10 मिनट पहलेलेखक: संदीप सिंह
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लंदन मेट्रो में इन दिनों शोर कम करने के लिए एक कैंपेन चलाया जा रहा है। यह सॉडकास्टिंग को कम करने के लिए किया जा रहा है। लंदन मेट्रो में यात्रियों ने शिकायत की थी कि कई लोग ट्रेन में हेडफोन के बिना तेज आवाज में गाने सुनते हैं, वीडियो देखते हैं, गेम खेलते हैं या फोन पर स्पीकर ऑन करके बात करते हैं।
इससे बाकी यात्रियों असहज होते हैं। ब्रिटेन में इस खराब आदत को ‘सॉडकॉस्टिंग’ कहा जाता है। अब ट्रांसपोर्ट फॉर लंदन (TFL) ने यात्रियों से अपील की है कि वे ट्रेन में हेडफोन का इस्तेमाल करें, वरना जुर्माना भरना पड़ सकता है।
भारत में यह स्थिति कमोबेश हर तरह के ट्रांसपोर्ट में है। ट्रेन में लोग अक्सर तेज आवाज में गाने सुनते मिल जाएंगे। कुछ लोग तो देर रात तक मोबाइल पर वीडियो चलाते रहते हैं।
इससे बाकी यात्रियों की नींद खराब होती है और कई बार झगड़े तक हो जाते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में भी इस पर नियम बने हुए हैं?
इसलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि ट्रेन में शोर-शराबे को लेकर भारत में क्या नियम हैं। साथ ही जानेंगे कि-
- अगर कोई यात्री इन्हें तोड़े तो क्या कार्रवाई हो सकती है?
एक्सपर्ट: नवल अग्रवाल, जनसंपर्क अधिकारी, भोपाल रेल मंडल
सवाल- क्या ट्रेन में बिना हेडफोन के तेज आवाज में गाने सुनना या फोन पर स्पीकर ऑन करके बात करना रेलवे नियमों का उल्लंघन है?
जवाब- हां, भारतीय रेलवे ने इसे लेकर स्पष्ट नियम बनाए हैं। इनके मुताबिक, ट्रेन में कोई भी यात्री तेज आवाज में गाने नहीं सुन सकता और न ही मोबाइल पर जोर-जोर से बात कर सकता है।
इसका पैमाना ये है कि अगर आपके चलते आसपास के यात्री असहज हो रहे हैं या उन्हें परेशानी हो रही है तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
खासतौर पर रात में जब लोग सो रहे होते हैं, उस समय इन नियमों को लेकर अधिक कड़ाई बरती जाती है ताकि बाकी यात्रियों की नींद और सफर आराम से हो सके।
अगर कोई यात्री बिना हेडफोन के गाने सुनता है या तेज आवाज में बात करता है तो इसे नियम का उल्लंघन माना जा सकता है और उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
सवाल- अगर कोई यात्री ट्रेन में शोर करता है या बिना हेडफोन के गाने सुनता है, तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है?
जवाब- रेलवे एक्ट, 1989 के नियमों के मुताबिक, ट्रेन में शांति भंग करना या दूसरों को परेशान करना दंडनीय अपराध है।
ऐसे मामलों में रेलवे पुलिस यानी RPF यात्री को चेतावनी दे सकती है, जुर्माना लगा सकती है या जरूरत पड़ने पर उसे किसी स्टेशन में ट्रेन से उतारा भी जा सकता है।
जुर्माना अलग-अलग मामलों में 500 रुपए से लेकर 1000 रुपए तक या उससे ज्यादा भी हो सकता है। इसका मकसद यात्रियों को सजा देना नहीं, बल्कि सबको सफर के दौरान एक-दूसरे की सुविधा का ध्यान रखने के लिए जागरूक करना है।
सवाल- रेलवे ने रात के समय यात्रियों के लिए कौन-कौन से नए नियम बनाए हैं?
जवाब- भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए और रात में शांति बनाए रखने के लिए कई नियम बनाए हैं। रात 10 बजे के बाद यात्री तेज आवाज में फोन पर बात नहीं कर सकते और न ही हेडफोन के बिना म्यूजिक चला सकते हैं।
इसी तरह नाइट लाइट छोड़कर बाकी सारी लाइट बंद करनी होंगी। अगर कोई यात्री इन नियमों का पालन नहीं करता है तो रेलवे उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकता है।
टीटीई और रेलवे स्टाफ को भी यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे यात्रियों को नियम समझाएं, ताकि किसी भी यात्री की नींद न खराब हो।

सवाल- भारतीय रेलवे का ‘10 बजे के बाद’ वाला नियम क्या कहता है?
जवाब- भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए और रात में सफर को आरामदायक बनाने के लिए ‘आफ्टर 10 PM रूल’ लागू किया है। इस नियम के तहत रात 10 बजे के बाद ट्रेन में शांति बनाए रखना जरूरी है।
ऐसा कोई भी काम नहीं करना है, जिससे दूसरों को परेशानी होती हो। इस नियम के पीछे रेलवे का मकसद है कि हर यात्री को सफर के दौरान नींद और आराम का पूरा मौका मिले।

सवाल- क्या रेलवे में नाइट रूल्स सिर्फ स्लीपर और AC कोच में लागू हैं या जनरल कोच में भी हैं?
जवाब- ये नियम सभी यात्रियों पर समान रूप से लागू होते हैं। फर्क सिर्फ निगरानी का है> AC और स्लीपर कोच में स्टाफ की मौजूदगी ज्यादा रहती है, जबकि जनरल कोच में निगरानी कम होती है।
सवाल- क्या बच्चों के लिए भी ये नियम लागू होते हैं?
जवाब- बच्चों से जुड़ा शोर रेलवे नियमों में अलग से दर्ज नहीं है, लेकिन पेरेंट्स को सलाह दी जाती है कि बच्चों का ध्यान रखें।
छोटे बच्चे अगर रोते हैं तो उसे अपराध नहीं माना जाएगा, लेकिन जानबूझकर तेज आवाज में खेलने या गाने-बजाने जैसी चीजों पर पेरेंट्स को इसे रोकने के लिए कहा जा सकता है।
सवाल- ट्रेन में शांति बनाए रखने के लिए यात्री खुद क्या ध्यान रखें?
जवाब- ट्रेन में सफर सिर्फ हमारा निजी अनुभव नहीं होता, बल्कि सैकड़ों लोग उसी डिब्बे में साथ सफर करते हैं। इसलिए जरूरी है कि हर यात्री दूसरों की नींद, आराम और सुविधा का ध्यान रखे।
रेलवे ने तो नियम बना दिए हैं, लेकिन सबसे अहम है कि हम खुद समझदारी दिखाएं और शोर-शराबे से बचें। अगर हर यात्री थोड़ी जिम्मेदारी ले, तो यात्रा सभी के लिए सुखद और आरामदायक बन सकती है।

सवाल- क्या रेलवे में इन नियमों का पालन न करने पर सिर्फ जुर्माना ही है या जेल भी हो सकती है?
जवाब- रेलवे एक्ट, 1989 की धारा 145 के अनुसार, अगर कोई यात्री ट्रेन में शांति भंग करता है, शोर मचाता है या दूसरों को परेशान करता है तो यह अपराध माना जा सकता है। ऐसे मामलों में पहले उसे चेतावनी दी जाती है या जुर्माना लगाया जाता है। जुर्माना 500 रुपए से 1000 रुपए तक हो सकता है।
लेकिन अगर यात्री बार-बार वही गलती करे या रेलवे स्टाफ और पुलिस से बदसलूकी करे, तो रेलवे उसे हिरासत में लेकर कोर्ट में पेश कर सकती है। ऐसे मामलों में अपराधी को जुर्माने के साथ 6 महीने तक की जेल भी हो सकती है।
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