बैतूल में मध्यप्रदेश जल निगम की 618.1 करोड़ रुपए की ग्रामीण नलजल योजना की गति धीमी पड़ गई है। 545 गांवों को नल से पानी उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई इस परियोजना की चार उप-परियोजनाओं में से दो के ठेके रद्द कर दिए गए हैं। इससे योजना में कम से कम दो सा
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इस योजना में मुंबई की विक्रान इंजीनियरिंग और भोपाल की एल.एन. मालवीय इंफ्रा प्रोजेक्ट कंपनी को चार उप-परियोजनाएं सौंपी गई थीं। निगम ने बताया कि एल.एन. मालवीय की वर्धा और मेंढ़ा परियोजनाओं में काम की प्रगति अत्यंत कम थी, इसलिए ठेका समाप्त कर नया टेंडर जारी किया गया है। नई कंपनी को काम पूरा करने 18 माह का समय दिया जाएगा।
विक्रान इंजीनियरिंग द्वारा 215.55 करोड़ रुपए की घोघरी जल योजना में 162 गांवों तक पानी पहुंचाने का 67 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। वहीं, एल.एन. मालवीय की वर्धा परियोजना में मार्च 2023 से अब तक केवल 29 प्रतिशत काम हुआ, जबकि मेंढ़ा प्रोजेक्ट में 52 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है।
भाजपा-कांग्रेस दोनों ने नाराजगी जताई
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ने जल निगम अधिकारियों के साथ बैठक कर परियोजनाओं की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल जल्द उपलब्ध हो, यह हमारी प्राथमिकता है, लेकिन काम की धीमी रफ्तार निराशाजनक है।
कांग्रेस के पूर्व विधायक निलय डागा ने आरोप लगाया कि यह योजना 2018 में स्वीकृत हुई थी, लेकिन भाजपा सरकार की लापरवाही से ग्रामीण जनता अब तक पानी से वंचित है। उन्होंने कहा कि कंपनियों को पेनल्टी के साथ ब्लैकलिस्ट भी किया जाना चाहिए।
अब योजना में कम से कम दो साल की देरी की संभावना है।
नयी टेंडर प्रक्रिया और समय सीमा
नवीन प्रक्रिया के तहत दो माह में नए टेंडर होंगे। नई कंपनी को 18 माह का समय दिया जाएगा, जिससे परियोजना अब 2027 तक पूरी होने की संभावना है।
गौरतलब है कि 9 माह पहले भास्कर डिजिटल ने परियोजना की धीमी प्रगति को लेकर चेताया था। निगम का कहना है कि कंपनियों को बार-बार नोटिस और समय-सीमा विस्तार दिए गए थे, फिर भी काम पूरा नहीं हुआ।
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मध्यप्रदेश जल निगम की महत्वाकांक्षी योजना में बैतूल के 545 गांवों तक पानी पहुंचाने का काम धीमी गति से चल रहा है। 618.1 करोड़ रुपए की इस योजना में तीन साल बाद भी अधिकतम 40% काम ही पूरा हो सका है। पूरी खबर पढ़िए…