क्या हाई ब्लड प्रेशर की दवा जिंदगी भर खानी पड़ती है? डॉक्टर से जान लीजिए हकीकत, BP रहेगा कंट्रोल

High Blood Pressure Medicines: हाई ब्लड प्रेशर की समस्या तेजी से बढ़ रही है और अब 20-30 साल के युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं. चिंता की बात तो यह है कि तमाम लोग बीपी के मरीज बन जाते हैं, लेकिन उन्हें इस बीमारी का पता ही नहीं चलता है. डॉक्टर्स की मानें तो बीपी की समस्या बिना लक्षणों के बढ़ती रहती है, जिसकी वजह से लोग इससे अनजान रहते हैं. हालांकि यह एक बेहद गंभीर समस्या है, जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का कारण बन सकती है. इसलिए 20 की उम्र के बाद सभी लोगों को समय-समय पर बीपी चेक करना चाहिए, ताकि वक्त रहते बीमारी का पता चल सके और सही इलाज हो सके.

नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत ने News18 को बताया कि हाई ब्लड प्रेशर आजकल सबसे बड़ी समस्या बन चुका है. हाई बीपी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह अनकंट्रोल हो जाए, तो जानलेवा हो सकता है. समय-समय पर सभी को इसकी जांच करानी चाहिए और बीपी गड़बड़ हो, तो डॉक्टर से मिलकर ट्रीटमेंट कराना चाहिए. आमतौर पर बीपी कंट्रोल करने के लिए दवाएं दी जाती हैं और बीपी बढ़ने के कारणों की जांच की जाती है. अगर बीपी बढ़ने की वजह का पता चल जाए, तो उस कंडीशन को भी ट्रीट किया जाता है.

क्या जिंदगीभर लेनी पड़ती है BP की दवा?

जब किसी व्यक्ति को पहली बार BP की दवा शुरू करनी पड़ती है, तो उसके मन में सबसे बड़ा डर यही होता है कि क्या अब यह दवा जिंदगीभर खानी पड़ेगी? कई लोग इसी डर के कारण दवा लेने से कतराने लगते हैं या कुछ दिनों बाद दवा अपनी मर्जी से बंद कर देते हैं. इस बारे में जब डॉक्टर का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि शरीर में चल रही गड़बड़ियों का संकेत होता है. खराब लाइफस्टाइल, ज्यादा नमक का सेवन, मोटापा, अत्यधिक तनाव, नींद की कमी, स्मोकिंग और शराब इसके मुख्य कारण हैं. कुछ मामलों में यह जेनेटिक भी होता है. जब ब्लड प्रेशर लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो यह दिल, दिमाग, किडनी और आंखों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है. इसके लक्षण भी नजर नहीं आते हैं.

डॉक्टर सोनिया रावत ने बताया कि हर मरीज को बीपी की दवा जीवनभर नहीं लेनी पड़ती है. अगर किसी व्यक्ति का बीपी नींद की कमी, ज्यादा स्ट्रेस, खराब लाइफस्टाइल या अनहेल्दी खानपान से बढ़ रहा है, तो इसका पता लगाने की कोशिश की जाती है. इन चीजों में सुधार करके कई लोगों का बीपी दोबारा नॉर्मल होने लगता है. ऐसे में धीरे-धीरे दवा की डोज कम की जाती है और कुछ महीनों बाद बंद कर दी जाती है. ध्यान रखने वाली बात यह है कि दवा बंद करने के बाद भी बीपी की मॉनिटरिंग लगातार की जाती है, ताकि दोबारा बढ़ने पर उसे कंट्रोल किया जा सके. करीब 20% मरीजों की बीपी की दवा कुछ महीनों बाद बंद हो सकती है. हालांकि यह फैसला मरीज की कंडीशन के अनुसार सिर्फ डॉक्टर ही लेते हैं. अपनी मर्जी से कभी दवा बंद न करें.

अपनी मर्जी से दवा बंद करना खतरनाक

डॉक्टर के अनुसार बहुत से लोग BP नॉर्मल होते ही दवा अपनी मर्जी से बंद कर देते हैं, जो खतरनाक हो सकता है. डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद करते ही BP अचानक बहुत बढ़ सकता है, जिससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक या किडनी डैमेज का खतरा बढ़ जाता है. हाई ब्लड प्रेशर एक साइलेंट किलर है, इसलिए दवा तभी बंद करें जब डॉक्टर इसकी अनुमति दें. जिन लोगों को क्रोनिक बीपी की शिकायत होती है या बीपी की वजह से अन्य ऑर्गन्स पर असर पड़ने लगता है, उन मामलों में लोगों को जिंदगीभर दवा लेने की सलाह दी जाती है. अनकंट्रोल बीपी के मरीजों को भी लगातार दवा लेनी पड़ती है.

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दवा के साथ लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी

एक्सपर्ट की मानें तो ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के लिए सिर्फ दवा लेना ही काफी नहीं होता है. BP को लंबे समय तक कंट्रोल में रखने के लिए अच्छी लाइफस्टाइल, बैलेंस्ड डाइट, रोज 30-40 मिनट की वॉक या एक्सरसाइज, योग-प्राणायाम, पर्याप्त नींद और तनाव कम करना बेहद जरूरी है. नमक और प्रोसेस्ड फूड कम करने से दवा का असर बेहतर होता है और कई बार दवा की जरूरत भी घट जाती है. हाई ब्लड प्रेशर की दवा को लेकर डरने की नहीं, समझने की जरूरत है. कुछ लोगों को दवा लंबे समय तक या जीवनभर लेनी पड़ सकती है, जबकि कुछ में सही लाइफस्टाइल अपनाने से दवा धीरे-धीरे कम या बंद हो सकती है. सबसे ज़रूरी बात यह है कि BP को नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से कंसल्ट करें.

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