क्या आप रात 11 बजे के बाद सोते हैं? फिर तो मुश्किल है… डॉक्टर ने क्यों कह दी ऐसी बात, जानकर उड़ जाएंगे होश

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Late Night Sleep and Weight Gain: रात को जल्दी सोना सेहत के लिहाज से अच्छा माना जाता है. अगर आप रात में 11 बजे के बाद सोएंगे, तो इससे शरीर पर बुरा असर पड़ सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो देर रात सोने से मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ता है, कोर्टिसोल बढ़ता है और भूख से जुड़े हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं. इससे वजन घटाना मुश्किल हो जाता है.

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रात को जल्दी सोने से वेट लॉस में मदद मिल सकती है.

Early Bedtime Crucial for Weight Loss: अधिकतर लोग वजन घटाने के लिए जिम में जाकर घंटों पसीना बहाते हैं और अलग-अलग तरह की डाइट फॉलो करते हैं. कई बार ऐसा करने से भी वेट लॉस नहीं होता है. अगर आप भी वजन घटाने के कई तरीके आजमा चुके हैं और फिर भी वजन कम नहीं हो रहा है, तो आपको अपनी नींद पर ध्यान देना चाहिए. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो कई लोग सही खानपान और कसरत के बावजूद वजन कम नहीं कर पाते, क्योंकि वे देर रात तक जागते हैं. अगर आप रात में 11-12 बजे तक जागते हैं, तो आपकी वेट लॉस की कोशिश बर्बाद हो सकती है. इसलिए नींद का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

जूपिटर हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. अमित सराफ ने HT को बताया कि रात 11 बजे के बाद सोना मेटाबॉलिज्म, हार्मोन और पाचन तंत्र पर गहरा असर डाल सकता है. हमारा शरीर एक नेचुरल बायोलॉजिकल क्लॉक पर काम करता है. रात लगभग 10:30 बजे के बाद शरीर डाइजेशन स्लोडाउन फेज में प्रवेश करने लगता है. इस दौरान पाचन की प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से धीमी होने लगती है. अगर कोई व्यक्ति इस समय के बाद भी जागता रहता है, तो शरीर तनाव की स्थिति में बना रहता है और कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है. कोर्टिसोल हार्मोन अगर रात में लगातार हाई रहता है, तो फैट स्टोरेज आसान हो जाती है और फैट बर्निंग धीमी पड़ जाती है. चाहे आपकी डाइट कितनी भी हेल्दी क्यों न हो.

डॉक्टर सराफ ने बताया कि मेटाबॉलिज्म पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है. सामान्य रूप से रात 11 बजे से 3 बजे के बीच शरीर रिपेयर और रिकवरी का सबसे महत्वपूर्ण काम करता है. यही समय मेटाबॉलिक बैलेंस के लिए भी जरूरी होता है. अगर आप देर से सोते हैं, तो मेटाबॉलिक कैओस फेज शुरू हो सकता है, जिसमें शुगर कंट्रोल कमजोर पड़ जाता है, भूख से जुड़े हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं और अगले दिन क्रेविंग्स बढ़ जाती हैं.

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एक्सपर्ट की मानें तो देर से सोना भूख और तृप्ति से जुड़े हार्मोन घ्रेलिन और लेप्टिन को भी प्रभावित करता है. जब इनका संतुलन बिगड़ता है, तो व्यक्ति को ज्यादा भूख लगती है. खासकर मीठा और कार्बोहाइड्रेट खाने की इच्छा बढ़ती है. इससे ओवरईटिंग की संभावना बढ़ती है और वजन कम करना और भी कठिन हो जाता है. सिर्फ कैलोरी गिनना काफी नहीं है, शरीर की आंतरिक घड़ी के अनुसार चलना भी उतना ही जरूरी है. अगर ऐसा नहीं करेंगे, तो सेहत पर बुरा असर पड़ेगा.

डॉक्टर के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति रात 11 बजे के बाद लंबे समय तक जागता है, तो डिटॉक्स डिसरप्शन फेज शुरू हो सकता है. इस दौरान शरीर की प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया धीमी हो जाती है, पाचन सुस्त पड़ जाता है और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. ऐसे में चाहे आप कितनी भी डिटॉक्स डाइट या हेल्दी ड्रिंक ले लें, देर रात तक जागना उसके फायदों को कम कर सकता है. एक परफेक्ट डाइट भी खराब नींद की भरपाई नहीं कर सकती है. अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो 11 बजे से पहले सो जाएं. नींद एक ऐसा साइलेंट एक्सेलेरेटर है, जो मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है, क्रेविंग्स को नियंत्रित करता है और वजन घटाने की राह को आसान बनाता है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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