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गोंडा के तिलक राम गुप्ता बताते हैं कि उन्होंने हाई स्कूल तक पढ़ाई की. इसके बाद कुछ कारण बस पढ़ाई छोड़नी पड़ी. कुछ साल पहले नौकरी की तलाश की, लेकिन मनचाहा काम नहीं मिला. लगातार कोशिशों के बाद भी जब सफलता हाथ नहीं लगी, तो उन्होंने खुद का काम शुरू करने का फैसला किया. गांव और आसपास के इलाकों में शुद्ध और ताजा आटे और सरसों के तेल की मांग को देखते हुए उन्होंने घर पर ही आटा चक्की और सरसों करने वाली मशीन लगाने की योजना बनाई.
गोंडा: मेहनत, सही सोच और आत्मनिर्भर बनने की चाह हो तो छोटे स्तर से शुरू किया गया काम भी बड़ी कमाई का जरिया बन सकता है. इसका जीता-जागता उदाहरण है गोंडा जिले विकासखंड छपिया के एक युवक, जिन्होंने घर पर आटा चक्की लगाकर न सिर्फ खुद का रोजगार शुरू किया, बल्कि आज हर महीने लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं. इस काम में उनकी वाइफ का काफी सहयोग रहता है.
हाईस्कूल तक की है पढ़ाई
लोकल 18 से बातचीत के दौरान तिलक राम गुप्ता बताते हैं कि उन्होंने हाई स्कूल तक पढ़ाई की. इसके बाद कुछ कारण बस पढ़ाई छोड़नी पड़ी. कुछ साल पहले नौकरी की तलाश की, लेकिन मनचाहा काम नहीं मिला. लगातार कोशिशों के बाद भी जब सफलता हाथ नहीं लगी, तो उन्होंने खुद का काम शुरू करने का फैसला किया. गांव और आसपास के इलाकों में शुद्ध और ताजा आटे और सरसों के तेल की मांग को देखते हुए उन्होंने घर पर ही आटा चक्की और सरसों करने वाली मशीन लगाने की योजना बनाई.
शुरुआत में युवक ने ज्यादा बड़ा निवेश नहीं किया. करीब 80 से 1 लाख हजार रुपये खर्च कर उन्होंने एक छोटी आटा चक्की मशीन खरीदी और घर के एक कमरे में ही काम शुरू कर दिया. शुरुआत में सिर्फ गेहूं पिसाई का काम किया जाता था. धीरे-धीरे आसपास के लोग उनके काम की गुणवत्ता से प्रभावित होने लगे. साफ-सुथरा, शुद्ध और ताजा आटा और सरसों का तेल मिलने के कारण ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी.
स्वयं सहायता समूह से लोन लेकर शुरू किया बिजनेस
तिलक राम गुप्ता बताते हैं कि स्वयं सहायता समूह में जुड़ने के बाद समूह से लोन लिया और हमने आटा पीसने और सरसों का तेल की पेराई करने का मशीन लगाया. शुरू में हम और हमारी वाइफ मिलकर केवल लोगों का आटा पीसते थे और सरसों के तेल की पेराई करते थे. फिर हमारे वाइफ में कहा कि क्यों ना हम लोग इस काम को और आगे बढ़ाएं अपने घर पर आता पैकिंग और सरसों के तेल के पैकिंग का काम क्यों ना शुरू किया जाए. जिससे हम लोग का इनकम भी बढ़ेगा फिर हमने गेहूं का आटा पैकिंग का काम और सरसों के तेल के पैकिंग का काम शुरू किया हमारे यहां सरसों के तेल की पैकिंग आधा किलो 1 किलो 2 किलो 5 किलो और 15 किलो तक की शुद्ध सरसों के तेल की पैकिंग होती है. और आटा की पैकिंग 5 किलो 10 किलो 25 किलो और 50 किलो की पैकिंग की जाती है. हमारे फैमिली वालों का काफी सपोर्ट रहा और हमारे चाची का भी बहुत सपोर्ट रहा.
20 लोगों को दिए हैं रोजगार
तिलकराम की चाची रीमा बताती हैं कि हम लोगों का काफी सपोर्ट रहा. हम लोगों ने इनका स्वयं सहायता समूह के बारे में बताया और इन्होंने स्वयं सहायता समूह में जुड़कर अपने समूह का नाम श्री गणेश स्वयं सहायता समूह चल रहे हैं. तिलकराम बताते हैं कि हमारे यहां 10 से 12 महिलाएं काम करती हैं और 7 से 8 पुरुष काम करते हैं. बिजनेस की शुरुआत हमने एक लाख रुपए से किए हैं. सरसों की पेराई और गेहूं के पिसाई से डेली का इनकम 2 से 2500 रुपए का हो रहा है. सोलर पैनल और लाइट से हम मशीन को चलते हैं इससे लागत कम लगती है. भविष्य में हम अपनी खुद की कंपनी डालना चाहते हैं और इसी बिजनेस को आगे ले जाना चाहते हैं.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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