जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं. सबसे खास बात यह है कि फॉरेस्ट गेस्ट हाउस में रुकने का अधिकार और समाज में उच्च प्रशासनिक सम्मान भी इस सेवा की विशेष पहचान है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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