सम्मान ग्रहण करते वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. चन्द्रिका प्रसाद ‘चन्द्र’।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. चन्द्रिका प्रसाद ‘चन्द्र’ को बघेली कहानी संग्रह ‘रिस्तन केर निवाह’ के लिए साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश भोपाल के महाराजा विश्वनाथ प्रताप सिंह जूदेव स्मृति पुरस्कार मिला है। इस उपलब्धि पर मऊगंज के मूनलैण्ड मैरिज गार्डन में सुमना साहि
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डॉ. चन्द्रिका प्रसाद ‘चन्द्र’ को यह पुरस्कार साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश भोपाल की ओर से प्रदान किया गया है। उन्हें यह सम्मान उनके चर्चित बघेली कहानी संग्रह ‘रिस्तन केर निवाह’ के लिए मिला है।
दीपप्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत हुई
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की वंदना और दीपप्रज्वलन से हुई। गौरव साकेत, नेहा सोनी, रोशनी कुशवाहा, नीरज मिश्रा और बलराम तिवारी ने स्वागत गीत प्रस्तुत किए। इसके बाद मुख्य अतिथि की ओर से डॉ. चन्द्रिका प्रसाद ‘चन्द्र’ को शाल, श्रीफल, अभिनंदन पत्र और नगद राशि भेंटकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
अभिनंदन समारोह की अध्यक्षता प्रोग्रेसिव पेंशनर एसोसिएशन जिला शाखा मऊगंज के अध्यक्ष कर्दम ऋषि ने की। कार्यक्रम में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और देवतालाब विधायक गिरीश गौतम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश कुशवाह और वरिष्ठ पत्रकार जयराम शुक्ल विशिष्ट अतिथि के तौर पर मंचासीन रहे।
मुख्य अतिथि गिरीश गौतम ने इस अवसर पर कहा कि मऊगंज की माटी में जन्मे डॉ. चन्द्रिका प्रसाद को बघेली में रचना के लिए मिला यह सम्मान क्षेत्र की पहचान है। उन्होंने बघेली भाषा को बचाने की सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया।
वरिष्ठ पत्रकार जयराम शुक्ल ने अपने वक्तव्य में कहा कि डॉ. चन्द्र के लेखन में लोकजीवन की मिट्टी की गंध है। उन्होंने इसे पूरी बघेली चेतना का सम्मान बताया।

मध्यप्रदेश भोपाल के महाराजा विश्वनाथ प्रताप सिंह जूदेव स्मृति पुरस्कार मिला।

समारोह में कई गणमान्य मौजूद रहे।
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