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सर्दियों में दही खाने का गलत तरीका स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है, जिससे सर्दी-जुकाम और गैस की समस्या बढ़ सकती है. आयुर्वेदिक डॉक्टर रीतू वर्मा के अनुसार, दही को हमेशा कमरे के तापमान पर और अदरक या हल्के गर्म पदार्थों के साथ ही खाएं. सही समय और संयोजन के साथ दही का सेवन करने से यह सुपरफूड बन जाता है और पाचन सुधरता है.
सर्दियों में कई लोग दही का सेवन बंद कर देते हैं, क्योंकि इसकी तासीर ठंडी मानी जाती है और यह कफ बढ़ाने के साथ-साथ पाचन को भी प्रभावित कर सकती है. लेकिन, कुछ लोगों को खाने के साथ दही खाने की आदत होती है. ऐसे में आयुर्वेदिक डॉक्टर रीतू वर्मा ने बताया है कि सही तरीके और सही संयोजन के साथ खाने पर दही पूर्ण भोजन का काम करता है. यदि दही गलत समय या गलत तरीके से खाया जाए, तो यह शरीर में भारीपन, सर्दी-जुकाम और गैस जैसी समस्याएँ बढ़ा सकता है. इसलिए, आयुर्वेदिक तरीकों को अपनाकर आप रोज़ाना दही खाने का आनंद ले सकते हैं.

डॉक्टर रीतू वर्मा ने बताया कि दही को संतुलित करने का मुख्य तरीका है उसकी ठंडी तासीर को गर्म प्रकृति वाली चीज़ों के साथ मिलाना. सर्दियों में दही का सीधा सेवन शरीर को ठंडा कर सकता है, जिससे पाचन क्रिया सुस्त हो जाती है और अपच, एसिडिटी और कफ़ बढ़ने की समस्याएँ हो सकती हैं. इसलिए आयुर्वेद में दही को गर्म मसालों के साथ लेने की सलाह दी जाती है. डॉ. वर्मा बताती हैं कि दही की ठंडी तासीर को बैलेंस करने का सबसे आसान, प्रभावी और आयुर्वेदिक तरीका है अजवाइन, जीरा और सेंधा नमक का उपयोग करना.

अजवाइन, जीरा और सेंधा नमक तीनों पदार्थ स्वभाव से गर्म होते हैं, जिससे दही के ठंडे प्रभाव को संतुलित किया जा सकता है. इनका संयोजन दही को सर्दी में भी खाने लायक बनाता है और शरीर की पाचन शक्ति को बढ़ाता है. विशेष रूप से अजवाइन न केवल पाचन शक्ति को मज़बूत करती है, बल्कि यह गैस, पेट फूलना और कब्ज जैसी समस्याओं को भी दूर करती है. दही में अजवाइन मिलाने से उसमें मौजूद वसा और प्रोटीन आसानी से पच जाते हैं. इसके अलावा, अजवाइन सर्दियों में शरीर को हल्की गर्माहट देती है और कफ़ के बढ़ने की संभावना को कम करती है. इसलिए सर्दियों के मौसम में दही के साथ अजवाइन का उपयोग बेहद फ़ायदेमंद माना जाता है.
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जीरा भी दही के लिए एक आदर्श संयोजन है, क्योंकि यह गैस और एसिडिटी को नियंत्रित करने में मदद करता है. भुना हुआ जीरा दही के साथ लेने पर इसकी पाचन क्षमता बढ़ जाती है, और यह पेट में हल्कापन बनाए रखता है. जीरा प्राकृतिक रूप से एंटी-इंफ्लेमेटरी भी होता है, जिससे यह पेट की जलन और सूजन को कम करता है. ठंड के मौसम में इसके गर्म प्रभाव के कारण, दही का सेवन सुरक्षित और लाभकारी बन जाता है.

आयुर्वेदिक डॉक्टर रीतू वर्मा ने बताया कि सेंधा नमक शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करता है. यह पाचन को आसान बनाता है और साधारण नमक की तुलना में शरीर पर कम दबाव डालता है. दही में सेंधा नमक मिलाने से यह अधिक हल्का, स्वादिष्ट और पाचन-सहायक बन जाता है. सर्दियों में सेंधा नमक दही के ठंडे स्वभाव को कुछ हद तक गर्म बनाता है, जिससे शरीर पर इसका नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता.

डॉक्टर रीतू वर्मा के अनुसार, यदि इन आयुर्वेदिक नुस्खों को अपनाया जाए, तो सर्दियों में भी दही का सेवन पूरी तरह सुरक्षित और लाभकारी हो सकता है. एक कटोरी दही में एक-एक चुटकी भुना जीरा, अजवाइन और सेंधा नमक मिलाकर खाने से दही सर्दियों का सुपरफूड बन जाता है. चाहें तो दही को हल्का गुनगुना करके या उससे छाछ बनाकर भी पिया जा सकता है. यह तरीका पाचन को मज़बूत करने, स्वास्थ्य सुधारने और सर्दियों में पोषण बनाए रखने में मदद करता है.