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Satna Khanna Uncle Story: पप्पू खन्ना लोकल 18 को बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें लावारिस और जख्मी पशुओं को देखकर मदद करने की इच्छा होती थी. इसी भावना ने उन्हें पशु अस्पताल तक पहुंचाया, जहां प्रभारी डॉ बृहस्पति भारती से प्रेरणा लेकर उन्होंने इस सेवा का सिलसिला शुरू किया.
सतना. मध्य प्रदेश के सतना जिले के पशु चिकित्सालय में पिछले एक दशक से एक ऐसा चेहरा रोज दिखाई देता है, जो बिना किसी वेतन और पद के भी सेवा का पर्याय बन चुका है. 52 वर्षीय पप्पू खन्ना को आज शहर के लोग प्यार से खन्ना अंकल कहकर पुकारते हैं. सुबह से शाम तक अस्पताल में रहना और जरूरत पड़ने पर रातभर डटे रहना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है. 15 हजार से अधिक पशुओं को नई जिंदगी देने वाले खन्ना अंकल ने अपना पूरा जीवन बेजुबानों की सेवा को समर्पित कर दिया है. मूल रूप से छतरपुर के रहने वाले पप्पू सक्सेना उर्फ पप्पू खन्ना पिछले 12 वर्षों से सतना पशु चिकित्सालय में निःशुल्क सेवा दे रहे हैं.
लोकल 18 से बातचीत में खन्ना अंकल बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें लावारिस और घायल पशुओं को देखकर मदद करने की इच्छा होती थी. इसी भावना ने उन्हें अस्पताल तक पहुंचाया, जहां प्रभारी डॉ बृहस्पति भारती से प्रेरणा लेकर उन्होंने सेवा का सिलसिला शुरू किया. सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वह नियमित रूप से अस्पताल में मौजूद रहते हैं. इसके अलावा अगर कोई इमरजेंसी कॉल आती है, तो वह तुरंत पहुंच जाते हैं. वहीं कई बार पूरी रात अस्पताल में रुककर गंभीर रूप से घायल पशुओं की देखभाल करते हैं. अस्पताल में डॉक्टर की सहायता करना हो, दवाइयां तैयार करनी हों या फिर घायल जानवरों की सफाई और देखभाल खन्ना अंकल हर जिम्मेदारी निभाते हैं.
यही सबसे बड़ी कमाई और खुशी
उनका कहना है कि जब कोई पशु स्वस्थ होकर अपने पैरों पर खड़ा होता है, वही उनकी सबसे बड़ी कमाई और खुशी है. अब तक वह गाय, कुत्ते, बंदर, बकरी समेत कई तरह के पशुओं का इलाज कर चुके हैं, वो भी पूरी तरह निःशुल्क भाव से. जो भी व्यक्ति खुशी से 10 या 50 रुपये दे देता है, उसी से उनका गुजारा चलता है. किराया, दाना-पानी और रोजमर्रा की जरूरतें उसी से पूरी होती हैं.
नौकरी छोड़ चुना सेवा का रास्ता
पप्पू खन्ना पहले निजी कंपनियों में भी काम कर चुके हैं. टाटा डोकोमो, एनएसबी और पेप्टिक सिटी जैसी कंपनियों में उन्होंने नौकरी की लेकिन वहां उन्हें संतोष नहीं मिला. अंत में उन्होंने सब छोड़कर पशु चिकित्सालय में सेवा को अपना जीवन बना लिया. परिवार में भाभी और भतीजे हैं लेकिन उन्होंने कभी शादी नहीं की. वह हंसते हुए कहते हैं कि यह जीवन पशुओं के नाम है. शादी का ख्याल कभी आया ही नहीं. उनके लिए अस्पताल ही घर है और घायल पशु ही परिवार.
आज जब स्वार्थ और व्यस्तता के दौर में लोग अपने लिए समय नहीं निकाल पाते, ऐसे में पप्पू खन्ना की निःस्वार्थ सेवा समाज के लिए मिसाल है. बिना किसी सरकारी सहायता या वेतन के केवल सेवा भाव से 12 साल तक लगातार काम करना हरगिज आसान नहीं है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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