कोरबा: हिंदी मासानुसार भाद्रपद (भादो) मास का आरंभ 10 अगस्त 2025 रविवार से हो गया है. जो 07 सितंबर 2025 रविवार तक रहेगा.आयुर्वेद अनुसार प्रत्येक मास में विशेष तरह के खान-पान एवं दिनचर्या का वर्णन किया गया है जिसे अपनाकर हम स्वस्थ रह सकते हैं. आयुर्वेद आचार्य डॉक्टर नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कि भाद्रपद (भादो) मास में ऋतु के अनुसार वर्षा ऋतु का समय रहता है. भाद्रपद (भादो) मास में वर्षा ऋतु होने के कारण आसपास के वातावरण मे नमी और गंदगी फैल जाती है. जिसके कारण मच्छर, मक्खियां, कीट आदि बढ़ जाते हैं और संक्रमण होने का खतरा भी बढ़ जाता है.
रोग बढ़ने की संभावना
आयुर्वेदानुसार भाद्रपद (भादो) मास में नमी होने के कारण वात दोष प्रकुपित होता है. और इस समय हमारी जठराग्नि भी मंद हो जाती है जिससे हमारी पाचन शक्ति भी कमजोर हो जाती है. इन सबके कारण भूख कम लगना, अरूचि, बुखार, मलेरिया, टाइफाइड, जोड़ों के दर्द, गठिया, सूजन, खुजली, फोड़े-फुंसी, दाद, पेट में कीड़े, नेत्राभिष्यन्द (आंख आना), दस्त और अन्य रोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है.साथ ही इस माह में ब्लड प्रेशर के बढ़ने की भी संभावना अत्यधिक होती है अतः ब्लड प्रेशर के रोगियों को इस माह में अपना विशेष ध्यान रखना चाहिये.
गर्म खाद्य पदार्थों का करें सेवन
इन सबसे बचाव हेतु स्नेहयुक्त भोजन, माखन, घी, पुराने अनाज जौ, गेंहू, राई, खिचड़ी, मूंग, लौकी परवल, लौकी, तरोई, अदरक, जीरा, मैथी, सरसों की कच्ची घानी का तेल आदि सुपाच्य ताजे एवं गर्म खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिये.साथ ही इस मास में तुलसी दल का सेवन अवश्य करना चाहिये.जो संक्रामक रोगों से हमारी रक्षा करने मे विशेष लाभकारी होता है.
भादो मास में बारिश की वजह से बीमारी फैलाने वाले कीटाणु बहुत अधिक पनपते है.अतः इस मौसम में कच्चे खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिये. विशेष रूप से सलाद कच्ची सब्जियों को उबालकर ही प्रयोग करना चाहिये. भादो मास में दही का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिये इससे पाचन एवं आंतों से संबंधित तकलीफ होने की संभावना काफी बढ़ जाती है. साथ ही भाद्रपद (भादो) मास में गुड़, नारियल तेल, मछली, मांस, मदिरा से भी परहेज करना चाहिये.