दिल्ली के ऐतिहासिक नेहरू स्टेडियम का होगा कायापलट, अब बनेगी अत्याधुनिक ‘स्पोर्ट्स सिटी’।

दिल्ली का ऐतिहासिक नेहरू स्टेडियम एक बार फिर चर्चा में है। मौजूद जानकारी के अनुसार, खेल मंत्रालय अब इस पुराने ढांचे को तोड़कर एक आधुनिक “स्पोर्ट्स सिटी” के रूप में विकसित करने की योजना बना रहा है। बता दें कि यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है और काम की समयसीमा तय नहीं की गई है। इस पूरे प्रोजेक्ट के तहत लगभग 102 एकड़ क्षेत्र में एक ऐसा खेल परिसर बनाया जाएगा जहां एक ही जगह पर कई खेलों की सुविधाएं, खिलाड़ियों के लिए उच्च-प्रदर्शन केंद्र और मीडिया स्टूडियो मौजूद रहेंगे।
गौरतलब है कि नेहरू स्टेडियम का निर्माण बीसवीं सदी के अंत में हुआ था और इसे 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए बड़े पैमाने पर आधुनिक रूप दिया गया था। उस समय इसे राजधानी का प्रमुख खेल स्थल माना जाता था, लेकिन अब मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस विशाल परिसर का केवल लगभग 28 प्रतिशत हिस्सा ही नियमित रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है। यही कारण है कि सरकार अब इसे नए रूप में विकसित करना चाहती है ताकि यह पूरे साल खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों के लिए उपयोगी साबित हो सके।
खेल मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य केवल एक स्टेडियम को पुनर्निर्मित करना नहीं, बल्कि एक ऐसी “स्पोर्ट्स सिटी” तैयार करना है जो प्रदर्शन, प्रशिक्षण, प्रसारण और जनभागीदारी  सभी को एक ही स्थान पर जोड़ दे। मंत्रालय की योजना है कि इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं जैसे कि एथलीट हॉस्टल, खेल विज्ञान केंद्र, फिजियोथेरेपी लैब, और इंडोर-अरेना शामिल किए जाएं। इसके अलावा, एक अत्याधुनिक प्रसारण स्टूडियो भी बनाया जाएगा ताकि खेल संघ अपनी सामग्री खुद तैयार कर सकें और स्पॉन्सरशिप से आय बढ़ा सकें।
बता दें कि भारत सरकार इस प्रोजेक्ट के लिए कतर और ऑस्ट्रेलिया के मॉडल का अध्ययन कर रही है। इन देशों ने अपने खेल परिसरों को न सिर्फ खिलाड़ियों के प्रशिक्षण केंद्र के रूप में बल्कि आम जनता के लिए भी सक्रिय स्थानों के रूप में विकसित किया है। उदाहरण के तौर पर, ऑस्ट्रेलिया में “स्पोर्ट्स प्रीसिंक्ट्स” ऐसे बनाए गए हैं जहां मेट्रो और बस नेटवर्क सीधा स्टेडियम तक जुड़ा होता है, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या नहीं होती। वहीं, कतर ने अपने स्टेडियमों को इस तरह से डिजाइन किया कि बड़े आयोजनों के बाद भी वे स्थानीय समुदाय के काम आ सकें।
मौजूद सूत्रों के मुताबिक, भारत में इस योजना को लागू करने में कई चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं, जैसे भूमि उपयोग की अनुमति, निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की साझेदारी, और लंबी अवधि में रखरखाव की योजना। साथ ही, स्टेडियम को तोड़ने से पहले वहां मौजूद खेल संघों और आयोजनों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी करनी होगी।
फिलहाल, मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया है कि परियोजना पर काम शुरू होने की कोई निश्चित तिथि नहीं तय की गई है, लेकिन अध्ययन और योजना प्रक्रिया तेज़ी से चल रही है। खेल मंत्री की हाल की कतर यात्रा को इस दिशा में एक गंभीर कदम माना जा रहा है। आने वाले महीनों में यह तय होगा कि क्या नेहरू स्टेडियम का यह नया रूप वास्तव में भारत की खेल संरचना को नई दिशा दे पाएगा या फिर यह भी किसी अधूरी योजना की तरह कागज़ों तक सीमित रह जाएगा।

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