पीरियड में कम फ्लो को न समझें मामूली बात! कहीं ये बड़ी बीमारी का संकेत तो नहीं? जानें

महिलाओं के शरीर में गर्भाशय एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जिसका संबंध केवल प्रजनन क्षमता से ही नहीं बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य से भी जुड़ा होता है. गर्भाशय में होने वाला छोटा सा बदलाव भी शरीर के हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकता है. कई बार थायराइड, पीसीओडी, एनीमिया, अत्यधिक तनाव, वजन में तेजी से बदलाव या खराब जीवनशैली का असर मासिक धर्म पर साफ दिखाई देता है. आजकल बहुत सी महिलाएं पीरियड के कम फ्लो यानी हल्के रक्तस्राव की समस्या का सामना कर रही हैं. ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कम पीरियड फ्लो किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है या यह सामान्य स्थिति भी हो सकती है.

दरअसल, मासिक धर्म का फ्लो गर्भाशय की अंदरूनी परत पर निर्भर करता है, जिसे एंडोमेट्रियम कहा जाता है. यह परत हर महीने हार्मोन के प्रभाव से मोटी होती है ताकि गर्भधारण की स्थिति में भ्रूण को पोषण मिल सके. यदि गर्भधारण नहीं होता, तो यही परत टूटकर रक्त के रूप में शरीर से बाहर निकलती है, जिसे हम पीरियड कहते हैं. अगर किसी कारण से यह परत पर्याप्त रूप से विकसित नहीं होती, तो रक्तस्राव कम हो सकता है. वहीं यदि इसकी मोटाई अधिक हो जाए तो फ्लो ज्यादा हो सकता है. इसलिए हर महिला में फ्लो की मात्रा अलग होना स्वाभाविक है और इसे तुरंत बीमारी से जोड़ना सही नहीं है.

कम पीरियड फ्लो कई बार सामान्य भी हो सकता है, खासकर तब जब महिला का मासिक चक्र 21 से 35 दिनों के बीच नियमित रूप से चल रहा हो और रक्तस्राव 2 से 5 दिनों तक हो रहा हो. लेकिन यदि रक्तस्राव केवल एक दिन में ही लगभग खत्म हो जाए, बार-बार पीरियड मिस हो रहे हों, या फ्लो बहुत ही कम और अनियमित हो गया हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. हार्मोनल असंतुलन, पीसीओडी, थायराइड समस्या, अत्यधिक व्यायाम, अचानक वजन कम होना, गर्भाशय में संक्रमण या पहले की गई सर्जरी भी कम फ्लो का कारण बन सकती है. ऐसे मामलों में स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी हो जाता है.

इसके अलावा, अगर कम फ्लो के साथ तेज पेट दर्द, कमजोरी, चक्कर आना, बालों का झड़ना या गर्भधारण में कठिनाई जैसी समस्याएं भी दिखाई दें, तो यह संकेत हो सकता है कि शरीर में कोई अंदरूनी गड़बड़ी चल रही है. वहीं 7 दिनों से अधिक समय तक अत्यधिक रक्तस्राव भी सामान्य नहीं माना जाता और यह भी जांच की मांग करता है. इसलिए अपने मासिक चक्र में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव पर ध्यान देना जरूरी है.

मासिक धर्म को संतुलित रखने के लिए जीवनशैली में सुधार करना बेहद अहम है. संतुलित आहार लें जिसमें आयरन, प्रोटीन और विटामिन्स भरपूर मात्रा में हों. हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, मेवे और पर्याप्त पानी का सेवन शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं. नियमित हल्का व्यायाम करने से गर्भाशय में रक्त प्रवाह बेहतर होता है और हार्मोन संतुलित रहते हैं. साथ ही पर्याप्त नींद और तनाव से दूरी भी जरूरी है. सही देखभाल और समय पर जांच से कम पीरियड फ्लो की समस्या को समझा और नियंत्रित किया जा सकता है.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *