डिकॉय टेक्नोलॉजी: ईरान-इज़राइल के बीच चल रहा छल और धोखे का युद्ध

ईरान और इज़राइल के बीच चल रही लड़ाई में हर दिन नई-नई चीजें निकलकर सामने आ रही हैं. यह लड़ाई घोषित युद्ध तो नहीं है, लेकिन युद्ध से कम भी नहीं है. इसमें दोनों पक्ष हर वो ट्रिक अपना रहे हैं, जिससे दूसरे को छकाया जा सके. तकनीक को सबसे बड़ा हथियार बनाया गया है. बाकी चीजें तो एकतरफ, यहां तक कि भ्रमजाल का भी सहारा लिया जा रहा है. जी हां! आपने सही पढ़ा- भ्रमजाल, छलावा, धोखेबाजी. कैसे? चलिए इसके बारे में विस्तार से बताते हैं.

इस युद्ध को डिकॉय टेक्नोलॉजी (Decoy Technology) एक अलग ही स्तर पर ले जा रही है. डिकॉय का मतलब होता है ‘छलावा’ या ‘नकली निशाना’. दरअसल, यह एक ऐसी चीज है जो दुश्मन को भ्रमित कर देती है. रडार, सेंसर या सैनिकों को लगता है कि वही ‘छवाला’ असली खतरा है, लेकिन असली खतरा कहीं और से आ रहा होता है. उदाहरण के लिए इज़राइल के ‘आयरन डोम’ की एक-एक मिसाइल 50-80 लाख रुपये की पड़ती है. लेकिन ईरान का एक सस्ता ड्रोन डिकॉय सिर्फ 15-20 हजार में! अगर ईरान 10 ऐसे नकली ड्रोन भेज दे, तो इज़राइल को उन्हें नष्ट करने के लिए 10 मिसाइलें दागनी पड़ेंगी. मतलब पूरा 8 करोड़ का नुकसान, जबकि ईरान का खर्च महज 2 लाख रुपये होगा. इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल दुश्मन को मानसिक और आर्थिक रूप से थकाने के लिए किया जाता है.

डिकॉय के चार मुख्य रूप

डिकॉय टेक्नोलॉजी युद्ध को एक ‘धोखे का खेल’ बना रही है, जहां दुश्मन को भ्रमित करके महंगे हथियार बर्बाद कर दिए जाते हैं. ये चार मुख्य रूप- मिसाइल, ड्रोन, नेवल और इलेक्ट्रॉनिक, न सिर्फ डिफेंस सिस्टम को थका देते हैं, बल्कि आर्थिक नुकसान भी पहुंचाते हैं. दूसरे विश्व युद्ध में भी डिकॉय का इस्तेमाल हुआ था. नकली टैंक बनाकर दुश्मनों को धोखा दिया गया था, लेकिन ये टेक्नोलॉजी आधुनिक सेंसर और AI के साथ और घातक हो गई हैं.

1. मिसाइल डिकॉय: रडार पर असली जैसा भ्रम

मिसाइल डिकॉय वे नकली वॉरहेड या सबम्यूनिशन होते हैं, जो रडार पर बिल्कुल असली मिसाइलों जैसे दिखते हैं, लेकिन इनमें कोई विस्फोटक नहीं होता. इनका मकसद दुश्मन की एंटी-मिसाइल सिस्टम (जैसे इंटरसेप्टर्स) को भटकाना है. एक असली मिसाइल के साथ 10-20 डिकॉय लॉन्च करो, तो दुश्मन को सभी को निशाना बनाना पड़ता है. नतीजा, उनकी महंगी मिसाइलें बेकार चली जाती हैं और असली हमला सफल हो सकता है.

ये डिकॉय अक्सर रडार-रिफ्लेक्टिव मटेरियल से बने होते हैं, जो रडार सिग्नल को बैक स्कैटर करते हैं. ईरान-इज़राइल की बात करें तो ईरान के फतह-2 हाइपरसॉनिक मिसाइल रास्ते में डिकॉय सबम्यूनिशन छोड़ते हैं, जो इज़राइल के एरो सिस्टम को कन्फ्यूज कर देते हैं. हाल ही में, ईरान ने कथित तौर पर हेलीकॉप्टर पर पेंटिंग करके नकली डिकॉय बनाए, जिससे इज़राइल की महंगी मिसाइलें बर्बाद हो गईं. ईरान बैलिस्टिक मिसाइलों को छिपाने के लिए फेक लॉन्चर और इन्फ्रारेड कैमोफ्लाज भी इस्तेमाल करता है, जो सैटेलाइट सर्विलांस को धोखा देते हैं. अप्रैल 2024 के हमले में ईरान ने ड्रोन को डिकॉय की तरह इस्तेमाल किया, ताकि इज़राइल की कमजोरियां उजागर हों.

2. ड्रोन डिकॉय: सस्ते ‘उड़ते जाल’ जो रडार को जगाते हैं

ड्रोन डिकॉय छोटे, सस्ते और मास-प्रोड्यूस्ड ड्रोन होते हैं, जो दुश्मन के एयर डिफेंस रडार को ‘जगाने’ या थकाने के लिए भेजे जाते हैं. ये रडार चालू होते ही ये ड्रोन डिकॉय खुद निशाना बन जाते हैं, जिससे असली हमला आसान हो जाता है. इनकी कीमत इतनी कम होती है कि इन्हें सैकड़ों की संख्या में लॉन्च किया जा सकता है. उदाहरण के लिए ईरान के शाहेद-136 ड्रोन, जो आयरन डोम को थकाने का काम करते हैं.

विस्तार से कहें तो ये ड्रोन अक्सर ‘लॉयटरिंग’ (मंडराने वाले) होते हैं, जो आकाश में घूमते रहते हैं और दुश्मन को लुभाते हैं. यूक्रेन-रूस युद्ध में यूक्रेन ने हवा भरे हुए डिकॉय ड्रोन इस्तेमाल किए, जो बाउंसी कैसल्स जैसे दिखते हैं और रूसी मिसाइलों को लाखों डॉलर का नुकसान पहुंचाते हैं. रूस भी डिकॉय ड्रोन भेजकर यूक्रेन की एंटी-एयर डिफेंस की लोकेशन ढूंढता है.

ईरान के मोहाजिर-6 जैसे ड्रोन रडार को एक्टिवेट करते हैं, फिर एंटी-रेडिएशन मिसाइल उन्हें मार गिराती है. चीन ने फ्लाइंग विंग ड्रोन विकसित किए हैं, जो दुश्मन के जहाजों को भटकाने के लिए स्वार्म डिकॉय लॉन्च करते हैं. ये डिकॉय न सिर्फ रक्षा थकाते हैं, बल्कि दुश्मन की पोजिशन भी रिवील कर देते हैं.

3. नेवल डिकॉय: समुद्री युद्ध में ‘नकली बेड़ा’

नेवल डिकॉय समुद्र में इस्तेमाल होने वाले छलावे हैं, जैसे हवा से भरे इन्फ्लेटेबल नकली जहाज या बोट जो रडार पर असली फ्लीट जैसे दिखते हैं. दुश्मन की एंटी-शिप मिसाइलें इन्हें निशाना बनाती हैं, जबकि असली जहाज सुरक्षित रहते हैं. ये रडार पर आसानी से दिख सकने वाले मटेरियल से बने होते हैं, और अक्सर चाफ (मेटल स्ट्रिप्स) या फ्लेयर्स के साथ आते हैं.

ये डिकॉय ‘एरिया डिनायल’ रणनीति का हिस्सा हैं, जैसे ईरान का होर्मुज स्ट्रेट में इस्तेमाल. अमेरिकी नेवी का AN/SLQ-49 चाफ ब्यू डिकॉय सिस्टम रडार को कन्फ्यूज करता है. नुल्का डिकॉय जहाजों से लॉन्च होते हैं और मिसाइलों को कई मिनटों तक भटकाते हैं. ईरान फास्ट बोट्स और मिन्स के साथ इनका जाल बिछाता है, जो अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर्स को रोक सकता है.

4. इलेक्ट्रॉनिक डिकॉय: अदृश्य सिग्नल का जाल

इलेक्ट्रॉनिक डिकॉय सबसे अलग स्तर की चालाकी है. इनमें कोई भौतिक चीज नहीं, बस नकली इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल हैं, जैसे कि रडार वेव्स, रेडियो एमिशन या इन्फ्रारेड सिग्नेचर. ये बिना कुछ दिखाए दुश्मन के सेंसरों को भटका देते हैं. उदाहरण के लिए जीपीएस स्पूफिंग से ड्रोन को गलत रास्ता दिखाना.

ये चारों रूप मिलकर युद्ध को ‘धोखे का मैदान’ बना देते हैं, जहां विजेता वही है जो सबसे अच्छा छलावा रच सकता है. ईरान जैसे देश सस्ते डिकॉय से अमीर दुश्मनों को थका रहे हैं.

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