हरदा कलेक्ट्रेट सभागार में गुरुवार को जल उपयोगिता समिति की बैठक आयोजित की गई। इसमें किसानों ने ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल के लिए 18 मार्च से तवा डैम से सिंचाई का पानी छोड़ने की मांग की। किसानों का लक्ष्य है कि 23 मार्च तक हरदा जिले के किसानों को पानी उपलब्ध हो सके। जल संसाधन विभाग की कार्यपालन यंत्री सोनम बाजपेई ने बताया कि इस वर्ष सिंचाई विभाग ने मूंग की फसल की सिंचाई के लिए 38460 हेक्टेयर क्षेत्र में पानी उपलब्ध कराने की योजना तैयार की है। इसके तहत हरदा डिवीजन के 111 और टिमरनी डिवीजन के 56 गांवों के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। हरदा डिवीजन में 19135 हेक्टेयर और टिमरनी डिवीजन में 19325 हेक्टेयर में सिंचाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पिछले वर्षों में ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल के लिए तवा डैम से पानी छोड़े जाने से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।
बैठक में किसानों ने अपनी समस्याएं भी रखीं। ग्राम पलासनेर के किसानों ने बताया कि उन्हें आज तक मूंग की सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पाया है। ग्राम देवास के कृषक राहुल पटेल ने कहा कि कमांड एरिया में होने के बावजूद पानी नहीं पहुंच पाता, जिससे उन्हें नुकसान होता है। ग्राम भुन्नास के किसान सत्यनारायण सिरोही ने नहर की सफाई न होने पर चिंता जताई, जिससे पानी मिलने में परेशानी हो सकती है। विधायक डॉ. आर.के. दोगने ने सुझाव दिया कि नहर के पानी को रोकने के लिए बनाए जाने वाले हेडप की समस्या के समाधान के लिए स्थानीय किसानों की एक समिति बनाई जाए। इसमें नहर विभाग के अधिकारियों को भी शामिल किया जाए, ताकि सभी को समय पर पानी मिल सके। उन्होंने हरदा को उसके हिस्से का पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की भी मांग की। कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने बताया कि एचबीसी में पांचवें और एलबीसी में सातवें दिन ओसरा बंदी (पानी की बारी) लागू की जाएगी। भारतीय किसान संघ की मांग .