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Tips to Manage Stress: कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं जिसके जीवन में तनाव न हो. हर व्यक्ति के जीवन में तनाव होता है लेकिन जो अच्छे से इसे मैनेज कर लेता है. हमारी इस खास फोटो गैलरी में आप इस तरह के 8 प्रभावी और आसान तरीकों के बारे में जानेंगे जो न केवल आपके दिमाग को शांत करेंगे बल्कि आपको एक खुशहाल जीवन जीने में मदद करेंगे.
आज की तेज़ रफ्तार भरी जिंदगी में तनाव और बेचैनी अहम हिस्सा बन चुकी हैं. खास तौर पर जब काम का दबाव, व्यक्तिगत ज़िम्मेदारियां और भविष्य को लेकर अनिश्चितता जैसी स्थितियां हमारे मन को लगातार तनाव में रखती हैं. हालांकि, बेचैनी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में मानव मस्तिष्क की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है लेकिन जब यह ज़रूरत से ज़्यादा समय तक बनी रहती है, तो यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालने लगती है.
मेंटल हेल्थ की एक्सपर्ट आरुषि कोहली इस विषय पर बात करते हुए कहती हैं कि अधिकांश लोग यह मानते हैं कि बेचैनी सिर्फ मानसिक स्तर पर होती है. जैसे ज़रूरत से ज़्यादा सोचना, चिंता करना या हर समय किसी तरह की घबराहट महसूस होना ही बेचैनी का कारण है. लेकिन वास्तव में बेचैनी एक गहरी शारीरिक प्रक्रिया भी होती है, जिसमें शरीर के स्तर पर भी बदलाव आते हैं.
यदि कोई व्यक्ति लगातार बेचैनी और घबराहट की स्थिति में रहता है, तो उसका नर्वस सिस्टम धीरे-धीरे स्थायी तनाव की अवस्था में चला जाता है. इसके कारण शरीर में कॉर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है. नींद प्रभावित होती है, पाचन धीमा पड़ जाता है और ऊर्जा का स्तर कम हो जाता है. समय के साथ शरीर इस अवस्था को सामान्य मानने लगता है और हर समय सतर्क रहने का अभ्यस्त हो जाता है. यही वजह है कि बेचैनी शरीर की कार्यप्रणाली को किस तरह बदल देती है. ऐसी स्थिति में तनाव और घबराहट को नियंत्रित करने के लिए कुछ सरल उपायों को अपनाया जा सकता है.
1. एक पल ठहरकर ध्यान दें: जब बेचैनी बढ़ने लगे, तो तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय एक क्षण रुकें और अपने शरीर की स्थिति, सांसों और मानसिक अवस्था पर ध्यान दें. यह जानने की कोशिश करें कि आपको किस वजह से बेचैनी हो रही है. तनाव पर काबू करने की दिशा में पहला कदम होता है.
2. अपनी सांसों की गति धीमी करें: तनावपूर्ण परिस्थितियों में सांसें तेज़ हो जाती हैं. ऐसे में धीरे-धीरे और गहरी सांस लें. इससे आपका नर्वस सिस्टम शांत होता है और आप स्पष्ट फैसले ले पाते हैं.
3. हल्का व्यायाम करें: योग, टहलना या हल्की स्ट्रेचिंग जैसी गतिविधियां शरीर से तनाव को बाहर निकालने में मदद करती हैं. इन्हें रोज़मर्रा की आदत में शामिल करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है.
4. मनपसंद काम करें: किताब पढ़ना, अच्छा संगीत सुनना या कोई भी ऐसा काम जो आपको अच्छा लगता हो, इसे रोज़ाना की दिनचर्या का हिस्सा बनाएं.
5. बेचैनी को समझने की कोशिश करें: बेचैनी को अपराधबोध की तरह देखने के बजाय केवल एक भावना के रूप में देखें. इसके कारणों को समझना ही अंदरुनी शांति की नींव है.
6. थकने से पहले आराम करें: पूरी तरह थक जाने का इंतज़ार न करें. छोटे-छोटे ब्रेक लेना मन को तरोताज़ा करता है और लगातार तनाव की स्थिति बनने से रोकता है.
7. संवाद बनाए रखें: जिस व्यक्ति पर आप भरोसा करते हों, उससे अपने तनाव और संघर्ष साझा करें. अकेलापन और बेचैनी जब साथ आते हैं, तो मानसिक स्वास्थ्य के लिए ख़तरनाक हो सकते हैं.
8. विशेषज्ञ की मदद लें: अगर ये उपाय कारगर साबित न हों, तो बिना झिझक किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें. पेशेवर मार्गदर्शन लंबे समय तक मानसिक सेहत को सुरक्षित रखने में मदद करता है.
हालांकि तनाव और बेचैनी जीवन का एक हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें कैसे संभालना है, कैसे मैनेज करना है यह पूरी तरह आपके हाथ में होता है. सही जागरुकता और छोटे-छोटे बदलाव भी मन और शरीर को स्वस्थ रखने का रास्ता बना सकते हैं.
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Lakshmi Narayan
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