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Emotional Eating : क्या आपने कभी गौर किया है कि जब आप बहुत गुस्से में होते हैं, उदास होते हैं या अकेलापन महसूस करते हैं, तो आपका मन अचानक पिज्जा, बर्गर या मीठा खाने के लिए मचलने लगता है? अगर हां, तो आप ‘इमोशनल ईटिंग’ के शिकार हैं. यह भूख पेट की नहीं, बल्कि मन की होती है, जहां हम अपने जज्बातों को शांत करने के लिए खाने का सहारा लेते हैं. हाल के दिनों में ऐसे लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है जो भूख लगने पर नहीं, बल्कि ‘मूड’ खराब होने पर खाते हैं. ऐसा करना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है.
हाल ही में सिर्फ भूख या स्वाद के लिए नहीं, बल्कि इमोशन्स की वजह से भी खाने वालों की संख्या बढ़ गई है. गुस्सा, रोना, उदासी या दिल टूटने जैसे समय में कई लोग फास्ट फूड की तरफ भागते हैं. ये पूरी तरह से मन से जुड़ी एक भूख होती है, जिसमें लोग हेल्दी खाने को छोड़कर सिर्फ फास्ट फूड ही ढूंढते हैं. इससे कई तरह की परेशानियां भी हो सकती हैं. खासकर पेट बढ़ना, हार्मोन असंतुलन, दिल की दिक्कतें और डायबिटीज जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए इस आदत से बाहर आना बहुत जरूरी है.
लेकिन जो लोग इमोशनल होकर खाते हैं, उनके लिए उस आदत से बाहर आना इतना आसान नहीं होता. वे उस भावना के गुलाम बन जाते हैं. जैसे अगर मन में आया तो खाना नहीं खाया तो उन्हें लगता है कि सब कुछ खत्म हो गया है, दुख और तनाव भी बढ़ जाता है. अगर आपको भी ऐसा ही महसूस होता है, तो नीचे दिए गए तरीके आपकी मदद कर सकते हैं.
1) सबसे पहले जानिए कि आपको ये खाने की इच्छा कब होती है. जैसे भूख लगने का समय, अकेलेपन का समय, या जब आप बहुत तनाव में होते हैं, तब आपको फास्ट फूड खाने का मन ज्यादा करता है. ऐसे समय को कैसे टालना या संभालना है, इसके बारे में सोचें और उसी हिसाब से काम करें.
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2) फास्ट फूड की भूख से बचने के लिए हमेशा पेट को हेल्दी खाने से भरकर रखें. दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में फल और सब्जियां स्नैक्स की तरह खाने से फायदा मिलेगा. आपको कब सच में भूख लग रही है और कब इमोशनल भूख लग रही है, ये समझें और उस समय फल या सब्जियों जैसे हेल्दी स्नैक्स खाएं, इससे इमोशनल भूख से भी बच सकते हैं.
3) अपने खाने में पोषक तत्वों से भरपूर चीजें शामिल करें. खासकर प्रोटीन वाले खाने, कम कार्बोहाइड्रेट वाले खाने और अच्छे फैट वाले खाने को चुनें. इससे इमोशनल भूख को कंट्रोल किया जा सकता है. मोटापा, दिल की बीमारी या डायबिटीज वाले लोग डॉक्टर की सलाह से ही ये बदलाव करें.
4) जितना हो सके, नई खाने की आदतों को धीरे-धीरे अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी में शामिल करें. जैसे पहले हफ्ते में सिर्फ शक्कर वाली चाय या कॉफी छोड़ दें. फिर अगले हफ्ते में मिठाई और जूस कम कर दें. उसके बाद अगले हफ्ते में तली हुई चीजें छोड़ दें. इस बीच रोज़ एक फल जरूर खाएं. इस तरह धीरे-धीरे खाने की आदत बदलने से शरीर के साथ-साथ मन भी नई चीजों को अपनाने में मदद करेगा.
भावनाओं में बहकर खाना छोड़ना थोड़ा मुश्किल जरूर है. लेकिन इस लंबे सफर में आप जो छोटे-छोटे बदलाव लाते हैं, उन्हें भी सेलिब्रेट करें. खुद को शाबाशी दें. कोशिश करें कि आपके आसपास ऐसे लोग हों जो इस सफर में आपको सपोर्ट करें. अपने लिए एक रूटीन बनाएं कि किस समय खाना है और किस समय नहीं खाना है. इससे आपको गलत खाने की आदत से बाहर आने में मदद मिलेगी. भावनाओं में बहकर इसे मिटाने के लिए खाना न खाएं.
अगर इतनी चीजों को अपनाने के बाद भी आप जंक फूड से दूर नहीं रह पा रहे हैं या दिनभर बार-बार खाने का मन करता है, तो न्यूट्रिशन एक्सपर्ट से सलाह लेना जरूरी है. फिर आपको मानसिक बीमारी है जिसका इलाज किए जाने की जरूरत है.
डिस्क्लेमर: ये सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए दी गई है. अपनी डाइट या रोजमर्रा की आदतों में कोई बदलाव करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें. News18Tamilnadu इन जानकारियों की जिम्मेदारी नहीं लेता.