सीहोर जिले में नए साल के तीसरे दिन बुधवार को कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का असर रहा। सुबह सबसे घना कोहरा छाया रहा, जिससे विजिबिलिटी घटकर मात्र 20 मीटर तक सिमट गई।
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घने कोहरे के कारण सुबह सूर्य की किरणें धरती तक देर से पहुंच सकीं। शीतलहर इतनी तेज रही कि सड़क किनारे लगे छोटे पौधों और मकड़ी के जालों पर जमी ओस की बूंदें बर्फ की परत जैसी नजर आईं।
चारों ओर कोहरे की मोटी चादर छाई रही, जिससे पास की वस्तुएं भी स्पष्ट दिखाई नहीं दे रही थीं। सामान्य से अधिक तेज हवाओं के चलते शीतलहर का असर और बढ़ गया, जिससे लोगों को दिनभर कड़ाके की ठंड झेलनी पड़ी।
दिसंबर में 10 डिग्री से नीचे रहा न्यूनतम तापमान
दिसंबर माह में सीहोर जिले का न्यूनतम तापमान लगातार 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना रहा। हालांकि 1 और 2 जनवरी को न्यूनतम तापमान 10.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जबकि 3 जनवरी को यह बढ़कर 12.5 डिग्री सेल्सियस रहा।
शीतलहर से पौधों के जालों पर जमी बर्फ।
चना-तुवर की फसल में इल्ली का खतरा
शासकीय कृषि कॉलेज स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. एसएस तोमर ने बताया कि हवाओं की दिशा उत्तर की ओर से बनी हुई है और आसमान बादल युक्त है। इसी कारण न्यूनतम तापमान में हल्की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन ठंड का असर बना रहेगा। बादल युक्त मौसम से चना और तुवर की फसलों में इल्ली प्रकोप बढ़ने की आशंका है।