जरूरत की खबर- क्या सुबह उठते ही आती हैं छींकें: हो सकता है एलर्जिक राइनाइटिस, यह सर्दी-जुखाम से कैसे अलग, 8 जरूरी सावधानियां

39 मिनट पहलेलेखक: संदीप सिंह

  • कॉपी लिंक

आपने देखा होगा कि कुछ लोगों को सुबह उठते ही लगातार छींकें आती हैं और उनकी नाक बहने लगती है। जबकि सोते समय उन्हें बिल्कुल यह परेशानी नहीं थी। हैरानी की बात यह है कि दोपहर या शाम तक सब सामान्य हो जाता है।

अक्सर लोग इसे बदलते मौसम या प्रदूषण का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन इसके पीछे एक और गंभीर वजह एलर्जिक राइनाइटिस हो सकती है। इसे आम भाषा में ‘हे फीवर’ कहा जाता है। इसमें सुबह उठते ही एक के बाद एक कई छींकें आती हैं, नाक बहती या बंद रहती है और दिन भर हल्की थकान या चिड़चिड़ापन भी बना रह सकता है।

तो चलिए, जरूरत की खबर में आज बात करेंगे कि एलर्जिक राइनाइटिस क्या है। साथ ही जानेंगे कि-

  • एलर्जिक राइनाइटिस क्या है?
  • यह क्यों होता है?
  • इससे बचने के लिए कौन-सी सावधानियां बरतनी चाहिए?

एक्सपर्ट: डॉ. राजकुमार, पल्मोनोलॉजिस्ट, इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर, नई दिल्ली

सवाल- एलर्जिक राइनाइटिस क्या है?

जवाब- यह नाक से जुड़ी एक एलर्जिक कंडीशन है। इसमें व्यक्ति की नाक किसी एलर्जेन (जैसे धूल, परागकण, धुआं, पालतू जानवरों के रोएं या फफूंद) के संपर्क में आते ही सेंसिटिव हो जाती है। इससे नाक में इंफ्लेमेशन (सूजन) होती है और व्यक्ति को बार-बार छींक आना, नाक बहना, नाक बंद होना, आंखों में पानी आना और कभी-कभी गले में खराश जैसी परेशानी होती है।

सवाल- सुबह के समय ही छींकें ज्यादा क्यों आती हैं?जवाब- सुबह के वक्त शरीर में हिस्टामिन नामक केमिकल का लेवल बढ़ जाता है, जो एलर्जिक रिएक्शन को और ज्यादा एक्टिव कर देता है। साथ ही रातभर खिड़की-दरवाजे खुले रहने से कमरे में धूल, परागकण और नमी जमा हो जाती है। सुबह उठते ही जब ये कण नाक के संपर्क में आते हैं तो छींकें शुरू हो जाती हैं। इसके अलावा बिस्तर, तकिए और कमरे में रातभर जमा एलर्जेन भी नाक और शरीर पर असर डालते हैं। इसी वजह से लगातार छींकें, नाक बहना या बंद होना और कई बार आंखों में खुजली व पानी जैसी समस्या देखने को मिलती है।

सवाल- क्या एलर्जिक राइनाइटिस और सर्दी-जुकाम एक जैसे होते हैं?

जवाब- अक्सर दोनों के लक्षण एक जैसे लगते हैं, लेकिन यह बिल्कुल एक जैसे नहीं हैं। सर्दी-जुकाम वायरस की वजह से होता है, जो आमतौर पर कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। इसमें बुखार, गले में खराश और शरीर में दर्द जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

वहीं एलर्जिक राइनाइटिस किसी वायरस से नहीं, बल्कि एलर्जेन से ट्रिगर होता है। जब तक ये एलर्जेन आसपास मौजूद रहते हैं, तब तक छींकें, नाक बहना, आंखों से पानी आना या खुजली जैसी दिक्कतें बनी रहती हैं। यानी यह लंबे समय तक भी परेशान कर सकता है।

सवाल- एलर्जिक राइनाइटिस की प्रॉब्लम किन लोगों को ज्यादा होती है?

जवाब- एलर्जिक राइनाइटिस किसी को भी हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है। जैसेकि-

  • जिनके परिवार में पहले से किसी सदस्य को एलर्जी है।
  • जो प्रदूषण, धूल या परागकण के ज्यादा संपर्क में रहते हैं।
  • जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है या जो ज्यादा तनाव में रहते हैं।
  • जिन्हें अस्थमा या सांस से जुड़ी समस्याएं हैं।
  • जो ऐसे काम करते हैं जहां धूल, जानवर या केमिकल्स का ज्यादा सामना होता है।
  • जो घर में धूल-जमा होने या खराब वेंटिलेशन के कारण एलर्जेन के संपर्क में आते हैं।
  • जो परफ्यूम, धुआं या केमिकल वाली चीजों का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।

सवाल- एलर्जिक राइनाइटिस के खतरे से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

जवाब- एलर्जिक राइनाइटिस से बचाव के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव करना जरूरी है। जैसे एलर्जेन-प्रूफ बेडिंग का इस्तेमाल करना, बेडरूम की हवा को साफ और नमी-रहित रखना, सोने से पहले शावर लेना, पालतू जानवरों को बेडरूम से दूर रखना, समय पर एंटीहिस्टामिन लेना, बेडिंग को हफ्ते में एक बार गर्म पानी से धोना और खिड़कियां बंद रखना। इन सावधानियों से सुबह की एलर्जी को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।

सवाल- अगर किसी को एलर्जिक राइनाइटिस हो तो उसे क्या करना चाहिए?

जवाब- पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. राजकुमार बताते हैं कि एलर्जिक राइनाइटिस वाले मरीज सबसे पहले यह पहचानें कि उन्हें किस चीज से एलर्जी हो रही है। जब कारण साफ हो जाता है तो बचाव और इलाज दोनों ही आसान हो जाता है। उदाहरण के लिए अगर धूल से एलर्जी है तो घर की साफ-सफाई पर ध्यान दें और बाहर जाते समय मास्क लगाएं। अगर लक्षण लगातार बने रहें तो डॉक्टर की सलाह से एंटीहिस्टामिन या नेजल स्प्रे का इस्तेमाल किया जा सकता है।

सवाल- अगर एलर्जिक राइनाइटिस को नजरअंदाज कर दिया जाए तो क्या खतरे हो सकते हैं?

जवाब- डॉ. राजकुमार बताते हैं कि अगर एलर्जिक राइनाइटिस का समय पर इलाज न किया जाए तो यह धीरे-धीरे और गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। लगातार नाक बंद रहने और नाक बहने की वजह से साइनस में इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। कुछ मामलों में यह स्थिति अस्थमा या अन्य सांस संबंधी बीमारियों को बढ़ा सकती है, खासकर उन लोगों में जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर हो या पहले से सांस की समस्या हो।

सवाल- क्या एलर्जिक राइनाइटिस का इलाज पूरी तरह संभव है?

जवाब- एलर्जिक राइनाइटिस का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही देखभाल और उपचार से इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। इसके अलावा डॉक्टर की सलाह से कुछ ट्रीटमेंट अपनाए जा सकते हैं। जैसेकि-

एंटीहिस्टामिन दवाएं: छींक, नाक बहने और खुजली जैसे लक्षणों को कम करती हैं।

नेजल स्प्रे (स्टेरॉयड): नाक की सूजन और ब्लॉकेज को कम करने में मदद करते हैं।

सलाइन वॉश या नेजल रिंस: नाक को साफ करके धूल और एलर्जेन हटाते हैं।

इम्यूनोथेरेपी (एलर्जी शॉट्स/ड्रॉप्स): लंबे समय तक दिए जाने वाले ट्रीटमेंट, जो शरीर को धीरे-धीरे एलर्जेन के प्रति कम सेंसिटिव बनाते हैं।

अगर लक्षण हल्के हैं तो घर पर सावधानियों और OTC (ओवर द काउंटर) दवाओं से राहत मिल सकती है, लेकिन बार-बार या गंभीर समस्या होने पर डॉक्टर से जरूर परामर्श लेना चाहिए।

……………………..

जरूरत की ये खबर भी पढ़िए

जरूरत की खबर- जंक फूड पर हो सिगरेट वाली चेतावनी: लग सकती है अल्ट्रा–प्रोसेस्ड फूड की लत, डॉक्टर से जानें बचाव के 7 टिप्स

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में पब्लिश एक स्टडी बताती है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की नशे की तरह आदत लग सकती हैं। इस स्टडी में कहा गया है कि इनकी लत शराब और तंबाकू जैसी ही है। पूरी खबर पढ़िए…

खबरें और भी हैं…

.

Source link

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *