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Success Story: पूर्वी चंपारण के नितेश ठाकुर ने दिल्ली में BCA की पढ़ाई छोड़ गांव में शुद्ध दूध का कारोबार शुरू किया. मिल्क टेस्टिंग मशीन और ईमानदारी के दम पर नितेश आज घर बैठे महीने के 60 हजार रुपये कमा रहे हैं. उनकी तकनीक और पशुपालन के अनोखे गोल्डन टिप्स युवाओं के लिए स्वरोजगार की नई मिसाल पेश कर रहे हैं.आइए जानते हैं इनके सफर को.
आदित्य गौरव/पूर्वी चंपारण: आज के दौर में जहां युवा इंजीनियरिंग और कॉर्पोरेट नौकरियों के पीछे भाग रहे हैं. वहीं बिहार के पूर्वी चंपारण के एक युवा ने लीक से हटकर अपनी पहचान बनाई है. यह कहानी है हरसिद्धि प्रखंड के श्रीपुर गांव के रहने वाले नितेश ठाकुर की. जिन्होंने बीसीए की पढ़ाई छोड़कर पशुपालन की राह चुनी. आज पूरे जिले में ईमानदारी व शुद्धता की मिसाल बन गए हैं.
कोडिंग से गोपालन तक का सफर
नितेश दिल्ली में रहकर बीसीए (BCA) की पढ़ाई कर रहे थे. उनका बचपन का सपना एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने का था. लेकिन दिल्ली और गांव के बीच के सफर ने उनकी सोच बदल दी. नितेश बताते हैं कि दिल्ली में रहते हुए उन्होंने खान-पान की चीजों में मिलावट की खबरें सुनीं. वहीं जब भी वह गांव आते, तो बुजुर्गों से यह सुनने को मिलता कि अब शुद्ध दूध मिलना नामुमकिन हो गया है. लोग शिकायत करते थे कि ग्वाले मुनाफे के चक्कर में दूध में पानी मिला देते हैं. एक वृद्ध की बात ने उनके दिल को छू लिया कि हमारे जमाने में लोग ईमानदार थे और खान-पान शुद्ध था. बस यहीं से नितेश ने तय किया कि वह समाज को शुद्धता लौटाएंगे और पशुपालन के क्षेत्र में उतर गए.
तकनीक और ईमानदारी का संगम
एक कंप्यूटर छात्र होने के नाते नितेश ने पशुपालन में भी तकनीक का सहारा लिया. उन्होंने दिल्ली से एक विशेष मिल्क टेस्टिंग मशीन मंगवाई है. वह ग्रामीणों को दूध देने से पहले उसकी शुद्धता और फैट की जांच करते हैं, ताकि किसी को भी मिलावट की कोई गुंजाइश न रहे. वर्तमान में नितेश के पास चार गाएं हैं. जिनमें से तीन दुधारू हैं. नितेश बताते हैं कि उनकी एक गाय प्रतिदिन 20 लीटर तक दूध देती है. वह केवल दूध बेचकर ही घर बैठे हर महीने 40 से 60 हजार रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं.
पशुपालकों के लिए गोल्डन टिप्स
अपने अनुभव साझा करते हुए नितेश कहते हैं कि पशुपालन केवल मेहनत नहीं, बल्कि समझदारी का काम है. वह अन्य गोपालकों को सलाह देते हैं कि हमेशा पतली स्किन वाली गाएं ही खरीदनी चाहिए, क्योंकि उनका अनुभव कहता है कि ऐसी गाएं अधिक दुधारू होती हैं. इसके अलावा नितेश पशु आहार का भी व्यवसाय करते हैं. यहां भी उनकी कार्यशैली अनूठी है. वह कोई भी चारा या आहार तब तक ग्रामीणों को नहीं बेचते. जब तक वह उसका सफल परीक्षण अपनी गायों पर न कर लें.
भविष्य का लक्ष्य: शुद्धता का विस्तार
नितेश ठाकुर की ईमानदारी की चर्चा आज पूरे श्रीपुर गांव और आसपास के इलाकों में है. उनका उद्देश्य केवल पैसा कमाना नहीं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ होने वाले खिलवाड़ को रोकना है. वह आने वाले समय में अपने इस डेयरी फार्म को और विस्तार देना चाहते हैं ताकि अधिक से अधिक लोगों तक मिलावट मुक्त खाद्य पदार्थ पहुंचा सकें. नितेश उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो स्वरोजगार के जरिए समाज में बदलाव लाना चाहते हैं.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
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