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Biryani Business Success Story: शिवपुरी के नितेश धाकड़ ने छोटे ठेले से “ब्रिज बिरयानी” की शुरुआत कर आज हर महीने करीब 60 हजार रुपये की शुद्ध कमाई का सफल मॉडल तैयार किया है. कभी घर-घर सब्जी बेचने वाले इस युवा ने स्ट्रीट फूड बिजनेस में कदम रखकर युवाओं के लिए नई मिसाल पेश की है.रोजाना 70 किलो बिरयानी की बिक्री के साथ यह कारोबार अब इलाके की पहचान बन चुका है.कम निवेश में ज्यादा मुनाफा कमाने की चाह रखने वालों के लिए यह स्टोरी प्रेरणा से भरी है.पढ़िए कैसे गुणवत्ता, स्वाद और निरंतरता ने एक साधारण ठेले को सफल ब्रांड बना दिया.
Small Business Success Story: शिवपुरी के फिजिकल चौराहा के पास शाम होते ही एक ठेले पर भीड़ लग जाती है. नाम है “ब्रिज बिरयानी”. लेकिन इस ठेले के पीछे की कहानी और भी दिलचस्प है. इसे चलाने वाले नितेश धाकड़ कभी घर-घर जाकर सब्जी बेचा करते थे. आमदनी इतनी नहीं थी कि घर आराम से चल सके. जिम्मेदारियां थीं, जेब खाली रहती थी और भविष्य साफ नजर नहीं आता था. लेकिन नितेश ने हार नहीं मानी. उन्होंने सोचा कि अगर मेहनत करनी ही है, तो कुछ ऐसा किया जाए जिसमें आगे बढ़ने का मौका हो.
छोटा ठेला, लेकिन इरादा बड़ा
नितेश ने सब्जी का काम छोड़कर फूड बिजनेस में कदम रखा. ज्यादा पैसे नहीं थे, इसलिए बड़े रेस्टोरेंट का सपना देखने के बजाय शहर के ब्रिज के पास एक छोटा सा ठेला लगा लिया. नाम रखा “ब्रिज बिरयानी”. शुरुआत में रोज थोड़ा ही बनाते थे, लेकिन स्वाद ऐसा कि जिसने खाया, वो दोबारा जरूर आया. धीरे-धीरे ग्राहकों की संख्या बढ़ती गई और ठेले की चर्चा पूरे इलाके में होने लगी.
रोज 70 किलो बिरयानी, महीने में 60 हजार की कमाई
आज हालत ये है कि रोज करीब 70 किलो बिरयानी बनती है. औसतन 7 हजार रुपये की बिक्री हो जाती है. खर्च निकालने के बाद करीब 60 हजार रुपये महीना साफ बच जाता है. स्थानीय लोग कहते हैं कि यहां की बिरयानी का स्वाद बड़े शहरों के होटल को टक्कर देता है. शाम को यहां इतनी भीड़ रहती है कि कई बार इंतजार करना पड़ता है.
स्वाद का राज क्या है?
नितेश अच्छी क्वालिटी का बासमती चावल इस्तेमाल करते हैं. मसालों का संतुलन खुद देखते हैं. बिरयानी में सोयाबीन बड़ी, तली हुई प्याज और ऊपर से डाली जाने वाली कुरकुरी नमकीन इसका अलग स्वाद बनाती है. साफ-सफाई का भी पूरा ध्यान रखा जाता है. उनका कहना है कि “ग्राहक का भरोसा ही असली कमाई है.”
युवाओं के लिए सीख
नितेश कहते हैं कि छोटा काम कभी छोटा नहीं होता. जरूरी है मेहनत, ईमानदारी और लगातार कोशिश. अगर मन में ठान लो, तो ठेले से भी ब्रांड बनाया जा सकता है. आज “ब्रिज बिरयानी” सिर्फ एक ठेला नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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