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Shattila Ekadashi 2026: शास्त्रों में जिक्र है कि बिना दान के एकादशी का व्रत अधूरा है. षटतिला एकादशी पर तिल, तिल से बने लड्डू या अन्य पदार्थों का दान करने से शनि दोष कम होता है और व्यक्ति के जीवन से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं.
उज्जैन. हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को विशेष पुण्यदायी और अत्यंत शुभ माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, पूरे वर्ष में कुल 24 एकादशी आती हैं, जो हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष में दो बार पड़ती हैं. प्रत्येक एकादशी का अपना अलग आध्यात्मिक महत्व होता है. मान्यता है कि इस पावन तिथि पर भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक आराधना करने से जीवन में सुख, शांति, धन-वैभव और सौभाग्य की प्राप्ति होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल 14 जनवरी को षटतिला एकादशी का पावन पर्व मनाया जाएगा. धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि इस दिन तिल से जुड़े 6 विशेष उपाय करने से दुर्भाग्य दूर होता है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है. यह दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने और पितरों की कृपा पाने के लिए भी अत्यंत फलदायी माना गया है. ऐसे में आइए जानते हैं उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज से कि षटतिला एकादशी के दिन तिल से जुड़े कौन से खास प्रयोग करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और भाग्य का साथ मिलता है.
1. षटतिला एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर जल में तिल मिलाकर स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है. यह केवल देह की स्वच्छता नहीं बल्कि आत्मिक और ऊर्जात्मक शुद्धि का भी माध्यम है. ऐसी मान्यता है कि इससे नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं और शरीर और मन में नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
2. शास्त्रों में वर्णन है कि बिना दान के एकादशी का व्रत अधूरा होता है. षटतिला एकादशी पर तिल, तिल से बने लड्डू या अन्य पदार्थों का दान करने से शनि दोष कम होता है और व्यक्ति के जीवन से कष्ट दूर होते हैं. जरूरतमंदों को तिल दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है.
3. घर और वातावरण की शुद्धि के लिए षटतिला एकादशी पर तिल का हवन श्रेष्ठ बताया गया है. इस दिन पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए हवन कुंड में तिल की आहुति दें. ऐसा करने से नकारात्मकता दूर होती है और घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है.
4. इस पावन दिन भोजन में भी तिल का प्रयोग करना शुभ माना गया है. तिल से बने सात्विक व्यंजन पहले भगवान श्री हरि विष्णु को अर्पित करें और उसके बाद ही उन्हें प्रसाद रूप में ग्रहण करें. ऐसा करने से स्वास्थ्य, समृद्धि और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं.
5. स्नान से पूर्व तिल से बना उबटन शरीर पर लगाना भी विशेष फलदायी माना गया है. तिल के औषधीय और पवित्र गुण शरीर के दोषों को दूर करते हैं. धार्मिक दृष्टि से यह भगवान विष्णु की पूजा के लिए स्वयं को शुद्ध और तैयार करने की एक पवित्र प्रक्रिया मानी जाती है.
6. षटतिला एकादशी पितृ शांति के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस दिन जल में तिल मिलाकर पितरों का तर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और वे अपने वंशजों पर कृपा बनाए रखते हैं. इससे परिवार में सुख-समृद्धि और सौभाग्य बढ़ता है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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