क्या आपका दिल बार-बार बहुत तेज धड़कता है? जानें ये कितना खतरनाक, हार्ट बीट कंट्रोल में रखने के लिए करें ये काम

शरीर का बेहद महत्वपूर्ण अंग है दिल (Heart). आपका दिल जब तक धड़कता है, तब तक आप जीवित रहते हैं, जिस दिन ये धड़कना बंद कर दे, आपका जीवन भी समाप्त. कई बार आपने महसूस किया होगा कि अचानक आपकी दिल की धड़कने बहुत तेज हो जाती हैं. अचानक दिल धक से करता है. हार्ट बीट बैठे रहने की स्थिति में भी तेज महसूस होती है.  दरअसल, बार-बार हार्ट बीट का अत्यधिक बढ़ना भी सेहत के लिए ठीक नहीं है.

दिल की धड़कन का नॉर्मल होना बहुत जरूरी है, लेकिन कभी-कभी अचानक तेज धक-धक होने लगती है. ऐसा लगता है कि दिल किसी परेशानी से गुजर रहा है. आखिर क्या है इसकी वजह? आमतौर पर हेवी एक्सरसाइज करने, दौड़ने, उछले-कूदने, दिमाग के संकेत देने या प्रेग्नेंसी के दौरान हार्ट बीट का बढ़ना सामान्य है. अगर आपको बार-बार ऐसा हो रहा है, आपकी दिल की धड़कने बैठे-बैठे ही तेज हो जाती हैं, पसीने आने लगते हैं, शरीर ठंडा पड़ जाता है, तो फिर आप अलर्ट हो जाएं, क्योंकि ये घातक भी हो सकता है.

किन कारणों से दिल की धड़कन होती है तेज?

दिल की धड़कन में अनियमितता तनाव, शराब और सिगरेट का सेवन, खून की कमी, बीपी और थायराइड असंतुलित होने पर होती है. हार्ट अटैक का खतरा होने पर भी दिल बार-बार तेजी से धड़कता है.

लंबे समय तक ऐसे लक्षणों को अनदेखा किया जाना घातक हो सकता है. दिल की धड़कन को सामान्य रखने के लिए सांस से जुड़े प्राणायाम (अनुलोम-विलोम) कर सकते हैं. गहरी सांस लेकर धीरे-धीरे बाहर छोड़ने की कोशिश करें. इससे दिल की धड़कन की गति सामान्य रहेगी.

आयुर्वेद में तेज हार्ट बीट को सही करने के उपाय

आयुर्वेदिक उपाय के तौर पर रोजाना सुबह खाली पेट तुलसी और शहद या अर्जुन की छाल को ले सकते हैं. सुबह तुलसी की कुछ पत्तियों को शहद के साथ लें, जबकि अर्जुन की छाल को काढ़ा बनाकर पिएं. आयुर्वेद में अर्जुन की छाल को दिल के लिए अमृत माना गया है. यह दिल के कई विकारों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है.

गिलोय और अश्वगंधा भी दिल की धड़कन को सामान्य रखने में मदद करते हैं. गिलोय और अश्वगंधा तनाव को कम करने में मदद करते हैं, जिससे दिल पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं पड़ता. कैफीन युक्त पेय पदार्थ न लें. साथ ही पैक्ड पेय जैसे डिब्बाबंद जूस या ड्रिंक्स लेने से परहेज करें.

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