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Agriculture News: विशेषज्ञों के मुताबिक, शुरुआत में ही कीटनाशक का छिड़काव करने से इस कीट को रोका जा सकता है. इमामेक्टिन बेंजोएट जैसे आधुनिक कीटनाशक काफी कारगर साबित होते हैं.
सतना. धान की खेती करने वाले किसानों के लिए अक्टूबर का महीना चुनौती भरा साबित हो सकता है. इस मौसम में पत्ता लपेट कीट तेजी से फैलता है और धान की फसल को गहरा नुकसान पहुंचाता है. यह कीट पत्तियों को मोड़कर भीतर से खाता है, जिससे पौधे की बढ़त रुक जाती है और सीधा असर उपज पर पड़ता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि लापरवाही बरतने पर किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
इन संकेतों से करें पहचान
पत्ता लपेट के हमले को किसान आसानी से पहचान सकते हैं. यदि धान की पत्तियां मुड़ने लगें और उनमें जाले जैसी परत दिखाई दें, तो यह कीट का साफ संकेत है. कई बार अंदर छिपी इल्ली को बाहर से देख पाना मुश्किल होता है, इसलिए किसानों को खेतों की लगातार निगरानी जरूरी है.
बचाव और नियंत्रण के उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती चरण में ही कीटनाशक का छिड़काव करने से इस कीट को रोका जा सकता है. इमामेक्टिन बेंजोएट जैसे आधुनिक कीटनाशक काफी प्रभावी साबित होते हैं. इसके अलावा क्लोरपाइरीफोस प्लस साइपरमेथ्रिन या प्रोफेनोफोस प्लस साइपरमेथ्रिन का मिश्रण भी उपयोगी है. यह मिश्रण बाजार में रेडीमेड उपलब्ध है या फिर किसान खुद भी प्रोफेनोफोस 35–40 एमएल और साइपरमेथ्रिन 15 एमएल को 15 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं. यह घोल लगभग 15 डिस्मिल खेत के लिए पर्याप्त रहता है.
किसान क्यों रहें सतर्क?
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खेत की नियमित निगरानी और समय पर दवा का छिड़काव ही पत्ता लपेट से बचाव का सबसे कारगर तरीका है. अगर किसान लापरवाही करते हैं, तो फसल की गुणवत्ता और मात्रा दोनों प्रभावित हो सकती हैं. समय रहते कदम उठाकर किसान अपनी मेहनत और पैदावार को सुरक्षित रख सकते हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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