प्रोस्टेट के इलाज में देरी बन सकती है मुसीबत, अब बिना ऑपरेशन दूर होने लगी है परेशानी

Prostate Problem: बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया BPH 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में पाई जाने वाली एक आम बीमारी बनती जा रही है. इसकी शुरुआत इतनी धीमी होती है कि लोग अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन यही नजरअंदाजी दर्द और परेशानी का सबब बन जाती है. दरअसल, उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार बढ़ता जाता है, जिससे यूरिथ्रा पर दबाव पड़ता है और पेशाब का रास्ता संकरा हो जाता है. इसके कारण पेशाब की धार कमजोर होना, बार-बार पेशाब आना, अचानक पेशाब की तीव्र इच्छा होना और रात में कई बार उठकर पेशाब जाना जैसी समस्याएं सामने आती हैं. अगर शुरुआत में इसका इलाज करा ली जाए तो जीवन आराम से कटता है लेकिन नजरअंदाज करने का भयंकर खामियाजा भुगतना पड़ता है. यहां एक्सपर्ट BPH के इलाज के तरीकों पर दोबारा सोचने की सलाह दे रहे हैं.

दवा से पूरी तरह ठीक नहीं होती
बीपीएच का शुरुआत में दवा से इलाज किया जाता है. इसमें अल्फा-ब्लॉकर्स और 5-अल्फा रिडक्टेज इनहिबिटर्स (5-ARIs) का इस्तेमाल किया जाता है. अल्फा-ब्लॉकर्स प्रोस्टेट और ब्लैडर की मांसपेशियों को ढीला कर पेशाब के बहाव को बेहतर बनाते हैं, जबकि 5-ARIs धीरे-धीरे प्रोस्टेट के आकार को कम करने में मदद करते हैं. इन दवाओं से लक्षणों में राहत जरूर मिलती है, लेकिन प्रोस्टेट के बढ़ने से बनी रुकावट पूरी तरह खत्म नहीं होती. कई मामलों में बीमारी आगे बढ़ती रहती है, भले ही मरीज को लगे कि स्थिति नियंत्रण में है. लंबे समय तक दवाओं पर निर्भर रहने से साइड इफेक्ट्स, ब्लड प्रेशर में गिरावट, चक्कर और किडनी से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं.

मिनिमली इनवेसिव सर्जिकल थेरेपी  
BPH के इलाज में अब एक नया बदलाव देखा जा रहा है. बेबी मेमोरियल हॉस्पिटल, कालीकट के चीफ कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट डॉ. हरिगोविंद पोथियेदाथ के अनुसार, अब मिनिमली इनवेसिव सर्जिकल थेरेपी (MISTs) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है. इनमें प्रोस्टेटिक यूरिथ्रल लिफ्ट (PUL) जैसे आधुनिक प्रोसीजर शामिल हैं, जिनमें UroLift सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है. इस तकनीक में छोटे-छोटे इम्प्लांट लगाए जाते हैं, जो प्रोस्टेट के टिशू को यूरिथ्रा से दूर कर देते हैं. इससे पेशाब का रास्ता खुल जाता है और रुकावट दूर हो जाती है. इस प्रक्रिया में न तो प्रोस्टेट का टिशू काटा जाता है और न ही जलाया जाता है. आमतौर पर यह लोकल एनेस्थेसिया में की जाती है और मरीज जल्दी ठीक होकर सामान्य जीवन में लौट सकता है.

सर्जरी में देरी से बढ़ सकता है ब्लैडर और किडनी का खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि BPH में सर्जरी को टालना कई बार नुकसानदायक हो सकता है. यूरोलॉजिस्ट डॉ. कृष्णमोहन आर बताते हैं कि लगातार रुकावट के कारण ब्लैडर को पेशाब निकालने के लिए ज्यादा दबाव लगाना पड़ता है. इससे ब्लैडर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर हो जाती हैं. नतीजा यह होता है कि पेशाब पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाता, पेशाब रुकने लगता है, बार-बार संक्रमण होता है और ब्लैडर की समस्या गंभीर हो जाती है. कुछ मामलों में ये बदलाव स्थायी हो सकते हैं, जिससे बाद में की गई सर्जरी का फायदा भी सीमित रह जाता है. यही कारण है कि अब यूरोलॉजिस्ट मरीजों को शुरुआती चरण में ही मिनिमली इनवेसिव प्रोसीजर पर विचार करने की सलाह दे रहे हैं.

यौन क्षमता प्रभावित नहीं होती
BPH के इलाज में यौन क्षमता के प्रभावित होने का खतरा रहता है. ACE हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के यूरोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. सुरेश पाटंकर के अनुसार, कई दवाएं और पारंपरिक सर्जरी, खासकर टिशू हटाने या जलाने वाली प्रक्रियाएं, इरेक्टाइल डिसफंक्शन और रेट्रोग्रेड इजैकुलेशन जैसी समस्याओं से जुड़ी होती हैं. इसी डर से कई मरीज इलाज टालते रहते हैं. UroLift जैसी मिनिमली इनवेसिव तकनीकों में टिशू को नुकसान नहीं पहुंचाया जाता, इसलिए यौन क्षमता सुरक्षित रहती है. कई मरीज उसी दिन बिना कैथेटर के घर लौट सकते हैं और जल्दी अपने रोजमर्रा के काम शुरू कर देते हैं.  डॉ. आरएमएल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, लखनऊ के हेड ऑफ यूरोलॉजी डॉ. ईश्वर राम दयाल बताते हैं कि आजकल कई BPH मरीज हार्ट डिजीज, डायबिटीज और मोटापे जैसी दूसरी बीमारियों से भी जूझ रहे होते हैं. कुछ को लंबे समय तक एंटीकोआगुलेंट दवाएं लेनी पड़ती हैं, जिससे पारंपरिक सर्जरी जोखिम भरी हो जाती है. ऐसे मामलों में PUL और अन्य MISTs एक सुरक्षित विकल्प साबित हो रहे हैं, क्योंकि इन्हें लोकल एनेस्थेसिया में किया जा सकता है और शरीर पर दबाव कम पड़ता है.

इलाज का नजरिया बदल रहा है
विशेषज्ञ मानते हैं कि BPH सिर्फ असुविधा की बीमारी नहीं, बल्कि एक प्रोग्रेसिव समस्या है. अब सवाल यह नहीं रह गया है कि लक्षणों को कितने समय तक दबाया जाए, बल्कि यह है कि रुकावट को सही समय पर कैसे दूर किया जाए. मिनिमली इनवेसिव सर्जिकल थेरेपी से समय रहते इलाज करने पर ब्लैडर और किडनी को नुकसान से बचाया जा सकता है. जिन पुरुषों को पेशाब से जुड़ी समस्याएं हो रही हैं, उन्हें बिना देर किए यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए, ताकि उनकी स्थिति और स्वास्थ्य के अनुसार सही इलाज चुना जा सके और लंबे समय तक बेहतर जीवन गुणवत्ता बनी रहे.

डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल मरीजों की शिक्षा के लिए है. इसे पेशेवर चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें. व्यक्तिगत सलाह के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *