शराब प्रेमियों पर दोहरी मार! एमपी में 20% कीमत बढ़ी, नई पाबंदी लगी

रमाकांत दुबे 
भोपाल. मध्य प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आबकारी नीति को कैबिनेट से मंजूरी दे दी है. इस बार नीति में नियंत्रण और राजस्व, दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश पर खास तौर पर काम किया गया है. हालांकि नर्मदा नदी के तट से 5 किलोमीटर के दायरे में मदिरा दुकानों पर प्रतिबंध को पहले की तरह जारी रखा गया है. पवित्र नगरों में भी शराब दुकानों पर रोक कायम रहेगी. इसके साथ ही नई मदिरा दुकानों को अनुमति नहीं देने का फैसला लिया गया है. सरकार का तर्क है कि सामाजिक संवेदनशीलता और सांस्कृतिक मर्यादा से समझौता किए बिना राजस्व मॉडल को मजबूत करना जरूरी है. यही कारण है कि नियंत्रण के साथ लाइसेंसिंग प्रणाली में व्यापक बदलाव किए गए हैं. विपक्ष ने नीति पर सवाल उठाए हैं, लेकिन सरकार इसे नियंत्रण और आर्थिक मजबूती का संतुलित मॉडल बता रही है.

कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार इस बार पारंपरिक नवीनीकरण व्यवस्था समाप्त कर दी गई है. अब प्रदेश की सभी 3553 मदिरा दुकानों का आवंटन ई-टेंडर और ई-ऑक्शन के जरिए होगा. आरक्षित मूल्य में 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जिससे बोली राशि बढ़ने और राजस्व में इजाफा होने की उम्मीद है. दुकानों को समूहों में बांटकर चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाई जाएगी. सरकार का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और जालसाजी की आशंका कम होगी. नीति 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी. विशेषज्ञ मानते हैं कि आरक्षित मूल्य में वृद्धि का असर खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है. हालांकि सरकार का कहना है कि प्रतिस्पर्धी बोली से संतुलन बनेगा. ई-प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी और राजस्व संग्रह मजबूत होगा.

नर्मदा और पवित्र नगरों में प्रतिबंध जारी
नीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के प्रति सख्ती है. नर्मदा नदी के तट से 5 किलोमीटर तक शराब दुकानों पर प्रतिबंध पूर्ववत रहेगा. उज्जैन, ओंकारेश्वर जैसे पवित्र नगरों में भी मदिरा दुकानें नहीं खुलेंगी. सरकार इसे सामाजिक संतुलन और आस्था के सम्मान से जोड़ रही है.

नई दुकानें नहीं, नवीनीकरण खत्म
प्रदेश में कोई नई मदिरा दुकान नहीं खोली जाएगी. इससे लाइसेंस संख्या स्थिर रहेगी. साथ ही मौजूदा दुकानों का वार्षिक नवीनीकरण विकल्प समाप्त कर दिया गया है. अब हर दुकान को ई-टेंडर और ई-ऑक्शन प्रक्रिया से गुजरना होगा. इससे पुराने ठेकेदारों का स्वत: विस्तार रुक जाएगा.

3553 दुकानों की ई-टेंडर से नीलामी
सभी 3553 दुकानों का निष्पादन डिजिटल प्लेटफॉर्म से होगा. अधिकतम पांच दुकानों का एक समूह बनाया जाएगा. जिलों को तीन से चार बैच में बांटकर चरणबद्ध बोली प्रक्रिया चलेगी. आरक्षित मूल्य पिछले वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक रखा गया है. इससे सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना है.

अहाते बंद, प्रतिभूति नियम कड़े
मदिरा दुकानों के अहाते पूर्ववत बंद रहेंगे. जालसाजी रोकने के लिए प्रतिभूति राशि के रूप में केवल ई-चालान या ई-बैंक गारंटी मान्य होगी. साधारण बैंक गारंटी और एफडी स्वीकार नहीं होंगी. इससे फर्जी दस्तावेजों और कागजी गारंटी पर रोक लगेगी.

ड्यूटी दरें यथावत, निर्यात को बढ़ावा
मदिरा की ड्यूटी दरों, विनिर्माण इकाइयों और बार लाइसेंस फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया है. विनिर्माताओं को अब उत्पाद मूल्य अनुमोदन के लिए पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी. वे पोर्टल पर कीमत घोषित कर सकेंगे. निर्यात प्रोत्साहन के तहत लेबल पंजीयन में सरलीकरण और शुल्क संशोधन किए गए हैं. जनजातीय स्व-सहायता समूहों द्वारा महुआ से निर्मित मदिरा को अन्य राज्यों में ड्यूटी मुक्त निर्यात की सुविधा देने की दिशा में भी प्रावधान जोड़े गए हैं.

ये फैसले 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे. सरकार का दावा है कि इससे राजस्व बढ़ेगा, पारदर्शिता आएगी और शराब की अनियंत्रित उपलब्धता पर लगाम लगेगी. जानें 10 प्रमुख प्‍वांइट्स 

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