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World’s First Transatlantic Surgery: अमेरिका और ब्रिटेन के डॉक्टर्स ने मिलकर मेडिकल साइंस में इतिहास रच दिया है. डॉक्टर्स ने करीब 6400 किलोमीटर दूर बैठकर एक मानव शरीर पर रोबोट की मदद से रिमोट सर्जरी करने का कारनाम कर दिया. इस प्रक्रिया ने साबित कर दिया कि अब डॉक्टर दूर से बैठकर भी सर्जरी कर सकते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक भविष्य में स्ट्रोक और अन्य इमरजेंसी कंडीशंस में मरीजों की जान बचाने में बड़ी भूमिका निभाएगी.
Revolutionary Tele-Surgery News: एक जमाने में दवा लेने के लिए लोगों को बार-बार हॉस्पिटल के चक्कर लगाने पड़ते थे. फिर डिजिटल युग आया और सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे डॉक्टर्स मरीजों से ऑनलाइन कंसल्टेशन करने लगे. आजकल लोगों को छोटी-मोटी परेशानियों के लिए घर बैठे ही डॉक्टर्स से बातचीत पर दवा का प्रिस्क्रिप्शन मिल जाता है. अब जल्द ही सर्जरी भी रिमोट तरीके से की जा सकेंगी और लोगों को ऑपरेशन के लिए हजारों किलोमीटर का सफर तय नहीं करना पड़ेगा. जी हां, सुनकर चौंक रहे होंगे, लेकिन यह बात बिल्कुल सही है. दुनिया में पहली बार अमेरिका और ब्रिटेन के डॉक्टर्स ने मिलकर ऐसा सर्जिकल कारनामा किया है, जिसे मेडिकल साइंस में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.
यह प्रयोग स्कॉटलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ डंडी के प्रोफेसर आइरिस ग्रुनवाल्ड और अमेरिकी टीम के नेतृत्व में किया गया. इस सर्जरी में इस्तेमाल की गई रोबोटिक तकनीक लिथुआनिया की कंपनी Sentante द्वारा डेवलप की गई है. प्रोफेसर ग्रुनवाल्ड ने कहा कि पहले यह सिर्फ एक साइंस फिक्शन की तरह लगता था, लेकिन अब हमने साबित कर दिया कि इस तकनीक से पूरी सर्जिकल प्रक्रिया को किया जा सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक स्ट्रोक के मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकती है. अक्सर स्ट्रोक के मामले में हर सेकंड कीमती होता है और ग्रामीण या दूरस्थ इलाकों में रहने वाले मरीज समय पर इलाज नहीं करा पाते हैं. इस तकनीक की मदद से किसी भी सर्जन को दूर से ही थ्रोम्बेक्टॉमी यानी ब्लड क्लॉट निकालने की सर्जरी करने की सुविधा मिलेगी, जिससे अनगिनत लोगों की जान बचाई जा सकती है.
इस प्रयोग को फिलहाल मानव शरीर पर डेमो के रूप में किया गया था, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि अब जल्द ही इस पर क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया जाएगा. अगर ये ट्रायल सफल होते हैं, तो भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल दुनियाभर के अस्पतालों में किया जा सकेगा. खासतौर से दूरदराज के इलाकों में यह तकनीक कारगर साबित हो सकती है, क्योंकि वहां अनुभवी न्यूरो-सर्जन उपलब्ध नहीं होते हैं. प्रोफेसर ग्रुनवाल्ड के मुताबिक इस अनुभव की सबसे खास बात यह थी कि यह बिल्कुल एक सामान्य सर्जरी की तरह महसूस हुआ. मेरे हाथ वैसे ही प्रतिक्रिया कर रहे थे जैसे मैं खुद मरीज के पास खड़ी होकर सर्जरी कर रही हूं. वहीं डॉ. हानेल ने बताया कि इतनी दूरी से काम करने के बावजूद सिर्फ 120 मिलीसेकंड का तकनीकी लैग महसूस हुआ, जो एक पलक झपकने जितना होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक आने वाले वर्षों में टेली-न्यूरोइंटरवेंशन का भविष्य बदल सकती है और दुनिया के किसी भी कोने से सर्जरी करना संभव बना सकती है.
अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें
अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्… और पढ़ें
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