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Maa Har Siddhi Temple Dhar: भक्त मां हरसिद्धि मंदिर की दीवार के पीछे गोबर से उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं. ऐसा कर वह देवी के समक्ष अपनी मनोकामना रखते हैं. भक्तों की धन-धान्य और संतान प्राप्ति की मनोकामनाएं पूर्ण हुई हैं. हर साल नवरात्रि पर मंदिर परिसर में विशाल मेला लगता है. मां हरसिद्धि का मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है बल्कि यह एक धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर भी है.
इंदौर. मध्य प्रदेश के इंदौर के पास धार जिले में नर्मदा नदी के किनारे बसे सिंघाना में मां हरसिद्धि का मंदिर पांडव कालीन इतिहास का उम्दा उदाहरण है. यहां की वास्तुकला और बनावट सदियों पुराने इतिहास और अटूट श्रद्धा का जीता-जागता केंद्र है. मान्यता है कि मां हरसिद्धि की मूर्ति दिन में तीन रूप धारण करती है. मंदिर की सातवीं पीढ़ी के पुजारी शेखर पांडे ने लोकल 18 को बताया कि हरसिद्धि मंदिर को पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान बनाया था, जब वह एक वर्ष के लिए यहां पर रहे थे. मान्यता अनुसार जब पांडव अपने 12 वर्ष के वनवास और एक वर्ष के अज्ञातवास पर थे, तब उन्होंने नर्मदा तट के इस अंचल में काफी समय बिताया था. तब पांडवों ने अपनी सुरक्षा और विजय के आशीर्वाद के लिए यहां देवी की स्थापना की थी. मंदिर की बनावट में इस्तेमाल किए गए विशाल पत्थर और उनकी शैली कहीं न कहीं प्राचीन वास्तुकला की याद दिलाती है. यहां के स्तंभों पर जो नक्काशी है, वह इस बात का प्रमाण है कि यह मंदिर कई हजार साल पुराना है.
मां हरसिद्धि मंदिर को देखते ही लगता है कि यह सदियों पुराना निर्माण है. पूरा मंदिर कई अलग-अलग खंभों टिका है जबकि हर खंबे की अपनी एक पहचान और कलाकृति है. गर्भगृह के द्वार पर भी कई छोटी-छोटी मूर्तियां हैं, जो इसे अत्यधिक आकर्षक बनाती हैं. वहीं ठीक ऊपर ही बड़ी हथेलियां बनी हुई हैं. कहा जाता है कि पांडवों ने अपनी हथेलियों के निशान यहां छोड़े थे, जो अभी भी मौजूद हैं.
गर्भगृह के पास रहस्यमयी गुफा
गर्भगृह के ठीक पास एक गुफा है. बताया जाता है कि यह गुफा बाग की गुफाओं तक जाती है. प्राचीन काल में ऋषि-मुनि और राजा-महाराजा इसका उपयोग गुप्त यात्राओं के लिए करते थे. पुजारी शेखर पांडे बताते हैं कि उनके दादा और कुछ साथियों ने यहां से जाने की कोशिश की थी लेकिन गुफा में ऑक्सीजन की कमी की वजह से लालटेन बुझ गई और उन्हें वापस लौटना पड़ा. हालांकि अब तक इसकी प्रामाणिक पुष्टि नहीं हो पाई है कि यह कहां तक जाती है लेकिन गुफा आज भी है, जिसे कुछ सालों पहले ऊपर से ढककर बंद कर दिया गया था.
एक दिन में मां के तीन रूप
सिंघाना में मौजूद हरसिद्धि मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र है. मान्यता है कि एक दिन में यहां मां के तीन रूपों के दर्शन होते हैं. वह सुबह बाल्यावस्था में, दोपहर में युवावस्था में और शाम को वृद्धावस्था में दर्शन देती हैं. कहा जाता है कि जो भी सच्चे मन से मां से कुछ भी मांगता है, उसकी मन्नत जरूर पूरी होती है. लोग मंदिर की दीवार के पीछे गोबर से उल्टा स्वास्तिक बनाकर मन्नत मांगते हैं. लोगों की धन-धान्य और संतान प्राप्ति की मनोकामनाएं पूर्ण हुई हैं. हर साल नवरात्रि पर यहां विशाल मेला लगता है. हरसिद्धि मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है बल्कि एक धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर भी है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.
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