क्या सच में प्यार में टूट जाता है दिल? कार्डियोलॉजिस्ट ने बताई हैरान करने वाली बात, आप भी जान लीजिए

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Broken Heart Syndrome: प्यार में कई लोगों का दिल टूट जाता है और इसका असर उनकी हार्ट हेल्थ पर बुरी तरह पड़ता है. अक्सर लोग ब्रेकअप को मेंटल प्रॉब्लम्स से जोड़कर देखते हैं, लेकिन कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार दिल टूटने से हार्ट की मसल्स कमजोर हो सकती हैं. इससे भविष्य में दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. हालांकि यह हार्ट अटैक जितना खतरनाक नहीं होता है और इससे हार्ट की धमनियों में कोई ब्लॉकेज नहीं होती है.

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प्यार में दिल टूटने से हार्ट पर बुरा असर पड़ता है.

All About Broken Heart Syndrome: जब आप किसी से प्यार करते हैं, तो आपके दिल में उसकी खास जगह बन जाती है. अगर किसी को प्यार में धोखा मिल जाए, तो इससे दिल टूट जाता है. कई लोगों का प्यार में दिल टूट जाता है और उनकी सेहत बुरी तरह प्रभावित होती है. माना जाता है कि दिल टूटना महज कहने की बात है और उसका हार्ट से कोई लेना देना नहीं है. हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो दिल टूटने का सीधा असर हार्ट हेल्थ पर पड़ता है. इमोशनल स्ट्रेस के कारण हमारे हार्ट को नुकसान होता है और ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम (Broken Heart Syndrome) का शिकार हो सकते हैं.

नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल की सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वनीता अरोरा ने News18 को बताया कि ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम दिल से जुड़ी परेशानी है. जब किसी व्यक्ति को इमोशनल सदमा लगता है, तब इससे हार्ट की मसल्स कमजोर हो जाती हैं और दिल सही तरीके से खून को पंप नहीं कर पाता है. इस कंडीशन में लोगों को सीने में दर्द, सांस फूलना, दिल की धड़कन तेज होने जैसे लक्षण नजर आते हैं. हालांकि इसमें धमनियों में ब्लॉकेज नहीं मिलता है. यह सिंड्रोम महिलाओं में पुरुषों की तुलना में ज्यादा देखा जाता है. ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम सिर्फ प्यार में धोखा मिलने से नहीं होता है, बल्कि किसी भी प्रकार के अत्यधिक मानसिक और भावनात्मक तनाव से ट्रिगर हो सकता है.

कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया कि अचनाक किसी रिश्ते के टूटने या इमोशनल ट्रॉमा से ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम हो सकता है. इसके अलावा किसी करीबी की अचानक मौत, गंभीर हादसा, नौकरी छूटना या आर्थिक तनाव, डर, सदमा या झगड़ा, अचानक बुरी खबर मिलने से भी हो सकता है. इन कंडीशंस में शरीर अचानक बहुत ज्यादा तनाव हार्मोन छोड़ता है, जो हार्ट के कामकाज को टेंपररी बाधित कर देता है. अधिकतर मरीजों को सीने में दर्द, बेचैनी, पसीना आने, सांस लेने में कठिनाई और धड़कन तेज होने जैसे लक्षण महसूस होते हैं. ECG और खून के टेस्ट में हार्ट अटैक जैसे लक्षण दिख सकते हैं, लेकिन एंजियोग्राफी में ब्लॉकेज नहीं मिलता है. यह स्थिति गंभीर लगती है, लेकिन हार्ट अटैक जितनी खतरनाक नहीं होती है.

डॉक्टर वनीता अरोरा के अनुसार अच्छी बात यह है कि ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम आमतौर पर टेंपररी होता है और सही ट्रीटमेंट से कुछ हफ्तों में ठीक हो सकता है. अधिकतर मामलों में दिल अपनी सामान्य स्थिति में वापस आ जाता है. हालांकि बार–बार भावनात्मक तनाव, एंजायटी अटैक और कमजोर मेंटल हेल्थ वाले लोगों में इस सिंड्रोम के बार-बार होने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए डॉक्टर शारीरिक इलाज के साथ–साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी सलाह देते हैं. ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम से बचने के लिए स्ट्रेस को कम करना बेहद जरूरी है. दिल सिर्फ पंप करने के लिए ही नहीं है, बल्कि यह भावनाओं से जुड़ा संवेदनशील अंग है. इसका ख्याल रखना सभी के लिए बेहद जरूरी है.

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्… और पढ़ें

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क्या सच में प्यार में टूट जाता है दिल? डॉक्टर ने बताई हकीकत, आप भी जानें

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