दमोह के मानस भवन में युवा नाट्य मंच द्वारा आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य समारोह के दूसरे दिन शुक्रवार रात को ‘गुड़िया की शादी’ नाटक का मंचन किया गया। यह बुंदेली हास्य नाटक मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय की रंग प्रयोगशाला द्वारा प्रस्तुत किया गया। बुंदेली परिवेश और शैली पर आधारित इस नाटक ने समाज में व्याप्त एक बड़ी विसंगति को हास्यबोध के साथ गंभीरता से उठाया। दर्शकों ने इसकी सराहना की। नाटक की कहानी बुंदेलखंड के एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार की गुड़िया नामक युवती पर केंद्रित है। अपने रंग-रूप के कारण वह परिवार और समाज दोनों जगह उपेक्षा का शिकार होती है।
हालांकि, गुड़िया की सोच सकारात्मक है और नकारात्मक बातों का उस पर कोई असर नहीं होता। वह विपरीत परिस्थितियों में भी सहजता से जीवन का आनंद लेना चाहती है। उसका मन उज्ज्वल है। काफी मुश्किलों के बाद गुड़िया की शादी तय होती है, लेकिन विवाह से एक दिन पहले उसके साथ एक ऐसी घटना घटित होती है, जिससे वह और अधिक कुरूप लगने लगती है। इससे पहले से ही उपेक्षित गुड़िया और उसके परिजनों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है। इन गंभीर परिस्थितियों में गुड़िया स्वयं को संभालती है। उसकी मासूमियत भरी सहज बातें जीवन दर्शन की झलक दिखाती हैं, जो जीवन को सहज और सरल तरीके से जीने की प्रेरणा देती हैं। उसके संपर्क में आने वाले घर के सदस्यों की कुंठाएं और मन की पीड़ा भी उजागर होती है। नाट्य समारोह के तृतीय दिवस शनिवार को सुरभी थियेटर ग्रुप बेगुसराय, मुंबई के द्वारा नाटक निर्देशक हरीश हरिऔध द्वारा रामधारी सिंह दिनकर द्वारा महाभारत पर आधारित नाटक रश्मिरथी का मंचन किया जाएगा। .