दिग्विजय सिंह का बड़ा ऐलान! MP किसानों को GI टैग नहीं मिला तो अनशन तय

शिवकांत आचार्य
भोपाल.
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार पर किसानों के साथ भेदभाव का गंभीर आरोप लगाया है. भोपाल में अपने सरकारी आवास पर रंगपंचमी के दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने कहा कि त्योहार के दिन सामान्यत: ऐसी वार्ता नहीं होती, लेकिन MP किसानों की समस्या इतनी विकराल है कि चुप्पी तोड़ी जानी जरूरी है. सिंह ने केंद्र से अनुरोध किया कि MP में उगाए जाने वाले बासमती चावल को APEDA GI टैग क्यों नहीं दे रहा. उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि GI टैग नहीं मिला तो वे अनशन पर बैठेंगे और इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पर होगी. सिंह ने UPA सरकार का हवाला दिया, जब MP के चावल को GI टैग मिला था, लेकिन BJP सरकार में निरस्त कर दिया गया.

पाकिस्तान से तुलना करते हुए कहा कि वहां कई जिलों को GI टैग मिले, जबकि भारत में कम. 2025 में PM को पत्र लिखा था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं. सिंह ने रिटायरमेंट अफवाहों पर स्पष्ट किया कि एक रिटायर्ड दंपति के वीडियो को मजाकिया अंदाज में शेयर किया था, जो कार से भारत घूम रहे हैं.  दिग्विजय सिंह का बयान MP किसानों की वर्षों पुरानी समस्या को सामने लाता है, जहां GI टैग की कमी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में नुकसान हो रहा है. सिंह ने कहा कि शिवराज सिंह लंबे समय CM रहे, लेकिन अब कृषि मंत्री होकर भी MP किसानों का हित नहीं देख रहे. बासमती का उत्पादन 2003 के बाद बढ़ा, पहले कम रकबा था, इसलिए पुराने फैसलों से जोड़ना गलत.

राज्यसभा का तीसरा टर्म नहीं, ऐसे दी सफाई
दिग्विजय सिंह ने रिटायरमेंट पर सफाई दी कि राज्यसभा का तीसरा टर्म नहीं लेंगे, लेकिन पार्टी के काम में जीवनभर सक्रिय रहेंगे. यह बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि GI टैग से 27 लाख किसानों की आय बढ़ सकती है और पाकिस्तान से प्रतिस्पर्धा में भारत मजबूत हो सकता है. केंद्र का चुप्पी सवाल खड़े करती है.

दिग्विजय सिंह का केंद्र पर प्रहार: GI टैग की मांग
दिग्विजय सिंह ने भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर MP किसानों के साथ अन्याय का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि APEDA MP बासमती को GI टैग नहीं दे रहा, जबकि यह प्रदेश में वर्षों से उगाया जा रहा है.

GI टैग का महत्व: किसानों की आय पर प्रभाव
GI टैग उत्पाद को अनोखी पहचान देता है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत तीन गुनी कर सकता है. सिंह ने कहा कि 27 लाख किसान प्रभावित हैं और उनकी आय बढ़ सकती है, लेकिन केंद्र की अनदेखी से नुकसान हो रहा है.

पाकिस्तान से तुलना: भारत का नुकसान
सिंह ने कहा कि पाकिस्तान में कई जिलों को GI टैग मिले, जबकि भारत में कम. इससे पाकिस्तान को लाभ मिल रहा है और MP किसान पीछे छूट रहे हैं.

अनशन की धमकी: जिम्मेदारी केंद्र पर
यदि GI टैग नहीं मिला तो अनशन पर बैठेंगे. जिम्मेदारी PM मोदी, शिवराज सिंह और पीयूष गोयल पर डाली. UPA सरकार में GI टैग मिला था, लेकिन अब निरस्त है.

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